For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल-करना ख़ुद की वाह वाह ठीक नहीं

करना ख़ुद की वाह वाह ठीक नहीं
बात यह आलमपनाह ठीक नहीं।

.
राहे मंज़िल के हों निशां ज़्यादा
मुझको लगती वो राह ठीक नहीं।

.
कैसे इंसाफ़ मिले मुलजिम को
हो जो मुंसिफ़, गवाह ठीक नहीं।

.
चश्मे बातिन अता है औरत को
किसकी कैसी निगाह ठीक नहीं।

.
हो भी जाने दो अब रिहा इसको
इतनी भी जब्ते आह ठीक नहीं।

.
"अश्क" रंज़ो अलम से घबरा कर
मैक़शी में पनाह ठीक नहीं।

स्व-रचित एवं अप्रकाशित

Views: 300

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on July 2, 2017 at 2:44pm
आद0 दिनेश जी सादर अभिवादन, गजल के उम्दा प्रयास पर बधाई। बह्र लिख दें, तो समझने में आसानी हो। सादर
Comment by narendrasinh chauhan on June 30, 2017 at 8:21am

खूबसूरत  रचना 

Comment by Shyam Narain Verma on June 29, 2017 at 11:52am
इस खूबसूरत  रचना की हार्दिक बधाई
Comment by Samar kabeer on June 28, 2017 at 3:11pm
जनाब दिनेश जी आदाब,पहली बार आपकी ग़ज़ल से रुबरु हुआ हूँ,इस मंच पर ग़ज़ल के साथ अरकान लिखने का नियम है,जो आपने नहीं लिखे,कृपया अरकान लिख ढें तो कुछ कहने में आसानी होगी ।
Comment by Mohammed Arif on June 28, 2017 at 12:11pm
आदरणीय दिनेश जी आदाब,बेहतरीन ग़ज़ल । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए । बह्र की कसौटी पर कितनी खरी है यह ग़ज़ल इस संदर्भ में गुणीजन अपनी राय देंगे ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

saalim sheikh updated their profile
2 hours ago
Dr. Geeta Chaudhary posted a blog post

कविता: कुछ ख़ास है उन बातों की बात

वो लड़कपन के सपनों की बात,काग़ज की नाव और कागज़ी जहाजों की बात।वो जवानी की ज़िद्दी उमंगों की बात,हर…See More
21 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल - क़यामत का मंज़र दिखाने लगे हैं
"जनाब भाई लक्ष्मण धामी साहिब, गज़ल पसन्द करने और आपकी इस इनायत का बहुत बहुत शुक्रिया "
22 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल - क़यामत का मंज़र दिखाने लगे हैं
"मुहतरम जनाब समर साहिब आ दाब, गज़ल पसन्द करने और आपकी इस इनायत का बहुत बहुत शुक्रिया जनाब "
22 hours ago
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post अपनी अपनी धुन(लघुकथा)
"शुक्रिया आदरणीय उस्मानी जी।"
23 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-109
"एक मुक्तक दिल से...   फूलों से भी कोमल है हृद, इसे तनिक मुस्काने दो । छिपी हुई हर बात बताओ,…"
yesterday
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-109
"आयोजन में सहभागिता के लिए सभी रचनाकारों का आभार व धन्यवाद ।"
yesterday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-109
"आदरणीय भाई सतविन्द्र कुमार राणा जी सादर, प्रदत्त विषय पर अच्छे दोहे रचे है आपने. हार्दिक बधाई…"
yesterday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-109
"आदरणीय विवेक पांडे द्विज जी सादर, प्रदत्त विषय को साधते हुए कवित्त रचने का सुंदर प्रयास हुआ है.…"
yesterday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-109
"आदरणीय भाई शैख़ शहज़ाद उस्मानी साहब सादर, हिन्दुस्तान की गंगा-जमुनी तहजीब को और मजबूत करने का सन्देश…"
yesterday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-109
"आदरणीय विवेक पांडे द्विज जी सादर, प्रदत्त विषय पर भिन्न-भिन्न रंग लेकर सुंदर दोहे रचे हैं आपने.…"
yesterday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-109
"आदरणीया नमिता सुंदर जी सादर, प्रदत्त विषय पर सुन्दर प्रेम के रंग से रंगी  क्षणिका रची है आपने.…"
yesterday

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service