For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

बरगद का इक बूढ़ा पेड़

 

खिड़की खुलते ही नज़र आता था सोसायटी के पीछे खड़ा 

बरगद का इक बूढ़ा पेड़  

हर मौसम में एक नयी पोशाक पहने |

 

शाखें हिलाकर हाथ की तरह  

जाने किस किसको बुला लिया करता था,

अनजान से चेहरे आते

और कुरेदकर लिख जाते

अपनी ख्वाहिशें और ग़म उसके तनों पर

चाँद जब परेड करता रात में

जाने कितने राज़ दफ्न कर दिया करता था वो अपने सीने में |

 

मग़र कल शाम...

कमेटी ने काटकर इसे  गिरवा दिया है

कहते हैं इसकी जड़ों के टाँके उनके घरों की ज़मीन पर खुलते हैं

रात भर चीखता रहा है वो बरगद ...

 

खिड़की खोलने में अब डर सा लगता है मुझको ....

Views: 629

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Abhinav Arun on June 18, 2011 at 2:21pm
एक मार्मिक काव्य ... आज के सच के बेहद करीब सही कहा बंधू बिना वृक्षों के हमारा जीवन कहा और जीवन में रस कहाँ ?? अब ये तो व्यवस्था  को सोचना होगा की हम कहाँ जा रहे हैं ?? प्रभावी रचना साधुवाद !!!
Comment by Veerendra Jain on June 16, 2011 at 11:22am
Ambarish ji...bahut bahut shukriya...
Comment by Veerendra Jain on June 16, 2011 at 11:21am
Bahut bahut aabhar...Amitesh ji...
Comment by Veerendra Jain on June 16, 2011 at 11:20am
Tilak Sir...aap gunijano ka margdarshan sadaiv se sahaayak raha hai....bahut bahut dhanywad....
Comment by Er. Ambarish Srivastava on June 16, 2011 at 1:08am

बहुत खूब मित्र ! जैसा कि विद्वजनों नें कहा है चिंतन की इसी धारा में बहते रहें.......साधुवाद ..:)) 

Comment by अमि तेष on June 15, 2011 at 2:54pm
hardaysparsi...

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Tilak Raj Kapoor on June 15, 2011 at 1:14pm
बहुत खूबसूरत। काव्‍य में इसी चिंतन के स्‍तर को बनाये रखें।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Sep 29
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11
जगदानन्द झा 'मनु' replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय, प्रणाम संगहि संग हार्दिक धन्यवाद। अपनेक मार्गदर्शन पाबि बहुत बेसी मोटिवेशन आ सीखक मिलैए…"
Sep 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Aug 15

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service