"सुना है कि आपके मुल्क में तो विधायकों की खरीद-फरोख्त सी चल रही है!" परदेसी ने देसी दोस्त से फोन पर कहा।
" नहीं ऐसा तो कुछ विशेष नहीं, पहले भी ऐसी परंपरा रही है । मेरा लोकतंत्र बदल रहा है; तोड़-मरोड़ कर देश चल रहा है! यह समझो कि बेईमानी का कारोबार फल-फूल रहा है, बस!" दोस्त ने टेलीविजन अॉफ़ कर अंगड़ाई लेते हुए कहा।
"आप सभी खुश तो हैं न?"
"हां, सभी ख़ुश हैं! कभी उनके दल में, तो कभी हमारे दल में ऐसा हो जाता है! जनता सब जानती है, समझदार हो गई है; मीडिया के मज़े ले कर चुप रहती है, बस!'
(मौलिक व अप्रकाशित)
Comment
जनाब शहज़ाद उस्मानी साहिब आ दाब , आज कल के हालात पर सुंदर लघुकथा हुई है मुबारकबाद क़ुबुल फरमाएं |
वर्तमान राजनैतिक दशा पर कटाक्ष करती सुंदर कथा जनता बस तमाशबीन बन कर रह गई है ।बधाई आपको आद० शेख़ शहज़ाद उस्मानी जी ।
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