For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

12122×4

हमीं थे सच के करीब दिलबर यकीन तुमको दिलायें कैसे
नज़र से तुमने गिरा दिया जब नज़र में तुमको बसायें कैसे

मिज़ाज़ से तो गई नहीं है तुम्हारी यादें तुम्हारी बातें
जमीं से पौधा उखड़ गया पर हवा से खुशबू मिटायें कैसे

जो पकड़े बैठे हैं जिंदगी को वो अपने साये से डर गए हैं
तमाम दौलत कमा चुके हैं सुकून दिल का कमायें कैसे

ग़ज़ल की उंगली पकड़ के चलना सभी के गम में उदास होना

यही तो शाइर की जिंदगी है हम इसको नेमत बतायें कैसे

कोई मिलेगा तुम्हारे जैसा तो उससे पूछेंगे बात सारी
कहा था तुमको ही सच की सूरत सवाल तुम पर उठायें कैसे

यकीन तुझ पर नहीं रहा पर ये बात दिल में दबा ली हमने

खिलौना जिसने बना दिया है उसे तमाशा बनायें कैसे

निकल गये थे वो मुँह अंधेरे मगर मुसाफ़िर मिले नहीं हैं
जहाँ हो बिजली से सामना अब वहाँ यें रिक्शा चलायें कैसे

जिसे समझते थे जिंदगी हम वो जिंदगी का फरेब था इक
वो आइना जो किरच किरच है उसे सहन में सजायें कैसे

वो मेरे आने के बाद आये हसीन महफिल की रोशनी में
हैं उन पे नज़रे जमाने भर की उन्हीं से नजरें चुरायें कैसे

हज़ार कसमें बंधी हुई है हमारे जीवन से बेबसी की
तलब के मारे यें होंठ प्यासे मधु से खुद को जलायें कैसे

ख्याल तेरा नहीं है लेकिन हमारी नींदें बिछड़ गई है
खुदाया हमको बता दे कोई ये झूठ उसको बतायें कैसे

हमारा पहलू जकड़ने वाली पुरानी यादों बता दो हमको
जो दर्द हो तो निभायें कैसे न निभ सके तो गवायें कैसे

बदल गया है गणित जहां का हमें पर इतनी समझ कहां है
जिसे मिलाकर हुए थे पूरे अब उसको खुद से घटायें कैसे

ग़ज़ल जो हमने सुलग रही है अज़ाब है या शबाब इसको
दिखायें कैसे,छुपायें कैसे, बनायें कैसे, सजायें कैसे

मौलिक और अप्रकाशित

Views: 505

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by मनोज अहसास on October 4, 2019 at 4:47pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय समर कबीर साहब

आपकी बहुमूल्य इस्लाह के बिना ग़ज़ल अधूरी रह जाती है

आशीर्वाद बनाये रखिये

सादर

Comment by मनोज अहसास on October 4, 2019 at 4:47pm

आदरणीय भाई मुसाफ़िर जी हार्दिक आभार 

सादर

Comment by Samar kabeer on October 4, 2019 at 7:31am

जनाब मनोज कुमार अहसास जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें।

'वो आइना जो किरच किरच है उसे सहन में सजायें कैसे'

इस मिसरे में सहीह शब्द 'सह्न' है और इसका वज़्न 21 होता है,देखियेगा ।

'ग़ज़ल जो हमने सुलग रही है अज़ाब है या शबाब इसको'

इस मिसरे में 'हमने' को "हम में" कर लें ।

कुछ शब्दों में टंकण त्रुटियाँ देख लें ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on October 2, 2019 at 4:21pm

आ. भाई मनोज जी, गजल का प्रयास अच्छा हुआ है । हार्दिक बधाई।

Comment by मनोज अहसास on September 27, 2019 at 9:47pm

आदरणीय डॉ छोटे लाल जी हार्दिक आभार

सादर

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on September 27, 2019 at 6:50pm

आदरणीय मनोज जी बहुत अच्छी गजल हुई विचार और भाव दोनों का अच्छा मिश्रण है बधाई हो

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
7 hours ago
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Tuesday
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11
जगदानन्द झा 'मनु' replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय, प्रणाम संगहि संग हार्दिक धन्यवाद। अपनेक मार्गदर्शन पाबि बहुत बेसी मोटिवेशन आ सीखक मिलैए…"
Sep 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Aug 15
जगदानन्द झा 'मनु' added 2 discussions to the group मैथिली साहित्य
Aug 10

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service