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किस्से हैं, कहानी है

किस्से हैं , कहानी है
दुनिया अनजानी है

कोई कब आएगा ?
कोई कब जाएगा ?
कौन जानता भला ?
केवल रवानी है
किस्से हैं - -

अभी तो यहीं था
कैसे चला गया ?
बार-बार दोहराती
बात पुरानी है
किस्से हैं - -

ख़ाली ही आया धा

ख़ाली विदा हुआ
बार -बार पाने की
ज़िद , दीवानी है
किस्से हैं - -

निर्मोही देह में
मोह पोसा गया
पाया न मनभाया
नित- नित कोसा गया

फिर भी न जाने क्यों ?
करता मनमानी है

किस्से हैं , कहानी है
दुनिया अनजानी है

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Usha Awasthi on October 18, 2019 at 7:40pm

  आदाब,आभार आपका                                                                     

Comment by Samar kabeer on October 14, 2019 at 2:40pm

मुहतरमा ऊषा अवस्थी जी आदाब,सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

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