For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आदरणीय काव्य-रसिको !

सादर अभिवादन !!

  

’चित्र से काव्य तक छन्दोत्सव का यह एक सौ तिहत्तरवाँ योजन है।

 .   

 

छंद का नाम  -  सरसी छंद  

आयोजन हेतु निर्धारित तिथियाँ - 

22 नवम्बर’ 25 दिन शनिवार से

23 नवम्बर 25 दिन रविवार तक

केवल मौलिक एवं अप्रकाशित रचनाएँ ही स्वीकार की जाएँगीं.  

सरसी छंद के मूलभूत नियमों के लिए यहाँ क्लिक करें

जैसा कि विदित है, कई-एक छंद के विधानों की मूलभूत जानकारियाँ इसी पटल के  भारतीय छन्द विधान समूह में मिल सकती हैं.

***************************

आयोजन सम्बन्धी नोट 


फिलहाल Reply Box बंद रहेगा जो आयोजन हेतु निर्धारित तिथियाँ -

22 नवम्बर’ 25 दिन शनिवार से

23 नवम्बर 25 दिन रविवार तक रचनाएँ तथा टिप्पणियाँ प्रस्तुत की जा सकती हैं। 

अति आवश्यक सूचना :

  1. रचना केवल स्वयं के प्रोफाइल से ही पोस्ट करें, अन्य सदस्य की रचना किसी और सदस्य द्वारा पोस्ट नहीं की जाएगी.
  2. नियमों के विरुद्ध, विषय से भटकी हुई तथा अस्तरीय प्रस्तुति को बिना कोई कारण बताये तथा बिना कोई पूर्व सूचना दिए हटाया जा सकता है. यह अधिकार प्रबंधन-समिति के सदस्यों के पास सुरक्षित रहेगा, जिस पर कोई बहस नहीं की जाएगी.
  3. सदस्यगण संशोधन हेतु अनुरोध  करें.
  4. अपने पोस्ट या अपनी टिप्पणी को सदस्य स्वयं ही किसी हालत में डिलिट न करें. 
  5. आयोजनों के वातावरण को टिप्पणियों के माध्यम से समरस बनाये रखना उचित है. लेकिन बातचीत में असंयमित तथ्य न आ पायें इसके प्रति संवेदनशीलता आपेक्षित है.
  6. इस तथ्य पर ध्यान रहे कि स्माइली आदि का असंयमित अथवा अव्यावहारिक प्रयोग तथा बिना अर्थ के पोस्ट आयोजन के स्तर को हल्का करते हैं.
  7. रचनाओं पर टिप्पणियाँ यथासंभव देवनागरी फाण्ट में ही करें. 
  8. अनावश्यक रूप से रोमन फाण्ट का उपयोग  करें. रोमन फ़ॉण्ट में टिप्पणियाँ करना एक ऐसा रास्ता है जो अन्य कोई उपाय न रहने पर ही अपनाया जाय.
  9. रचनाओं को लेफ़्ट अलाइंड रखते हुए नॉन-बोल्ड टेक्स्ट में ही पोस्ट करें. अन्यथा आगे संकलन के क्रम में संग्रहकर्ता को बहुत ही दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.

छंदोत्सव के सम्बन्ध मे किसी तरह की जानकारी हेतु नीचे दिये लिंक पर पूछताछ की जा सकती है ...


"ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" के सम्बन्ध मे पूछताछ

"ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" के पिछ्ले अंकों को यहाँ पढ़ें ...

विशेष यदि आप अभी तक  www.openbooksonline.com  परिवार से नहीं जुड़ सके है तो यहाँ क्लिक कर प्रथम बार sign up कर लें.

 

मंच संचालक
सौरभ पाण्डेय
(सदस्य प्रबंधन समूह)
ओपन बुक्स ऑनलाइन डॉट कॉम  

Views: 405

Replies are closed for this discussion.

Replies to This Discussion

सरसी छंद 

रीति शीत की जारी भैया, पड़ रही गज़ब ठंड ।

पहलवान भी मज़बूरी में, पेल   रहे   घर  दंड ।।

धुंध धुँआ कभी ओस पड़ती, छुपा सूर्य है ओट ।

वृद्ध बाल आग जला बैठे, युवा  पहनते   कोट ।।

पारा  डूब  गया  अंकों  में, अभी रंक की मौत ।

वस्त्र पहनने को नहीं उसे, ज़िन्दगी बनी सौत ।।

गाँव शहर अलाव जलें हों, राहत  मिले  गरीब ।

कभी  महसूस  हो उसको, सत्ता  रही  करीब ।।

मौलिक व अप्रकाशित 

आदरणीय चेतन प्रकाश जी, आपकी रचना से आयोजन आरम्भ हुआ है. इसकी पहली बधाई बनती है. 

 

प्रदत्त चित्र को शाब्दिक करती रचना का हार्दिक धन्यवाद. 

यह अवश्य है, कि प्रस्तुत रचना के पद विन्यासों पर तनिक और ध्यान देना आवश्यक था. यथा, प्रथम पद के दूसरे चरण का विन्यास. 

या, वस्त्र पहनने को नहीं ऊसे जैसा विन्यास गेयता की कसौटी पर स्वीकार्य नहीं हो  सकता. इसी तौर पर संप्रेषणीयता को लेकर भी सचेत रहना आवश्यक है. ’गाँव शहर अलाव जले हों, राहत मिले गरीब’. जैसा विन्यास तार्किक नहीं होता, आदरणीय. 

बाकी, आपकी संलग्नता और आपके प्रयास को लेकर हम सभी सदैव श्तद्धावनत रहते हैं 

हार्दिक बधाइयाँ, शुभातिशुभ

 

आदरणीय चेतन प्रकाश जी इस प्रस्तुति हेतु हार्दिक बधाई स्वीकारें। सादर

सरसी छंद

+++++++++

पड़े गर्मी या फटे बादल, मानव है असहाय।

ठंड बेरहम की रातों में, निर्धन हैं निरुपाय॥

शाम हुई जब सूरज डूबा, रात दिखाती रंग।

ठंड बहुत है ठिठुरन वाली, काँप रहा हर अंग॥

 

तेज धूप से दिन कट जाए, शामें होतीं सर्द।

खूब ठंड  पड़ती कुछ ऐसी, रात हुई बेदर्द॥

गाँव नगर हर घर आंगन में, जलते खूब अलाव।

बड़े घरों में शीत लहर का, पड़ता नहीं प्रभाव॥

 

परेशान हैं कुँवर कुँवारी, पड़ी ठंड की मार।

स्वेटर और रजाई कंबल,  सब के सब बेकार॥

पास बैठ दिन भर बतियाना, सबका यही स्वभाव।

चाहत है थोड़ी गर्मी की, पूरा करे अलाव॥

 

++++++++++++

मौलिक अप्रकाशित

 

 

आदरणीय / आदरणीया ,

सपरिवार प्रातः आठ बजे भांजे के ब्याह में राजनांदगांंव प्रस्थान करना है। रात्रि ११ तक लौट आया तो मेरी भागीदारी अवश्य होगी।  

आदरणीय, मैं भी पारिवारिक आयोजनों के सिलसिले में प्रवास पर हूँ. और, लगातार एक स्थान से दूसरे स्थान को दौड़-भाग कर रहा हूँ. यही सामाजिकता है. 

आदरणीय अखिलेश भाईजी, आपकी प्रस्तुत रचना का बहाव प्रभावी है. फिर भी, पड़े गर्मी या फटे बादल, मानव है असहाय ..   पड़ती गर्मी फटता बादल किया जाना उचित होगा. 

 

शाम हुई जब सूरज डूबा, रात दिखाती रंग।

ठंड बहुत है ठिठुरन वाली, काँप रहा हर अंग ... बहुत खूब .. 

 

पास बैठ दिन भर बतियाना, सबका यही स्वभाव।

चाहत है थोड़ी गर्मी की, पूरा करे अलाव   ... वाह वाह 

आपकी प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई 

शुभातिशुभ

आदरणीय अखिलेश जी इस प्रस्तुति हेतु हार्दिक बधाई स्वीकारें। सादर

सरसी छन्द

ठिठुरे बचपन की मजबूरी, किसी तरह की आग

बाहर लपटें जहरीली सी, भीतर भूखा नाग

फिर भी नहीं क्यूँ चुभते हमें, मखमल बिस्तर नींद

अब तो बीत गई हैं सदियाँ, छूट रही उम्मीद

मौलिक एवं अप्रकाशित 

आदरणीय जयहिन्द रायपुरी जी, सरसी छंदा में आपकी प्रस्तुति की अंतर्धारा तार्किक है और समाज के उस तबके को समर्पित है जो इस चित्र के माध्यम से इंगित है. 

ठिठुरे बचपन की मजबूरी, किसी तरह की आग  ... चाहे तन भी आग  

बाहर लपटें जहरीली सी, भीतर भूखा नाग   

फिर भी नहीं क्यूँ चुभते हमें, मखमल बिस्तर नींद  ...  फिर भी चुभते कभी न हमको 

अब तो बीत गई हैं सदियाँ, छूट रही उम्मीद  

इस छांदसिक रचना का भाव वस्तुतः श्लाघनीय है 

हार्दिक बधाइयाँ 

शुभातिशुभ

आदरणीय जयहिंद रायपुरी जी इस प्रस्तुति हेतु हार्दिक बधाई स्वीकारें। सादर

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin posted a discussion

"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-133 (विषय मुक्त)

आदरणीय साथियो,सादर नमन।."ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" में आप सभी का हार्दिक स्वागत है।प्रस्तुत…See More
7 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"इल्म गिरवी है अभी अपनी जहालत के लिए ढूँढ लो क़ौम नयी अब तो बग़ावत के लिए अब अगर नाक कटानी ही है हज़रत…"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"आ. रिचा जी, सादर अभिवादन। तरही मिसरे पर सुंदर गजल हुई है। गिरह भी खूब लगाई है। हार्दिक बधाई।"
Sunday
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"2122, 1122, 1122, 112/22 सर झुका देते हैं हम उसकी इबादत के लिए एक दिल चाहिए हमको तो मुहब्बत के…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"सादर अभिवादन।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"सर कोई जब न उठा सच की हिमायत के लिएकर्बला   साथ   चले   कौन …"
Saturday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
" स्वागतम "
Friday
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189

ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरे के 190 वें अंक में आपका हार्दिक स्वागत है | इस बार का मिसरा नौजवान शायर…See More
Apr 21
आशीष यादव posted a blog post

मशीनी मनुष्य

आज के समय में मनुष्य मशीन बनता जा रहा है या उसको मशीन बनने पर मजबूर किया जाता है. कारपोरेट जगत…See More
Apr 20
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब, प्रस्तुत दोहों की सराहना हेतु आपका हार्दिक आभार। सादर"
Apr 19
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय जयहिंद रायपुरी जी सादर, प्रदत्त चित्र पर आपने  दोहा छंद रचने का सुन्दर प्रयास किया है।…"
Apr 19
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी  सही कहना है हम भारतीय और विशेषकर जो अभावों में पलकर बड़े हुए हैं, हर…"
Apr 19

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service