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मुझसे रूठा है कोई उसको मनाना होगा - सलीम रज़ा रीवा

2122 1122 1122 22 

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मुझसे रूठा है कोई उसको मनाना होगा
भूल कर शिकवे-गिले दिल से लगाना होगा   
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जिन चराग़ों से ज़माने में उजाला फैले 
उन चराग़ों को हवाओ से बचाना होगा 
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जिसकी ख़ुशबू से महक जाए ये दुनिया सारी
फूल गुलशन में कोई  ऐसा खिलाना होगा
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मैं जहाँ छोड़ के आ जाऊंगा तेरी ख़ातिर 
शर्त ये है कि मेरा साथ निभाना होगा 
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दिल के रिश्तों को अगर प्यार से जोड़ा जाए
एक बंधन में बँधा सारा ज़माना होगा
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कोई प्यारी सी ग़ज़ल कहना अगर चाहो तो 
इश्क़ में डूबे ख़्यालात को लाना होगा
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चाहते हो जो मिटे सब के दिलों से नफ़रत
दुश्मनों को भी रज़ा दोस्त बनाना होगा
-

"मौलिक व अप्रकाशित"

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Comment by SALIM RAZA REWA on November 16, 2017 at 12:02pm

आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी ,
आपकी नवाजिश के लिए बहुत बहुत शुक्रिया।

Comment by SALIM RAZA REWA on November 16, 2017 at 12:02pm

आली जनाब तस्दीक़ साहिब ,
आपकी ग़ज़ल पे शिरकत और महब्बत के लिए शुक्रिया ,

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on November 16, 2017 at 11:20am

जनाब सलीम साहिब , उम्दा ग़ज़ल हुई है , मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on November 16, 2017 at 4:30am
आद0 सलीम रज़ा साहब सादर अभिवादन, एक और उम्दा ख्यालों को बुनती हुई ग़ज़ल पर ढेरों मुबारकबाद। बहुत बहुत बधाई।सादर
Comment by SALIM RAZA REWA on November 15, 2017 at 10:56pm
आ. दीदी राजेश कुमारी जी,
ग़ज़ल पर आपकी शिरक़त और हौसला अफज़ाई के लिए दिली शुक्रिया.
Comment by SALIM RAZA REWA on November 15, 2017 at 10:54pm
आ. तेजवीर सिंह जी,
आपकी ग़ज़ल पर शिर्कत और हौसला अफज़ाई के लिए दिली शुक्रिया.
Comment by SALIM RAZA REWA on November 15, 2017 at 10:51pm
आ. बृजेश जी,
आपकी महब्बत सलामत रहे बहुत बहुत शुक्रिया.
Comment by SALIM RAZA REWA on November 15, 2017 at 10:50pm
आ. काली प्रसाद जी,
आपकी नज़रे इनायत के लिए शुक्रिया.
Comment by SALIM RAZA REWA on November 15, 2017 at 10:49pm
जनाब आरिफ साहब,
आपकी नज़रे इनायत के लिए शुक्रिया.
Comment by SALIM RAZA REWA on November 15, 2017 at 10:48pm
आली जनाब समर साहब,
आपकी नज़रे इनायत के लिए शुक्रिया, आपकी महब्बत से महरूम मत करिए,..

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