For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आज खुद को आज कहकर जानता है ..गजल

2122-2122-2122

.

आज खुद को आज कहकर जानता है।।
हल वो बूढ़ा सा शज़र ,पर जानता है।।

किसका कितना पेट भूखा रह गया अब ।
घर का चूल्हा ही ये बेहतर जानता है ।।

कैसा बीता है शरद और ग्रीष्म बरखा।
मुझसे बेहतर घर का छप्पर जानता हैं।।

कैसे कटती हैं मेरी तन्हा सी रातें ।
खाट तकिया और बिस्तर जानता है।।

दर्द के किस दौर से गुजरा हुआ मैं।
आह का निकला ही अक्षर जानता है।।

आमोद बिंदौरी , मौलिक अप्रकाशित

Views: 294

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on May 29, 2018 at 8:41am

आमोद बिंदौरी जी सुंदर भावपूर्ण रचना के लिए बहुत बहुत बधाई

Comment by amod shrivastav (bindouri) on May 28, 2018 at 1:02pm

आ महेंद्र सर हौसलाअफजाई का बहुत आभार ..

सर मेरा मानना है कि है हूँ मैं ही से यूँ क्यूँ पे के कर ये भरती के शब्द हैं  जोबहर में करने के सहायक हैं बस 

2 no है ...तकाबुल रदीफ़ हो जाता सायद 

शारद, ग्रीष्म, बरखा तीन  है एक को क्यूँ छोड़ दूँ ।

हूँ मैं दोनों एक ही जगह को सूचित करते है 

Comment by Neelam Upadhyaya on May 28, 2018 at 11:33am

आदरणीय आमोद जी, बढ़िया गजल के लिए हार्दिक बधाई ।

Comment by Mahendra Kumar on May 28, 2018 at 10:49am

बढ़िया ग़ज़ल है आदरणीय आमोद जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. 

1. मतला स्पष्ट नहीं है या मैं समझ नहीं सका. 

2. किसका कितना पेट भूखा रह गया है 

3. कैसा बीता है शरद और ग्रीष्म कैसी

4. दर्द के किस दौर से गुजरा हुआ हूँ
    आह से निकला ही अक्षर जानता है।।

सादर.

Comment by Ajay Kumar Sharma on May 24, 2018 at 12:42pm

सुन्दर रचना...

बहुत सुन्दर. बधाई स्वीकार करें...

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post तरही गजल - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई रविभसीन जी, सादर अभिवादन । गजल को समय देने और उत्साहवर्धन के लिए आभार।"
40 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post तरही गजल - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई तेजवीर जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति और प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
41 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post तरही गजल - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई दण्डपाणि जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति व उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद । "
44 minutes ago
R.k YADAV (अभ्युदय ) updated their profile
1 hour ago
rakesh sharma is now a member of Open Books Online
2 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post तू ही नहीं मैं भी तो हूँ (ग़ज़ल)
"आदरणीय समर कबीर साहब, आपकी इस्लाह और मार्गदर्शन के लिए तह-ए-दिल से आपका शुक्रिया अदा करता हूँ।"
3 hours ago
Samar kabeer commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post तू ही नहीं मैं भी तो हूँ (ग़ज़ल)
"सबसे पहली बात ये ध्यान में रखें कि शाइर को अपने अशआर की तशरीह कभी नहीं करना चाहिए,क्योंकि पाठक अपने…"
4 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post तरही गजल - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण भाई, इस सुन्दर ग़ज़ल की रचना पर आपकी ख़िदमत में अपनी दाद और मुबारक़बाद पेश करता हूँ।…"
4 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post तू ही नहीं मैं भी तो हूँ (ग़ज़ल)
"आदरणीय समर कबीर साहब, सादर प्रणाम। ग़ज़ल को अपना कीमती वक़्त देने के लिए और अपनी अमूल्य राय देने के…"
4 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post तरही गजल - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"हार्दिक बधाई आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'जी।बेहतरीन गज़ल। आस्तीनों  में …"
5 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post लघुकथा : भीड़ (गणेश जी बाग़ी)
"हार्दिक बधाई आदरणीय गणेश जी बागी जी।बेहतरीन ल्घुकथा।सरकारी आदेशों की अंदरूनी पोल खोलती बढ़िया…"
5 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post तू ही नहीं मैं भी तो हूँ (ग़ज़ल)
"आ. भाई समर कबीर जी, सादर अभिवादन । आपके मार्गदर्शन में बहुतकुछ नया सीखने समझने को मिलता है । इस…"
6 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service