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Richa Yadav
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Welcome, Richa Yadav "Riya"

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Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
"आदरणीय निलेश जी अच्छी ग़ज़ल हुई।बधाई स्वीकार करें आख़िर में नाकाम हुए,मक़्ता ख़ूब हुआ। सादर।"
6 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
"आदरणीय निलेश जी बहुत शुक्रिया आपका। सादर।"
6 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
"आदरणीय लक्ष्मण जी,अभिवादन जी धन्यवाद आपका। बेहतर है, ठीक करती हूँ इसे। सादर।"
6 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
"आदरणीय लक्ष्मण जी, नमस्कार अच्छी ग़ज़ल हुई है। बधाई स्वीकार कीजिये सादर।"
8 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
"आदरणीय सालिक जी,नमस्कार बहुत खूब ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार कीजिये। सादर।"
8 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
"22 22 22 22 22 22 22 2 इश्क़ का चर्चा काम न आया मुफ़्त में हम बदनाम हुएइश्क़ किया पर चैन न पाया हम तो बस नाकाम हुए।1 सुब्ह की खिलती लाली जैसे चेहरा अपना रहता थाजाने नज़र ये किसकी लगी है हम बुझती सी शाम हुए।2 दिल से यारों हाथ धो बैठे अक़्ल न देती साथ…"
10 hours ago
Richa Yadav commented on Samar kabeer's blog post "ओ बी ओ" की ग्यारहवीं सालगिरह का तुहफ़ा
"आदरणीय कबीर sirji, नमस्कार ओबीओ की ग्यारहवीं सालगिरह का खूबसूरत ग़ज़ल के रूप में ये तोहफ़ा क़ाबिल-ए-तारीफ़ है। आप सभी को बहुत बहुत बधाई। सादर।।"
Apr 10
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
"आदरणीय नाहक़ जी,नमस्कार बहुत खूब ग़ज़ल हुई बधाई स्वीकार कीजिये।"
Mar 27
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
"आदरणीय बहुत धन्यवाद  सादर।"
Mar 27
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
"आदरणीय बहुत धन्यवाद सादर"
Mar 27
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
"आदरणीय  बहुत धन्यवाद आपका सादर।"
Mar 27
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
"आदरणीय सालिक जी  बहुत बहुत धन्यवाद आपका। सादर।।"
Mar 26
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
"आदरणीय, आपकी बात को समझ कर एक शेर कहा है कृपया देखियेगा। बहुत बहुत धन्यवाद आपका मार्गदर्शन के लिए।। कभी इक दूसरे को ढूँढते रहते हैं हरपल हमकभी हरपल ही होते साथ हम ऐसा भी होता है।"
Mar 26
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
"आदरणीय, बहुत बेहतर है।ख्याल रखूँगी जो बताया आपने। सादर।।"
Mar 26
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
"आदरणीय अमीरुद्दीन जी, नमस्कार बहुत शुक्रिया आपका हौसला अफ़ज़ाई के लिए और वहम का सही वज़्न बताने के लिए।   सादर।   शेर में बदलाव किया है देखियेगा कृपया   कभी तो दिल तिरा पिघले मुझे ले ले तू बाहों में निकल जाए तेरी बाहों में दम ऐसा भी होता…"
Mar 26
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
"मिरा दीवाना लगता है , ये मुझसे इश्क़ है करतामेरी ज़ानिब ही आता है ये ग़म ऐसा भी होता है।8"
Mar 26

Profile Information

Gender
Female
City State
Faridabad Haryana
Native Place
Alaahabad U.P.
Profession
home maker
About me
computer engineer by heart Shayar

Richa Yadav's Blog

ग़ज़ल-हर बात अपने दिल की बताई नहीं जाती।

221 2121 1221 212



हर बात अपने दिल की बताई नहीं जाती

करके कोई दुआ भी यूँ गाई नहीं जाती।1

दिल आपकेे है बस में ये अब जानते हैं हम

जादूगरी ऐसी भी दिखाई नहीं जाती।2

हैं दर्द-ओ-ग़म भरे हुए इतने कि क्या कहें

ये दास्तान दिल की सुनाई नहीं जाती।3

ये बदगुमानी आपकी आई है बीच में

बिगड़ी है इतनी बात बनाई नहीं जाती।4

फिर साथ होगी होली दीवाली की धूम भी

हमसे अकेले ईद मनाई नहीं जाती।5

दिल आपका दुखा तो…

Continue

Posted on December 7, 2020 at 1:29pm — 4 Comments

मिस्मार दिल का ये दर-ओ-दीवार हो गया

बह्र:- 221 2121 1221 212

मिस्मार दिल का ये दर-ओ-दीवार हो गया

मुद्दत हुई तो यार का दीदार हो गया

वो जो चला गया है मेरा शह्र छोड़ कर

लगता है ऐसा मुझको मैं बीमार हो गया

बेमोल ही रहे न किया ज़िंदगी से ग़म

तूने छुआ मुझे तो मैं दीनार हो गया

था मर्ज़ ऐसा जिसकी नहीं थी दवा कोई

तू हाथ थाम कर मेरा तीमार हो गया

तूने गले लगाया "रिया" को मेरे ख़ुदा

लगता है जैसे क़द मेरा मीनार हो गया

"मौलिक व…

Continue

Posted on October 30, 2020 at 3:30pm — 10 Comments

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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
"आ. भाई निलेश जी, अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद।"
4 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
"आ. रिचा जी, अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और सराहना के लिए हार्दिक धन्यवाद। "
4 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
"आदरणीय निलेश जी अच्छी ग़ज़ल हुई।बधाई स्वीकार करें आख़िर में नाकाम हुए,मक़्ता ख़ूब हुआ। सादर।"
6 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
"आदरणीय निलेश जी बहुत शुक्रिया आपका। सादर।"
6 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
"आदरणीय लक्ष्मण जी,अभिवादन जी धन्यवाद आपका। बेहतर है, ठीक करती हूँ इसे। सादर।"
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निलेश बरई (नवाज़िश) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी नमस्कार, बहुत ही उम्दः ग़ज़ल हुई है, बहुत बधाई बेहतरीन ग़ज़ल के लिए।"
7 hours ago
निलेश बरई (नवाज़िश) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
"आ. रिचा जी नमस्कार,बहुत ही उम्दः ग़ज़ल हुई है, बहुत बधाई आपको"
7 hours ago
निलेश बरई (नवाज़िश) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
"आदरणीय सालिक जी नमस्कार,बहुत ही उम्दः ग़ज़ल कही है आपने बहुत बहुत बधाई इस ग़ज़ल के लिए।"
7 hours ago
निलेश बरई (नवाज़िश) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
"सुब्ह के जैसे चमक रहे थें देख के तुझको शाम हुए कर के रौशन तेरी दुनिया हम तो माह-ए-तमाम हुए। तंज…"
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