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                      ग़ज़ल

दोस्त   मेरी   दोस्ती   पर   नाज़   करके   देख   ले |
गीत  हूँ  मैं,  अपने  दिल  को  साज़  करके देख ले ||

मैं  तुझे  एक  शाह  का  रुतबा   दिला   दूँगा   कभी,
प्यार  से  तू  मुझको  अपना  ताज  करके  देख ले ||

गर  कभी  मैं  तल्ख़  था,   वो बदजुनूं था प्यार का,
दिल  नहीं  बदला  मेरा,   अंदाज़  कर  के  देख  ले ||

आज  भी  मैं  गुज़रे  कल  का  आदमी  हूँ  वा-ख़ुदा,
प्यार का एक  बार  फिर  आगाज़  करके  देख   ले ||

शुक्रिया, कल तूने मुझको मीत और अपना कहा,
मैं  वही  हूँ ,   तू  यकीं  फिर आज  करके  देख  ले ||

                 रचनाकार - अभय दीपराज

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मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on February 22, 2011 at 8:02pm

मैं  तुझे  एक  शाह  का  रुतबा   दिला   दूँगा   कभी,
प्यार  से  तू  मुझको  अपना  ताज  करके  देख ले ||

 

दीपराज जी बेहद खुबसूरत ग़ज़ल पढ़ी है आपने , कोट किया गया शेर मुझे काफी पसंद आया ,दाद कुबल करे तथा २३ फरवरी से प्रारंभ होने वाले तरही मुशायरे में शिरकत करे |

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