For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल-रहनुमा का’ मन काला, शक्ल पर उजाला है |

काफिया : आला . रदीफ़ : है

बह्र : २१२  १२२२  २१२  १२२२

हाथ में वही अंगूरी सुरा,पियाला है

रहनुमा का’ मन काला, शक्ल पर उजाला है |

छीन ली गई है आजीविका, दिवाला है

ढूंढ़ते रहे हैं सब, स्रोत को खँगाला है ||

आसमान पर जुगनू, चाँद सूर्य धरती पर

धर्म कर्म सब कुछ, भगवान का निराला है |

सब गड़े हुए मुर्दों को, उखाड़ते नेता

अब चुनाव क्या आया, भूत को उछाला है |

राज नीति में रिश्तेदार ही, अहम है सब

वो कहीं बहन भाई, या हबीब साला है |

समतलों में सब मस्जिद चर्च, बात है अद्भूत

उस पहाड़ पर जो कोठी, वही शिवाला है |

वो बड़ी बड़ी आँखें, प्रेयसी की हैं कातिल

शोख वो नयन लगते, चश्म- ए- गज़ाला है |

है समानता मन्दिर और, मद्य खाने में

बारहा चढ़े जो ‘काली’ के’ सिर, वो’ हाला है |

मौलिक/ अप्रकाशित

Views: 100

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Kalipad Prasad Mandal on November 6, 2017 at 8:17pm

आदरणीय समीर कबीर साहिब आदाब , सही कहा आपने  , तकतीअ के समय उधर ध्यान नहीं गया | उसको ठीक करके दुबारा पेश करता हूँ | आदाब 

Comment by Samar kabeer on November 6, 2017 at 5:39pm
जनाब कालीपद प्रसाद मण्डल जी आदाब,ग़ज़ल बहुत समय चाहती है,इसे फिर से कहने की कोशिश करें,हुस्न-ए-मतला में ईता दोष है ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

amod shrivastav (bindouri) posted a blog post

बहुत पछतायेगा वो मेरा पता पा कर - ग़ज़ल

बह्र - 1222-122-2212-22कोई यूँ खुश हुआ हो अपना खुदा पाकर।।बहुत पछताएंगे वो मेरा पता पाकर।।सफर चलना…See More
31 seconds ago
narendrasinh chauhan commented on V.M.''vrishty'''s blog post जलती मुस्कुराहटें
"लाजवाब"
33 minutes ago
narendrasinh chauhan commented on रकमिश सुल्तानपुरी's blog post ग़ज़ल-वक्त आने दो जरा फ़िर
"खुब सुन्दर रचना"
33 minutes ago
narendrasinh chauhan commented on Anita Maurya's blog post नज़्म - कहाँ जाऊँ के तेरी याद का
"लाजवाब"
37 minutes ago
Surkhab Bashar commented on Sushil Sarna's blog post अनकहा ...
"जनाब  सुशील  सरना  जी आदाब, बहुत अच्छी रचना हुई, मुबारक पेश करता हूँ"
3 hours ago
Profile IconSurkhab Bashar and Bahorik Ram Sahu joined Open Books Online
4 hours ago
V.M.''vrishty'' commented on V.M.''vrishty'''s blog post जलती मुस्कुराहटें
"आदरणीय बृजेश कुमार जी,सादर अभिनंदन! बहुत बहुत हार्दिक धन्यवाद!"
4 hours ago
V.M.''vrishty'' commented on V.M.''vrishty'''s blog post जलती मुस्कुराहटें
"आदरणीय समर कबीर सर, सादर नमन! आपके स्नेहिल शब्दो के लिए हृदय से आभार!"
4 hours ago
V.M.''vrishty'' commented on V.M.''vrishty'''s blog post जलती मुस्कुराहटें
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी,प्रणाम! बहुत बहुत धन्यवाद!"
4 hours ago
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post पढ़ो तो इसको’ फाड़ो मत- गजल
"आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी सादर नमस्कार, सही कहा आपने , वाकई हम…"
6 hours ago
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post पढ़ो तो इसको’ फाड़ो मत- गजल
"आदरणीय  Samar kabeer जी सादर नमस्कार, हमेशा की तरह आपकी शानदार इस्लाह को सादर नमन, आपसे…"
7 hours ago
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post पढ़ो तो इसको’ फाड़ो मत- गजल
"आदरणीय बृजेश कुमार 'ब्रज'   जी सादर नमस्कार, आपकी हौसलाफजाई का…"
7 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service