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Ajay Kumar Sharma
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  • India
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Ajay Kumar Sharma commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post अटल जी को श्रद्धांजलि
"बहुत सुन्दर , अटल जी को श्रद्धांजलि... कृपया बधाई स्वीकार करें"
5 hours ago
Ajay Kumar Sharma commented on Ajay Kumar Sharma's blog post मन में ही हार, जीत मन में..
"बसंत सर उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद..."
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बसंत कुमार शर्मा commented on Ajay Kumar Sharma's blog post मन में ही हार, जीत मन में..
"अह वाह उत्कृष्ट सृजन के लियेबहुत बहुत बधाई आपको "
16 hours ago
Ajay Kumar Sharma commented on Ajay Kumar Sharma's blog post मन में ही हार, जीत मन में..
"आदरणीया नीलम जी एवं आदरणीया बबिता जी हार्दिक धन्यवाद..."
Thursday
babitagupta commented on Ajay Kumar Sharma's blog post मन में ही हार, जीत मन में..
"बेहतरीन जीवन जीने व सामजिक मूल्यों का संदेश देती भाव पूर्ण बेहतरीन रचना,हार्दिक बधाई स्वीकार कीजियेगा आदरणीय सरजी। "
Wednesday
Neelam Upadhyaya commented on Ajay Kumar Sharma's blog post मन में ही हार, जीत मन में..
"आदरणीय अजय कुमार जी,  नमस्कार।  बढ़िया रचना की प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें।  "
Tuesday
vijay nikore commented on Ajay Kumar Sharma's blog post मन में ही हार, जीत मन में..
"अति भावपूर्ण रचना । आपको बधाई अजय जी।"
Aug 12
Sheikh Shahzad Usmani commented on Ajay Kumar Sharma's blog post मन में ही हार, जीत मन में..
"बेहतरीन संदेश वाहक बेहतरीन सृजन। हार्दिक बधाइयाँ जनाब अजय कुमार शर्मा साहिब।"
Aug 10
Ajay Kumar Sharma commented on Ajay Kumar Sharma's blog post मन में ही हार, जीत मन में..
"डॉ. गोपाल सर आप की सलाह सर माथे पर . कोटिश: धन्यवाद."
Aug 10
Ajay Kumar Sharma commented on Ajay Kumar Sharma's blog post मन में ही हार, जीत मन में..
"कबीर सर उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद..."
Aug 10
Samar kabeer commented on Ajay Kumar Sharma's blog post मन में ही हार, जीत मन में..
"जनाब अजय कुमार शर्मा जी आदाब,बहुत उम्दा कविता हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Aug 10
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on Ajay Kumar Sharma's blog post मन में ही हार, जीत मन में..
"कोई भी नहीं अपवंचित हो,------- एक मात्रा अधिक तब कोई क्यों अपवंचित हो , आ० --------------कविता बहुत ही अच्छी है भावपूर्ण, अर्थपूर्ण और शिक्षाप्रद , बधाई ."
Aug 10
Ajay Kumar Sharma posted a blog post

मन में ही हार, जीत मन में..

मन में ही हार, जीत मन में,मन में ही अर्थ-अनर्थ लिखा,लेखनी बदल दे मनोभाव,तो समझो सत्य, समर्थ लिखा !यदि प्रेम प्रस्फुटित हो मन में,अनुराग परस्पर संचित हो,नि:स्वार्थ भावना हो शाश्वत,कोई भी नहीं अपवंचित हो,जब हो समाज में रामराज्य,तो समझो सार्थक अर्थ लिखा !यदि छद्म भेष, छल दम्भ द्वेष,मानव में ही घर कर जाये,यदि राम कृष्ण की जन्मभूमि,पर मानवता ही मर जाये,यदि मन मलीन हो, जड़वत हो,तो लगा, कदाचित् व्यर्थ लिखा !मन में ही हार, जीत मन में,मन में ही अर्थ-अनर्थ लिखा,लेखनी बदल दे मनोभाव,तो समझो सत्य, समर्थ…See More
Aug 10
Ajay Kumar Sharma commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास
"बहुत सुन्दर रचना. बधाई स्वीकार करें.."
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"शानदार गजल. बहुत ही शानदार...."
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Profile Information

Gender
Male
City State
kaushambi
Native Place
kaushambi
Profession
Ex defence personnel
About me
absolute positive thinker

मैंने भी कुछ सोंचा ---

मौन रहकर साज भी,

हैं ध्वनित होते नहीं,

कुछ बोलने दे आज,

मन की बात कहने दे मुझे।

है नहीं ख्वाहिश कि,

सुन्दर सा सरोवर मैं बनूँ

धार हूँ नदिया की मैं,

मत रोक बहने दे मुझे।

हर एक पल भी खुशनुमा,

होता नहीं तकदीर में,

हौसलों के साथ में,

कुछ गम भी सहने दे मुझे।

"अज्ञात" का आधार प्रभु,

अज्ञात का है हमसफ़र,

मत छोड़ मेरा हाथ,

अपने साथ रहने दे मुझे।

चाह इतनी भी नहीं,

सब लोग पहचाने मुझे,

अज्ञात था, अज्ञात हूँ,

अज्ञात रहने दे मुझे।।

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At 2:23am on October 2, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपका हार्दिक स्वागत है।

Ajay Kumar Sharma's Blog

मन में ही हार, जीत मन में..

मन में ही हार, जीत मन में,

मन में ही अर्थ-अनर्थ लिखा,

लेखनी बदल दे मनोभाव,

तो समझो सत्य, समर्थ लिखा !



यदि प्रेम प्रस्फुटित हो मन में,

अनुराग परस्पर संचित हो,

नि:स्वार्थ भावना हो शाश्वत,

कोई भी नहीं अपवंचित हो,

जब हो समाज में रामराज्य,

तो समझो सार्थक अर्थ लिखा !



यदि छद्म भेष, छल दम्भ द्वेष,

मानव में ही घर कर जाये,

यदि राम कृष्ण की जन्मभूमि,

पर मानवता ही मर जाये,

यदि मन मलीन हो, जड़वत हो,

तो लगा, कदाचित् व्यर्थ… Continue

Posted on August 10, 2018 at 10:27am — 11 Comments

जमकर नींद सताये रे

इम्तहान के दिन में काहे ,

जमकर नींद सताये रे.

पुस्तक पर जब नजर पड़े ,

तो दुविधा से मन काँप उठे ,

काश,कहीं मिल जाती सुविधा,                                     नइया पार कराये रे .

हर पन्ना पर्वत सा लागे ,

लगे पंक्तियां भी भारी ,

प्रश्नों की तलवार दुधारी ,

रह रह आँख दिखाये रे.

चार दिनों में होना ही है ,

दो दो हाथ पुस्तिका से ,

क्या लिक्खूंगा उत्तर उस पर ,

मन मेरा भरमाये रे…

Continue

Posted on May 5, 2018 at 4:54pm — 3 Comments

कैसे करे व्यंग रे...

बीत गई सर्दी , बीत गई ठंड रे ,

दिनभर लुआर बहे गर्मी प्रचंड रे ,

चार दिन की चाँदनी सा प्यारा बसंत था,

पसीने की बूंदों से भीगा अंग-अंग रे ,

स्वेटर,कमीज,कोट लिपटे कई असन वस्त्र,

छोड़छाड़ देह को हुए खंड-खंड रे ,

गर्मी की चुभन से हाल बेहाल हुआ ,

"अज्ञात" कैसे ! कैसे करे व्यंग रे .

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on February 3, 2018 at 10:30pm — 4 Comments

तिरंगे की खातिर

तिरंगे की खातिर....



इस शुभ दिन पर मैं गाता हूँ,

एक गान तिरंगे की खातिर,

हर एक युवा के दिल में है,

सम्मान तिरंगे की खातिर,

उस माटी पर श्रद्धा अगाध,

उस माटी का यशगान सदा,

अनगिनत वीर हो गये जहाँ,

कुर्बान तिरंगे की खातिर.

हम जहर हलाहल पी सकते,

हम तिल तिल कर मर सकते हैं,

सह सकते हैं सारे हम,

अपमान तिरंगे की खातिर.

कुछ पाने की चाहत भी नहीं,

गर मिले बादशाहत भी नहीं,

कदमों के नीचे रखते हैं,

अरमान तिरंगे की… Continue

Posted on August 13, 2017 at 10:29am — 4 Comments

 
 
 

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