For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अपने कोमल कान्धो पर
कचरे की बोरी ढोता बचपन
कहीं चाय के ढाबे पर
झूठे बरतन धोता बचपन

कहीं है भोजन की बर्बादी
कहीं भूख से रोता बचपन


तन पर फटे पुराने कपड़े
हाथ में भीख कटोरा पकड़े
उम्मीदों के धागों में
सपने नये पिरोता बचपन


दिन भर सड़कों चौराहों पर
मजबूरी लेकर बाहों पर
मई जून की कड़ी धूप में
अपना बदन भिगोता बचपन


अपने नन्हे हाथों से
साहब के जूते चमकाता
नाम नही है कोई इसका
ये तो बस छोटू कहलाता


जबकि कहते हैं ईश्वर का
बाल रूप है होता बचपन
कहीं चाय के ढाबे पर
झूठे बरतन धोता बचपन...

.

ललित कैलाश

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 484

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by LALIT KAILASH on February 14, 2018 at 10:37pm
बधाई के लिए , आप सभी का आभार व धन्यवाद ...
Comment by LALIT KAILASH on February 14, 2018 at 12:58pm

Thanks to all, for encouragement 

 

Comment by vijay nikore on February 14, 2018 at 10:00am

आदरणीय ललित कैलाश जी, इस अच्छी रचना के लिए बधाई।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on February 14, 2018 at 9:55am

बचपन की नियति, यथार्थ और संवेदनशील परिस्थितियों पर बढ़िया रचना के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय ललित कैलाश जी।

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on February 13, 2018 at 6:22pm

ओ बी ओ मंच पर आपका स्वागत है आदरणीय ललितजी , अच्छी कविता लिखी है जिसके लिए आपको हार्दिक बधाई | आदरणीय मोहम्मद आरिफ साहब की बातों पर ध्यान दीजियेगा | सादर

Comment by LALIT KAILASH on February 13, 2018 at 4:47pm
ji, Dhanyavaad
Comment by Mohammed Arif on February 13, 2018 at 2:42pm

आदरणीय ललित कैलाश जी आदाब,

                             सर्वप्रथम ओबीओ मंच पर आपका हार्दिक स्वागत है । बचपन की विवशता को रेखांकित करती बेहतरीन कविता । हार्दिक बधाई स्वीकार करें । कुछ वर्तनीगत अशुद्धियाँ हैं जैसे:-कान्धो/कांधों, मजबूरी/मज़बूरी, नन्हे/नन्हें , बाहो/बाँहों ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

*दोहा*बरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।।*चौपाई*वह फुहार वह साथ…See More
Tuesday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Tuesday
Chetan Prakash commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
Tuesday
Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
Tuesday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
Saturday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
Jul 10
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
Jul 9
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
Jul 5
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की…"
Jul 5

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service