For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Ajay Kumar Sharma
  • Male
  • Allahabad
  • India
Share

Ajay Kumar Sharma's Friends

  • योगराज प्रभाकर
 

Ajay Kumar Sharma's Page

Latest Activity

बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Ajay Kumar Sharma's blog post कैसे करे व्यंग रे...
"वाह वाह खूब बहुतखूब लिखा...बधाई"
Feb 7
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Ajay Kumar Sharma's blog post कैसे करे व्यंग रे...
"आद0 अजय जी सादर अभिवादन। इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें"
Feb 7
Ajay Kumar Sharma commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post स्वप्न का जो नाभिकी ये संलयन प्रारम्भ है----ग़ज़ल
"वाह शानदार रचना..."
Feb 6
Ajay Kumar Sharma commented on SALIM RAZA REWA's blog post जीने की आरज़ू तो है सब को खुशी के साथ - सलीम रज़ा रीवा
"बहुत सुन्दर रचना, हार्दिक बधाई..."
Feb 6
Ajay Kumar Sharma commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post विरह गीत
"सुन्दर रचना . बधाई हो..."
Feb 6
Samar kabeer commented on Ajay Kumar Sharma's blog post कैसे करे व्यंग रे...
"जनाब अजय जी आदाब,सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें ।"
Feb 4
Mohammed Arif commented on Ajay Kumar Sharma's blog post कैसे करे व्यंग रे...
"आदरणीय अजय जी आदाब,                       अच्छा प्रयास । प्रयास जारी रखे । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
Feb 4
Ajay Kumar Sharma posted a blog post

कैसे करे व्यंग रे...

बीत गई सर्दी , बीत गई ठंड रे ,दिनभर लुआर बहे गर्मी प्रचंड रे ,चार दिन की चाँदनी सा प्यारा बसंत था,पसीने की बूंदों से भीगा अंग-अंग रे ,स्वेटर,कमीज,कोट लिपटे कई असन वस्त्र,छोड़छाड़ देह को हुए खंड-खंड रे ,गर्मी की चुभन से हाल बेहाल हुआ ,"अज्ञात" कैसे ! कैसे करे व्यंग रे .मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Feb 4
Ajay Kumar Sharma commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post वर्तमान परिदृश्य पर पञ्चचामर छंद में एक रचना
"बहुत सुन्दर रचना..."
Jan 29
Ajay Kumar Sharma commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...आपकी याद आती रही रात भर-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"बहुत सुन्दर गजल..."
Jan 6
Ajay Kumar Sharma commented on Gajendra shrotriya's blog post दिल बड़ा अपना बनाने की ज़रूरत आज है-ग़ज़ल
"बहुत सुन्दर गजल"
Dec 25, 2017
Ajay Kumar Sharma commented on Balram Dhakar's blog post चलो ये मान लेते हैं... (ग़ज़ल)- बलराम धाकड़
"बहुत सुन्दर गजल"
Dec 25, 2017
Ajay Kumar Sharma commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post आप अंदाज रखें हँसने हँसाने वाला (ग़ज़ल)
"बहुत सुन्दर गजल.."
Dec 19, 2017
Ajay Kumar Sharma commented on somesh kumar's blog post सो गया बच्चा (कविता )
"Bahut sundar..."
Dec 11, 2017
Ajay Kumar Sharma commented on Alok Rawat's blog post ग़ज़ल: दिल ए नादान से हरगिज़ न संभाली जाए
"बहुत सुन्दर गजल.."
Nov 15, 2017
Ajay Kumar Sharma commented on Sushil Sarna's blog post मात-पिता पर स्वतंत्र दोहे :
"अक्षरश: सत्य.. सुन्दर रचना..."
Nov 2, 2017

Profile Information

Gender
Male
City State
kaushambi
Native Place
kaushambi
Profession
Ex defence personnel
About me
absolute positive thinker

मैंने भी कुछ सोंचा ---

मौन रहकर साज भी,

हैं ध्वनित होते नहीं,

कुछ बोलने दे आज,

मन की बात कहने दे मुझे।

है नहीं ख्वाहिश कि,

सुन्दर सा सरोवर मैं बनूँ

धार हूँ नदिया की मैं,

मत रोक बहने दे मुझे।

हर एक पल भी खुशनुमा,

होता नहीं तकदीर में,

हौसलों के साथ में,

कुछ गम भी सहने दे मुझे।

"अज्ञात" का आधार प्रभु,

अज्ञात का है हमसफ़र,

मत छोड़ मेरा हाथ,

अपने साथ रहने दे मुझे।

चाह इतनी भी नहीं,

सब लोग पहचाने मुझे,

अज्ञात था, अज्ञात हूँ,

अज्ञात रहने दे मुझे।।

Comment Wall (1 comment)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 2:23am on October 2, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपका हार्दिक स्वागत है।

Ajay Kumar Sharma's Blog

कैसे करे व्यंग रे...

बीत गई सर्दी , बीत गई ठंड रे ,

दिनभर लुआर बहे गर्मी प्रचंड रे ,

चार दिन की चाँदनी सा प्यारा बसंत था,

पसीने की बूंदों से भीगा अंग-अंग रे ,

स्वेटर,कमीज,कोट लिपटे कई असन वस्त्र,

छोड़छाड़ देह को हुए खंड-खंड रे ,

गर्मी की चुभन से हाल बेहाल हुआ ,

"अज्ञात" कैसे ! कैसे करे व्यंग रे .

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on February 3, 2018 at 10:30pm — 4 Comments

तिरंगे की खातिर

तिरंगे की खातिर....



इस शुभ दिन पर मैं गाता हूँ,

एक गान तिरंगे की खातिर,

हर एक युवा के दिल में है,

सम्मान तिरंगे की खातिर,

उस माटी पर श्रद्धा अगाध,

उस माटी का यशगान सदा,

अनगिनत वीर हो गये जहाँ,

कुर्बान तिरंगे की खातिर.

हम जहर हलाहल पी सकते,

हम तिल तिल कर मर सकते हैं,

सह सकते हैं सारे हम,

अपमान तिरंगे की खातिर.

कुछ पाने की चाहत भी नहीं,

गर मिले बादशाहत भी नहीं,

कदमों के नीचे रखते हैं,

अरमान तिरंगे की… Continue

Posted on August 13, 2017 at 10:29am — 4 Comments

'अजय' बीते जमाने में कहीं कुछ छोड़कर आया,

जरा सा सोंचकर देखा तो मुझको याद कर आया,

'अजय' बीते जमाने में कहीं कुछ छोड़कर आया,



सजी यारों की महफिल थी बड़ा बेखौफ बचपन था,

बड़ी मजबूरियों ने रास्तों पर जाल बिछवाया,



ज़माने को समझने की बड़ी पुरजोर कोशिश की,

ज़माने की नसीहत ने ही मुझको और भरमाया,



जिन्हें अपना समझ बैठे थे सारी भूलकर शर्तें,

उन्हीं के कारनामों ने ही मुझको और तड़पाया,



सिवा तेरे जहाँ में और कोई है नहीं मेरा,

मेरे मौला , मेरे मौला तू मेरी रूह में… Continue

Posted on July 5, 2017 at 11:57pm — 6 Comments

21 जून अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर विशेष

21 जून अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर विशेष.....



प्रतिदिन योग करे जो कोई,

वो रोगों से दूर रहे,

तन मन में स्फूर्ती आये ,

चेहरे पेे चमकता नूर रहे,

जो सुबह सुबह भस्त्रिका करे,

और शुद्ध वायु तन मन में भरे,

जो करे नित्य प्रति शशकासन,

उत्साह से वो भरपूर रहे,

अनुलोम विलोम , कपालभाति,

सुखमय जीवन की थाती है,

ना उदर रोग ना तन मन में,

कोई पीड़ा रह पाती है,

रह खाली पेट करें योगा ,

बस इतना ध्यान जरूर रहे.

हो नाम देश का ऊँचा…

Continue

Posted on June 28, 2017 at 9:30pm — 2 Comments

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Rakshita Singh commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दबे  पाप  ऊपर  जो  आने  लगे  हैं- गजल
"आदरणीय लक्ष्मण जी, नमस्कार। बहुत ही सुन्दर रचना, हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
3 hours ago
Rakshita Singh commented on Rakshita Singh's blog post तुम्हारे इश्क ने मुझको क्या क्या बना दिया ...
"आदरणीय नादिर जी, बहुत बहुत आभार। आपके द्वारा बताई त्रुटी को मैं शीघ्र ही सुधार लेती हूँ।"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post धरती पुत्र (लघुकथा)
"बेहतरीन विषय और कथा.."
10 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Anita Maurya's blog post बोल देती है बेज़ुबानी भी
"बहुत खूब"
10 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...न जाने कैसे गुजरेगी क़यामत रात भारी है-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"शुक्रिया आदरणीय श्याम नारायण जी...सादर"
13 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post तुम्हारी कसम....
"आ. भाई सुशील जी, बेहतरीन रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
13 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दबे  पाप  ऊपर  जो  आने  लगे  हैं- गजल
"आ. भाई श्याम नारायन जी, आपको गजल अच्छी लगी , लेखन सफल हुआ । मार्गदर्शन करते रहिए । हार्दिक आभार ।"
13 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दबे  पाप  ऊपर  जो  आने  लगे  हैं- गजल
"आ. भाई नादिर जी, गजल का अनुमोदन और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद ।"
13 hours ago
Shyam Narain Verma commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...न जाने कैसे गुजरेगी क़यामत रात भारी है-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"क्या बात है, हार्दिक बधाई l सादर"
14 hours ago
Shyam Narain Verma commented on SHARAD SINGH "VINOD"'s blog post 'मधुर' जी की मधुर स्मृति .......
"बहूत ही उम्दा प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
14 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on विनय कुमार's blog post स्टेटस--लघुकथा
"विसंगतियों को शाब्दिक और चित्रित करती इन्सानियत पर विचारोत्तेजक रचना के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत…"
14 hours ago
Shyam Narain Verma commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दबे  पाप  ऊपर  जो  आने  लगे  हैं- गजल
"क्या बात है, बहुत उम्दा हार्दिक बधाई l सादर"
14 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service