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ज़िंदगी दी है खुदा ने,मुस्कुराने के लिए

भूलना लाज़िम है तुमको,याद आने के लिए

 

बेखयाली मे कदम फ़िर, खींच लाये है मुझे

मैं नहीं आया किसी का, दिल चुराने के लिए

 

यूँ ही मिल जाए कोई फ़िर, क़द्र करता ही नहीं

तुमने क्या खोया है अपना, प्यार पाने के लिए

 

भीगना बारिश मे तेरे संग,गज़ब अहसास था

याद फ़िर ताजा हुई है, गुद्गुदाने के लिए

 

जो लिखा तेरे लिए तुझ पर न्योछावर कर दिया

गीत दो बाकी बचे बस गुनगुनाने के लिए

 

जो भी तेरे संग चले थे, सब किनारा कर गए

मैं अकेला ही बचा हूँ, साथ आने के लिए    

-प्रदीप भट्ट-  मौलिक व अप्रकाशित         

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 26, 2018 at 4:17pm

आ. प्रदीप जी, अच्छी गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।

Comment by Samar kabeer on November 22, 2018 at 5:13pm

जनब प्रदीप भट्ट साहिब आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है,बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Vivek Raj on November 21, 2018 at 7:52pm
तुमने क्या खोया है अपना प्यार पाने के लिये।वाह प्रदीप जी वाह बधाईहो

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