आदरणीय साथिओ,
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अच्छे विषय पर रचना कही है आदरणीया कुसुम जोशी जी| सुधीजनों और गुरुजनों की बात संज्ञान में लें तो और अच्छा सृजन हो सकता है| सादर बधाई स्वीकार करें|
आयोजन में आपका स्वागत है आदरणीय कुसुम जोशी जी । मैं एक सांस में पढ़ गया पूरी लघुकथा । मुझे बहुत प्रभावित आपकी लघुकथा ने। आपने जो दृश्य सृजित किया है वह कमाल का है । मुझे ऐसा लगा जैसे में वाकई दिल्ली के किसी भीड़ भाड़ वाले इलाके में खड़ा हूं । इस लेखकीय कुशलता के लिए साधूवाद । मुझे इसमें सिर्फ ''चलो नल्ली तक'' नल्ली शब्द समझ में नहीं आया । वैसे आपको इस लघुकथा को कोई उचित शीर्षक भी देना चाहिए था । बिना शीर्षक की यह लघुकथा ऐसी लग रही है जैसे दांतों के बगैर शेर हो । सादर
बहुत बढ़िया रचना प्रदत्त विषय पर, समय ऐसे ही मुट्ठी से निकल जाता है, बधाई आपको आ
सुन्दर सन्देश देती हुयी रचना
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