For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सच की झूठी जिल्दकारी क्या करूँ ..

2122-2122-212

याद आती है तुम्हारी क्या करूँ ।।
छाई रहती है खुमारी  क्या करूँ।।

अब नहीं चलता , मेरे पे बस मेरा।
बढ़ रही नित बेक़रारी क्या करूँ।।

खुद मुआफ़िक आयत ए कुरआन हो।
इसमें अच्छी अर्श कारी क्या करूँ।।

झूठा' सिक्का अब चलन बाजार का
सच की झूठी जिल्दकारी क्या करूँ।।

हर्ज़ कोई बात से मुझको नहीं।
तुम लगा लो  रहगुजारी क्या करूँ।।

हाल ख़स्ता चाल बरहम हो गयी।
ज़ीस्त की ईमानदारी क्या करूँ।।

बद से बदतर हालते सूरत में हूँ।
हाँ गई थी अक़्ल मारी क्या करूँ।।

अब न चल सकता हवा के साथ मैं।
मानता हूँ खुद ही हारी क्या करूँ।।

इक किताबी कब्र मेरी चाह है।
कर रहा खुद की तयारी क्या करूँ।।

.

आमोद बिंदौरी / मौलिक अप्रकाशित

Views: 149

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 15, 2019 at 6:57pm

आ. भाई आमोद जी, गजल का प्रयास अच्छा है । हार्दिक बधाई।

Comment by surender insan on March 13, 2019 at 7:49pm

ग़ज़ल का बहुत अच्छा प्रयास किया आपने बहुत बहुत बधाई हो।

Comment by amod shrivastav (bindouri) on March 12, 2019 at 2:01pm

आ समर दादा प्रणाम ..  /शुक्रिया 

Comment by Samar kabeer on March 12, 2019 at 11:58am

जनाब आमोद बिंदौरी जी आदाब,मारूफ़ बह्र पर आपके इस प्रयास से आपकी पिछली ग़ज़लों की बनिस्बत ये ग़ज़ल कुछ बहतर कही जा सकती है,हालाँकि इस में भी कुछ शिल्प की कमज़ोरियाँ अवश्य हैं,लेकिन अभ्यास से वो भी दूर हो जाएंगी,शुभेछाएँ, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post कैसे कहें की इश्क़ ने क्या क्या बना दिया - सलीम 'रज़ा'
"नज़रे इनायत के लिए बहुत शुक्रिया नीलेश भाई , आप सही कह रहें हैं कुछ मशवरा अत फरमाएं।"
10 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कठिन बस वासना से पार पाना है-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'( गजल )
"आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन । गजल के अनुमोदन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
11 hours ago
Mahendra Kumar commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल : इक दिन मैं अपने आप से इतना ख़फ़ा रहा
"आपकी पारखी नज़र को सलाम आदरणीय निलेश सर। इस मिसरे को ले कर मैं दुविधा में था। पहले 'दी' के…"
12 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post कुछ क्षणिकाएँ : ....
""आदरणीय   Samar kabeer' जी सृजन पर आपकी ऊर्जावान प्रतिक्रिया का दिल से…"
14 hours ago
PHOOL SINGH commented on PHOOL SINGH's blog post पिशुन/चुगलखोर-एक भेदी
"भाई विजय निकोरे आपने मेरी रचना के अपना समय निकाला उसके लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद "
14 hours ago
PHOOL SINGH commented on PHOOL SINGH's blog post एक पागल की आत्म गाथा
"कबीर साहब को मेरी रचना के लिए समय निकालने के लिए कोटि कोटि धन्यवाद "
14 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on SALIM RAZA REWA's blog post कैसे कहें की इश्क़ ने क्या क्या बना दिया - सलीम 'रज़ा'
"आ. सलीम साहब,अच्छा प्रयास है। . पोस्ट करने की जल्दबाज़ी में यूसुफ़ तो नहीं था वो मेरा चाहने…"
18 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल : इक दिन मैं अपने आप से इतना ख़फ़ा रहा
"बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है आ. महेंद्र जी। .ख़ुद को लगा दी ..ख़ुद को लगा के . बस ऐसी ही छोटी…"
18 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- तू ये कर और वो कर बोलता है.
"शुक्रिया आ. समर सर,आपके कहे अनुसार ज़बां का टाइपो एरर मूल प्रति में दुरुस्त क्र लिया है. मेरे…"
19 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- तू ये कर और वो कर बोलता है.
"शुक्रिया आ. लक्ष्मण जी "
19 hours ago
Mahendra Kumar posted blog posts
20 hours ago
Mahendra Kumar commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल : ख़ून से मैंने बनाए आँसू
"बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय लक्ष्मण धामी जी। हृदय से आभारी हूँ। सादर।"
21 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service