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Meena Pathak's Discussions (280)

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"जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ आदरणीय बागी जी.."

Meena Pathak replied May 4 to खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...

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Reply by rajesh kumari

"ओह्ह ! कहानी का अंत ह्रदय को झकझोर गया ..ऐसी औलाद से बे-औलाद भला | लघुकथा हेतु बहुत…"

Meena Pathak replied Jun 29, 2016 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-15 (विषय: आक्रोश)

955 Jun 30, 2016
Reply by savitamishra

"अंधेरों में रहते-रहते अंधेरों के होके रह गए हम ,इतने कि हर रौशनी-उजाले से डरने लगे ह…"

Meena Pathak replied May 14, 2016 to "ओ.बी.ओ. लाइव महा उत्सव" अंक-67

620 May 15, 2016
Reply by Samar kabeer

"तुमने भी कब चाहा है मैं तुमसे मिलूँ किसी उपकृत-सा ? आओ... मैं चाँद नहीं किरन-छुआ महस…"

Meena Pathak replied May 14, 2016 to "ओ.बी.ओ. लाइव महा उत्सव" अंक-67

620 May 15, 2016
Reply by Samar kabeer

"बहुत सुंदर कहानी कांता जी बहुत बहुत बधाई स्वीकारें ..बुराई का दाग एक बार लग जाय तो क…"

Meena Pathak replied Aug 29, 2015 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-5 (विषय: परिभाषा)

1028 Aug 31, 2015
Reply by Saurabh Pandey

"सुंदर कहानी हेतु बहुत बहुत बधाई रीता सखी ...अब परिस्थियाँ बदल गयीं हैं सखी .........…"

Meena Pathak replied Aug 29, 2015 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-5 (विषय: परिभाषा)

1028 Aug 31, 2015
Reply by Saurabh Pandey

"सुंदर और सार्थक कहानी हेतु बहुत बहुत बधाई आ० सीमा जी...आप से पूरी तरह  सहमत हूँ सीमा…"

Meena Pathak replied Aug 29, 2015 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-5 (विषय: परिभाषा)

1028 Aug 31, 2015
Reply by Saurabh Pandey

प्रधान संपादक

"सादर नमन सर "

Meena Pathak replied Mar 7, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महा-उत्सव" (होली स्पेशल) अंक-53

1413 Mar 7, 2015
Reply by Saurabh Pandey

प्रधान संपादक

"आ० गोरखपुरी जी ..बहुत बहुत आभार "

Meena Pathak replied Mar 7, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महा-उत्सव" (होली स्पेशल) अंक-53

1413 Mar 7, 2015
Reply by Saurabh Pandey

प्रधान संपादक

"सादर आभार स्वीकारें "

Meena Pathak replied Mar 7, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महा-उत्सव" (होली स्पेशल) अंक-53

1413 Mar 7, 2015
Reply by Saurabh Pandey

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ram shiromani pathak posted a blog post

ग़ज़ल 212×4

ख्वाब थे जो वही हूबहू हो गए।जुस्तजू जिसकी थी रूबरू हो गए।।इश्क करने की उनको मिली है सज़ा।देखो बदनाम…See More
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Ram Awadh VIshwakarma commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (दोस्तों वक़्त के रहबर का तमाशा देखो)
"बहुत खूबसूरत ग़ज़ल है। सभी शेर बोलते हुये हैं। आदर्णीय बधाई"
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Ram Awadh VIshwakarma commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post ग़ज़ल (गणेश जी बागी)
"आदरणीय सत्ताधीशों द्वारा ठगी गई भोलीभाली जनता का दुख दर्द बयान करती हुई सार्थक ग़ज़ल कहने के लिये…"
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