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                       ग़ज़ल


दिलनशीं, सुन ले कि- मुझको, तुझ से कितना प्यार है |
तुझमें    ही    सारी   दुनिया,   और    मेरा    संसार    है ||

प्यार है इतना नज़र से ,   दिल   तलक   तेरे   वास्ते ,
ज़र्रे - ज़र्रे    में    तेरा    ही    अक्श    एक    दरकार   है ||

जब  चले  खंजर  अदा  के , मुझको कुछ शिकवा हुआ,
पर,   मेरे   दिल   ने   ये   माना- ये  तेरा  अधिकार   है ||

प्यार   के   बदले   में   तेरा   प्यार   है   मेरी   आरज़ू,
तू   भी   कह  एक  बार  लव से, दिल को जो इकरार है ||

हाथ   से   मैं   अपने   भर   दूं ,  तेरा  दामन फूल  से ,
ये   तमन्ना   मेरी,  तेरे   दिल   को   एक   उपहार   है ||

वो   बहारें   तूने   दी,  मेरे   चमन   को   हमनशीं ....
तू   है   तो   दीद - - खुदा   से  भी  मुझे  इनकार  है ||

                                           रचनाकार- अभय दीपराज



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Comment by Abhay Kant Jha Deepraaj on December 23, 2010 at 8:15pm
प्रिय मित्र गणेशजी बहुत-बहुत धन्यवाद, कि - आप ने मेरी रचना को पढ़ा और मेरे प्रयास को सराहा | आपका अभयदीपराज

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on December 18, 2010 at 8:54pm

जब चले खंजर अदा के , मुझको कुछ शिकवा हुआ,
पर, मेरे दिल ने ये माना- ये तेरा अधिकार है ||

वाह वाह वाह , खंजर चला दिये भाई साहब....

 

हाथ से मैं अपने भर दूं , तेरा दामन दमन फूल से ,

नजरेशानी की जरूरत है |

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