For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

जाना पहचाना अजनबी

मेरे चुटकी भर
मिलन को,,
उसका आकाश-भर
इंतेज़ार !
मेरे सौ झूठ...
उसका हज़ार ऐतबार !!
कुछ घबराता,
कुछ सकुचाता,
मेरे शहर से दूर..
मन के करीब आता ।
एक जाना पहचाना अजनबी,
हौले हौले ,
मेरे हृदय में
अपना घर बनाता है ।
जैसे टुकड़ा,
किसी बादल का ,,
बेजान दरख्तों में
जीवन भर जाता है!!
©Vrishty
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 101

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by V.M.''vrishty'' on October 13, 2018 at 11:35am
आदरणीय सुरेंद्र नाथ सिंह जी, सादर अभिवादन! आप पुनः पढ़ें , मूल भाव स्पष्ट है लगभग।
नायिका नायक को जानती नही,,फिर भी वो अजनबी अपना सा लगता है,,और धीरे धीरे प्रेम भाव का स्थायित्व हो रहा। यहाँ नायक किसी अन्य शहर का वासी बताया गया है।
Comment by V.M.''vrishty'' on October 13, 2018 at 11:32am
आदरणीय बृजेश कुमार जी, सादर अभिवादन! हृदय तल से धन्यवाद!
Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on October 13, 2018 at 11:01am

आद0 वी एम वृष्टि जी सादर अभिवादन। अतुकांत के मूल भाव तक पहुँचने में मुझे थोड़ी परेशानी हुई। यह मेरी नासमझी भी हो सकती है। बहरहाल इस प्रस्तुति पर मेरी बधाई स्वीकार कीजिये

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on October 13, 2018 at 7:36am

बढ़िया कविता हुई आदरणीया..बधाई

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

विनय कुमार posted a blog post

पुरानी पहचान-लघुकथा

"अरे, उस भलेमानस के पास जाना है, चलिए मैं ले चलता हूँ", सामने वाले व्यक्ति ने जब उससे यह कहा तो उसे…See More
28 minutes ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Sushil Sarna's blog post प्रतीक्षा लौ ...
"आद0 सुशील सरना जी सादर अभिवादन। बहुत बेहतरीन और भावपूर्ण रचना पर बधाई स्वीकार कीजिये"
3 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post लड़की (लघुकथा)
"आद0 शेख शहज़ाद उस्मानी साहब सादर अभिवादन।बढ़िया लघुकथा लिखी आपने। बधाई स्वीकार कीजिये"
3 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on रामबली गुप्ता's blog post गरीबी न दे ऐ खुदा जिंदगी में-रामबली गुप्ता
"आद0 रामबली जी सादर अभिवादन। वाह क्या बेहतरीन छंद लिखा है बन्धु, बहुत बढ़िया। विषय भी दिल को छूता…"
3 hours ago
amod shrivastav (bindouri) replied to Tilak Raj Kapoor's discussion ग़ज़ल-संक्षिप्‍त आधार जानकारी-4 in the group ग़ज़ल की कक्षा
"आ तिलक राज साहब, आ समर साहब, आ विनस भाई साहब  प्रणाम  सर मुझे काफ़िया को लेकर जानकारी…"
7 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' posted a blog post

महाभुजंगप्रयात छंद में पहली रचना

नहीं वक़्त है ज़िन्दगी में किसी की, सदा भागते ही कटे जिन्दगानीकभी डाल पे तो कभी आसमां में, परिंदों…See More
10 hours ago
amod shrivastav (bindouri) posted a blog post

नफ़स की धुन नही थमीं...

परिवार :- हजज़ मुरब्बा मक़बूज अरकान :-  मुफाइलुन मुफाइलुन (1212-1212)मुझे  उसी  से प्यार हो ।।…See More
10 hours ago
दिगंबर नासवा commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास
"अच्छी ग़ज़ल हुई है मनोज जी ... "
22 hours ago
दिगंबर नासवा commented on दिगंबर नासवा's blog post गज़ल - दिगंबर नास्वा - 4
"बहुत आभार है लक्ष्मण जी ..."
22 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post अधूरी सी ज़िंदगी ....
"आदरणीय  narendrasinh chauhan जी सृजन पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का दिल से आभार।"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post प्रतीक्षा लौ ...
"आदरणीय  narendrasinh chauhan जी सृजन पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का दिल से आभार।"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post प्रतीक्षा लौ ...
"आदरणीय समर कबीर साहिब, आदाब , ... सृजन के भावों आत्मीय प्रशंसा से अलंकृत करने का दिल से आभार।"
yesterday

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service