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कच्ची फसल  -  लघुकथा   –

कच्ची फसल  -  लघुकथा   –

"माँ, मुझे अभी और पढ़ना है। आप बापू को समझाओ ना। वे इतनी जल्दी क्यों मेरा विवाह करना चाहते हैं"?

"ठीक है बेटी। मैं आज एक बार और कोशिश करके देखती हूँ"।

श्यामा के स्कूल जाते ही, राधा खेत पर मोहन के लिये खाना लेकर पहुँच गयी।

"मैं सोच रही थी कि आज इस गेंहू की फसल को काट लेते हैं। जल्दी से फ़ारिग हो जायेंगे"।

"पगला गयी हो क्या राधा, । फसल पकने में वक्त है अभी।

"क्या फ़र्क पड़ता है, दो चार दिन पहले काट लेंगे तो। मुझे श्यामा को लेकर पीहर जाना है"।

"आज ये कैसी मूर्खों जैसी बातें कर रही हो? तुम तो सदैव एक सुघड़ गृहिणी की तरह फसलों के बारे में मुझे सलाह देती रही हो| अधपकी फसल काटने से बरबाद हो जायेगी। किसी काम की नहीं रहेगी"?

"तुम भी तो कितने बीघे खेत के बड़े किसान होकर एक मामूली सी बात नहीं समझ रहे हो"।

"कौन सी बात"?

"श्यामा भी तो अभी कच्ची फ़सल है"।

 मौलिक एवम अप्रकाशित

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Comment by TEJ VEER SINGH on April 8, 2018 at 8:04pm

हार्दिक आभार आदरणीय नीलम उपाध्याय जी।

Comment by Neelam Upadhyaya on April 3, 2018 at 4:35pm

आदरणीय तेजवीर सिंह जी,  अत्यंत प्रभावशाली ढंग से एक सार्थक संदेश का सम्प्रेषण करती रचना के लिए हार्दिक बधाई ।

Comment by TEJ VEER SINGH on April 1, 2018 at 2:14pm

हार्दिक आभार आदरणीय ब्रजेश कुमार ब्रज जी।

Comment by TEJ VEER SINGH on April 1, 2018 at 2:13pm

हार्दिक आभार आदरणीय अशुतोष मिश्रा जी।

Comment by TEJ VEER SINGH on April 1, 2018 at 2:13pm

हार्दिक आभार आदरणीय सोमेश कुमार जी।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on April 1, 2018 at 8:30am

वाह वाह आदरणीय सही और सार्थक बात कह दी है आपने लघु कथा के माध्यम से..

Comment by Dr Ashutosh Mishra on March 30, 2018 at 2:31pm

आदरणीय तेजवीर जी ..आपकी लघु कथा बेहद पसंद आई..कम शब्दों में सार्थक सन्देश देते रचना के लिए हार्दिक बधाई सादर 

Comment by somesh kumar on March 29, 2018 at 11:51pm

अच्छी लघुकथा |

Comment by TEJ VEER SINGH on March 29, 2018 at 7:49pm

हार्दिक आभार आदरणीय मोहम्मद आरिफ़ साहब जी।आदाब।

Comment by TEJ VEER SINGH on March 29, 2018 at 7:49pm

हार्दिक आभार आदरणीय समर क़बीर साहब जी।आदाब।

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