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सदस्य टीम प्रबंधन

"जी सर आपका मिसरा वाकई गुरुत्व से परिपूर्ण है आपकी इज़ाजत से मैं इसे ही  प्रयोग करना च…"

vandana replied Dec 5, 2014 to ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा अंक 53 में सम्मिलित सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)

37 Apr 26, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

सदस्य टीम प्रबंधन

"आदरणीय राणा सर कृपया बताइये कि  कट गया नीम नीड़ भी उजड़ेभींत भाइयों ने जो उठानी थी ...…"

vandana replied Dec 5, 2014 to ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा अंक 53 में सम्मिलित सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)

37 Apr 26, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

"दोष देते नदी - हवाओं को बात इनकी किसी ने मानी थी ? मेघ संदेस ले के आते थे वो सदी कि…"

vandana replied Nov 29, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - 53

415 Nov 29, 2014
Reply by भुवन निस्तेज

"बाब दर बाब खूं के धब्बों में ऐ सियासत तेरी कहानी थी  वाह बहुत खूब आदरणीय "

vandana replied Nov 29, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - 53

415 Nov 29, 2014
Reply by भुवन निस्तेज

"आज बिखरा पड़ा था धरती पर  जिसकी परवाज आसमानी थी वाह बहुत खूब आदरणीय "

vandana replied Nov 29, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - 53

415 Nov 29, 2014
Reply by भुवन निस्तेज

"ट्रंक लोहे का सुरमे-दानी थी बस यही माँ की इक निशानी थी   अब जो चुप सी टंगी है खूँटी…"

vandana replied Nov 29, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - 53

415 Nov 29, 2014
Reply by भुवन निस्तेज

"कट रही थी जो खुशबयानी मेंदर्द  लिपटी  वो  जिंदगानी थी **गैर  का  दोष क्या तबाही मेंर…"

vandana replied Nov 29, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - 53

415 Nov 29, 2014
Reply by भुवन निस्तेज

"दस  बहाने बना गये उठकर दास्ताँ तो अभी सुनानी थी जुल्म ढाया गिरा गए कहकर ये इमारत बड़…"

vandana replied Nov 29, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - 53

415 Nov 29, 2014
Reply by भुवन निस्तेज

"मीर की शायरी सयानी थी,‘कुछ अजब तौर की कहानी थी”. रात ख़्वाबो में कौन आया था,सुब’ह साँ…"

vandana replied Nov 29, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - 53

415 Nov 29, 2014
Reply by भुवन निस्तेज

"सीख लेते अगर इसे जीनाज़िन्दगी तो बड़ी सुहानी थी ।मारना सीखते अहम् अपना' विर्क ' दीवा…"

vandana replied Nov 29, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - 53

415 Nov 29, 2014
Reply by भुवन निस्तेज

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"आदरणीय जी सादर प्रणाम -  अद्भुत सृजन - हृदय तटों को छूती गहन भावों की अभिव्यक्ति ने अहसासों की…"
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"प्रिय अशोक कुमार जी,रचना को मान देने के लिए हार्दिक आभार। -- विजय"
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सदस्य टीम प्रबंधन
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"रचना पर आपकी पाठकीय प्रतिक्रिया सुखद है, आदरणीय चेतन प्रकाश जी.  आपका हार्दिक धन्यवाद "
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सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
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