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पार्टियां चलती रहीं (लघुकथा)

"पलट! तेरा ध्यान किधर है? शराब, कबाब और हैदराबादी बिरयानी इधर है!" अपनी उपलब्धियों का जश्न मनाती पार्टी की दी हुई पार्टी में सदस्यों में से एक ने टीवी देख रहे दूसरे साथी से कहा।


"जुमले कैच कर रहा होगा, जुमलेदार भाषण या कथा रचने के लिए!" दूसरा बोला।


"कथा, कविता कह ले या भाषण, लघुकथा! किसी पर तेरी कलम कोई कमाल नहीं कर पायेगी! सभी मतदाता सम्मोहित कर लिये गए हैं अपनी लहर में, ख़ास तौर से महिलायें और स्टूडेंट्स!" कुछ पैग नमकीन के बाद हलक में गुटकने के बाद पहला झूमते हुए मशहूर फ़िल्मी गानों पर तुकबंदी कर इतराने लगा - "जहां चार साल मिल जायें, पार्टी हो गुलज़ार! जहां चार यार ..... ! एक दूसरे से करते हैं प्यार हम! एक दूसरे को बेकरार हैं हम! .... अगले चुनावों के लिए तैयार हैं हम!"


"गा के नहीं... ऐसे बोल रे ... 'हमारे सुभाषण ही हमारा सुशासन है'..!" टीवी देखते हुए तीसरे साथी ने फास्टफूड चबाते हुए उससे कहा।


"ऐसे तो बस तू ही फैंक सकता है, चतुर नेताजी!... तेरा भविष्य भी उज्जवल है!" पहले ने डकार मारकर कहा।


"अबे, तेरा नशा कब उतरेगा! होश में आ! 'गठबंधन-तकनीक' का आक्रमण शुरू हो गया है! मंज़िलें नहीं हैं आसां!" कोई परिचित होटल के रिसेप्शन काउंटर से चिल्लाया।


चौंक कर उस नशेणी के नज़दीक़ बैठे साथी ने जवाब दिया - "उसका स्वाद तो हम भी चख चुके हैं! पर इस बार फिर हम भारी पड़ेंगे 'सम्मोहन कला वाले हाइ-टेक मनोवैज्ञानिक-विज्ञापन-तकनीकों' से, समझे? तुझे क्या, तू अपना काम कर और बिल-पे-बिल बना!"


"सामाजिक बुराइयों और ख़ामियों को हथियार बना कर कब तक लूटेंगे देश को!" बड़बड़ाते हुए काउंटर पर वह परिचित आदमी बिल तैयार करने लगा।


(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by Sheikh Shahzad Usmani on June 15, 2018 at 10:37am

मेरी इस रचना के मर्म तक जाकर अपनी विचार सांझा करते हुए अनुमोदन और मेरी हौसला/ह़िम्मत अफ़ज़ाई करने के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया मुहतरम जनाब मोहम्मद आरिफ़ साहिब, जनाब महेंद्र कुमार साहिब और जनाब विजय निकोरे साहिब। आप सभी को ई़द-उल-फ़ित्र की हार्दिक बधाइयां और शुमकामनायें!

Comment by vijay nikore on June 5, 2018 at 7:40am

आपकी लघुकथा सामयिक है... इस तरह का वार्तालाप आप ही की कलम लिख सकती है। हार्दिक बधाई आदरणीय शेख़ शहज़ाद उस्मानी जी।

Comment by Mahendra Kumar on June 2, 2018 at 8:34pm

देश की मौजूदा राजनीति पर अच्छा तंज है आदरणीय शेख़ शहज़ाद उस्मानी जी. इस बढ़िया लघुकथा हेतु हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर.

Comment by Mohammed Arif on June 1, 2018 at 10:31am

आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,

                                         (1) सासयिकता का पुट ।

                                          (2) वर्तमान राजनीति पर फिल्मी पैरोडी के साथ कटाक्ष ।

                                          (3) दिशाहीन युवाओं की ओर इशारा ।

                                           (4)  सत्ताधारी पार्टी के प्रति बदलाव का संकेत ।

                                                                   हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

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