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Ajay Kumar Sharma
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"जनाब अजय जी आदाब,सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें ।"
Feb 4
Mohammed Arif commented on Ajay Kumar Sharma's blog post कैसे करे व्यंग रे...
"आदरणीय अजय जी आदाब,                       अच्छा प्रयास । प्रयास जारी रखे । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
Feb 4
Ajay Kumar Sharma posted a blog post

कैसे करे व्यंग रे...

बीत गई सर्दी , बीत गई ठंड रे ,दिनभर लुआर बहे गर्मी प्रचंड रे ,चार दिन की चाँदनी सा प्यारा बसंत था,पसीने की बूंदों से भीगा अंग-अंग रे ,स्वेटर,कमीज,कोट लिपटे कई असन वस्त्र,छोड़छाड़ देह को हुए खंड-खंड रे ,गर्मी की चुभन से हाल बेहाल हुआ ,"अज्ञात" कैसे ! कैसे करे व्यंग रे .मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Feb 4
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Ajay Kumar Sharma commented on Gajendra shrotriya's blog post दिल बड़ा अपना बनाने की ज़रूरत आज है-ग़ज़ल
"बहुत सुन्दर गजल"
Dec 25, 2017

Profile Information

Gender
Male
City State
kaushambi
Native Place
kaushambi
Profession
Ex defence personnel
About me
absolute positive thinker

मैंने भी कुछ सोंचा ---

मौन रहकर साज भी,

हैं ध्वनित होते नहीं,

कुछ बोलने दे आज,

मन की बात कहने दे मुझे।

है नहीं ख्वाहिश कि,

सुन्दर सा सरोवर मैं बनूँ

धार हूँ नदिया की मैं,

मत रोक बहने दे मुझे।

हर एक पल भी खुशनुमा,

होता नहीं तकदीर में,

हौसलों के साथ में,

कुछ गम भी सहने दे मुझे।

"अज्ञात" का आधार प्रभु,

अज्ञात का है हमसफ़र,

मत छोड़ मेरा हाथ,

अपने साथ रहने दे मुझे।

चाह इतनी भी नहीं,

सब लोग पहचाने मुझे,

अज्ञात था, अज्ञात हूँ,

अज्ञात रहने दे मुझे।।

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At 2:23am on October 2, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपका हार्दिक स्वागत है।

Ajay Kumar Sharma's Blog

कैसे करे व्यंग रे...

बीत गई सर्दी , बीत गई ठंड रे ,

दिनभर लुआर बहे गर्मी प्रचंड रे ,

चार दिन की चाँदनी सा प्यारा बसंत था,

पसीने की बूंदों से भीगा अंग-अंग रे ,

स्वेटर,कमीज,कोट लिपटे कई असन वस्त्र,

छोड़छाड़ देह को हुए खंड-खंड रे ,

गर्मी की चुभन से हाल बेहाल हुआ ,

"अज्ञात" कैसे ! कैसे करे व्यंग रे .

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on February 3, 2018 at 10:30pm — 4 Comments

तिरंगे की खातिर

तिरंगे की खातिर....



इस शुभ दिन पर मैं गाता हूँ,

एक गान तिरंगे की खातिर,

हर एक युवा के दिल में है,

सम्मान तिरंगे की खातिर,

उस माटी पर श्रद्धा अगाध,

उस माटी का यशगान सदा,

अनगिनत वीर हो गये जहाँ,

कुर्बान तिरंगे की खातिर.

हम जहर हलाहल पी सकते,

हम तिल तिल कर मर सकते हैं,

सह सकते हैं सारे हम,

अपमान तिरंगे की खातिर.

कुछ पाने की चाहत भी नहीं,

गर मिले बादशाहत भी नहीं,

कदमों के नीचे रखते हैं,

अरमान तिरंगे की… Continue

Posted on August 13, 2017 at 10:29am — 4 Comments

'अजय' बीते जमाने में कहीं कुछ छोड़कर आया,

जरा सा सोंचकर देखा तो मुझको याद कर आया,

'अजय' बीते जमाने में कहीं कुछ छोड़कर आया,



सजी यारों की महफिल थी बड़ा बेखौफ बचपन था,

बड़ी मजबूरियों ने रास्तों पर जाल बिछवाया,



ज़माने को समझने की बड़ी पुरजोर कोशिश की,

ज़माने की नसीहत ने ही मुझको और भरमाया,



जिन्हें अपना समझ बैठे थे सारी भूलकर शर्तें,

उन्हीं के कारनामों ने ही मुझको और तड़पाया,



सिवा तेरे जहाँ में और कोई है नहीं मेरा,

मेरे मौला , मेरे मौला तू मेरी रूह में… Continue

Posted on July 5, 2017 at 11:57pm — 6 Comments

21 जून अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर विशेष

21 जून अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर विशेष.....



प्रतिदिन योग करे जो कोई,

वो रोगों से दूर रहे,

तन मन में स्फूर्ती आये ,

चेहरे पेे चमकता नूर रहे,

जो सुबह सुबह भस्त्रिका करे,

और शुद्ध वायु तन मन में भरे,

जो करे नित्य प्रति शशकासन,

उत्साह से वो भरपूर रहे,

अनुलोम विलोम , कपालभाति,

सुखमय जीवन की थाती है,

ना उदर रोग ना तन मन में,

कोई पीड़ा रह पाती है,

रह खाली पेट करें योगा ,

बस इतना ध्यान जरूर रहे.

हो नाम देश का ऊँचा…

Continue

Posted on June 28, 2017 at 9:30pm — 2 Comments

 
 
 

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