1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे
2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |
3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |
Poonam dogra's Comments
Comment Wall (3 comments)
You need to be a member of Open Books Online to add comments!
Join Open Books Online
आदरणीय पूनम डोगरा जी को जन्म दिन की हार्दिक बधाई एवम शुभ कामनांयें।
सदस्य कार्यकारिणीमिथिलेश वामनकर said…
आ. poonam dogra जी, आपको ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें
प्रधान संपादकयोगराज प्रभाकर said…
Welcome to
Open Books Online
Sign Up
or Sign In
कृपया ध्यान दे...
आवश्यक सूचना:-
1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे
2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |
3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |
4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)
5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |
6-Download OBO Android App Here
हिन्दी टाइप
देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...
साधन - 1
साधन - 2
Latest Blogs
दोहा सप्तक. . . .नैन
ग़ज़ल
तब मनुज देवता हो गया जान लो,- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
दोहा पंचक. . . . रिश्ते
कर्मवीर
दोहा पंचक - आचरण
प्रवाह, बुद्धिमत्ता और भ्रम का खेल सिद्धांत (लेख)
कुंडलिया. . .बेटी
दोहा एकादश. . . . . पतंग
नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
कुंडलिया. . . . .
ग़ज़ल
दोहा पंचक. . . क्रोध
सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
सुखद एकान्त है या है अकेलापन
नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
न पावन हुए जब मनों के लिए -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
दोहा पंचक. . . शृंगार
देवता चिल्लाने लगे हैं (कविता)
आदमी क्या आदमी को जानता है -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
Latest Activity
दोहा सप्तक. . . .नैन
दोहा पंचक. . . . रिश्ते
सदस्य टीम प्रबंधनSaurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
ग़ज़ल
तब मनुज देवता हो गया जान लो,- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
दोहा पंचक. . . . रिश्ते