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अरुण कुमार निगम's Discussions (3,693)

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"आदरणीय आरिफ़ साहब, ओबीओ ने दिया है ये मिसरा"सब्र करना तो आ गया है मुझे" ये अंदाज भी…"

अरुण कुमार निगम replied Oct 20, 2018 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग-1)

2001 Oct 21, 2018
Reply by Afroz 'sahr'

"आदरणीय मिर्ज़ा साहब, एक ही साँस में जब कोई गजल पढ़ी जाती है तब ही मेरा दिल उसे अच्छी ग…"

अरुण कुमार निगम replied Oct 20, 2018 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग-1)

2001 Oct 21, 2018
Reply by Afroz 'sahr'

"वाह समर साहब, शब्द तो आपकी उँगलियों के इशारों पर नाचते हैं, यही फ़न तो सीधे दिल तक पह…"

अरुण कुमार निगम replied Oct 20, 2018 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग-1)

2001 Oct 21, 2018
Reply by Afroz 'sahr'

"आदरणीय राज साहब, लाजवाब गजल कही। मुबारकबाद। बाकी उस्ताद शायरों ने कह ही दिया है।"

अरुण कुमार निगम replied Oct 20, 2018 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग-1)

2001 Oct 21, 2018
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"आदरणीय अजय जी, सुंदर गजल। गजल में न कहा जाता है, ना का प्रयोग दोष माना जाता है। बधाइ…"

अरुण कुमार निगम replied Oct 20, 2018 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग-1)

2001 Oct 21, 2018
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"आदरणीय दिनेश जी बेहतरीन गजल के लिए बधाई। हर शेर लाजवाब है।"

अरुण कुमार निगम replied Oct 20, 2018 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग-1)

2001 Oct 21, 2018
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"जी हाँ, गढ़ा ही सही शब्द है। गढ़ना = बनाना, सृजन करना।"

अरुण कुमार निगम replied Oct 20, 2018 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग-1)

2001 Oct 21, 2018
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"आदरणीय नीलेश जी, उम्दा गजल कही। अंतिम शेर के लिए खास मुबारकबाद।"

अरुण कुमार निगम replied Oct 20, 2018 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग-1)

2001 Oct 21, 2018
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"मुशायरे के 100 वें अंक की शानदार बधाइयाँ। हर शेर लाजवाब। बिल्यकीं एक नया शब्द है, कृ…"

अरुण कुमार निगम replied Oct 20, 2018 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग-1)

2001 Oct 21, 2018
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"आइना वो दिखा गया है मुझेकिस अदा से रुला गया है मुझे। ख्वाब रंगीं दिखा के गुलशन काइक…"

अरुण कुमार निगम replied Oct 20, 2018 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग-1)

2001 Oct 21, 2018
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
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"ग़ज़ल   बह्र ए मीर लगता था दिन रात सुनेगा सब के दिल की बात सुनेगा अपने जैसा लगता था…"
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