For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,

जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर नव-हस्ताक्षरों, के लिए अपनी कलम की धार को और भी तीक्ष्ण करने का अवसर प्रदान करता है. इसी क्रम में प्रस्तुत है :

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-133 

विषय - "विषय से मुक्त"

आयोजन अवधि- 13 नवम्बर 2021, दिन शनिवार से 14 नवम्बर 2021, दिन रविवार की समाप्ति तक अर्थात कुल दो दिन.

ध्यान रहे : बात बेशक छोटी हो लेकिन ’घाव करे गंभीर’ करने वाली हो तो पद्य- समारोह का आनन्द बहुगुणा हो जाए. आयोजन के लिए दिये विषय को केन्द्रित करते हुए आप सभी अपनी मौलिक एवं अप्रकाशित रचना पद्य-साहित्य की किसी भी विधा में स्वयं द्वारा लाइव पोस्ट कर सकते हैं. साथ ही अन्य साथियों की रचना पर लाइव टिप्पणी भी कर सकते हैं.

उदाहरण स्वरुप पद्य-साहित्य की कुछ विधाओं का नाम सूचीबद्ध किये जा रहे हैं --

तुकांत कविता, अतुकांत आधुनिक कविता, हास्य कविता, गीत-नवगीत, ग़ज़ल, नज़्म, हाइकू, सॉनेट, व्यंग्य काव्य, मुक्तक, शास्त्रीय-छंद जैसे दोहा, चौपाई, कुंडलिया, कवित्त, सवैया, हरिगीतिका आदि.

अति आवश्यक सूचना :-

रचनाओं की संख्या पर कोई बन्धन नहीं है. किन्तु, एक से अधिक रचनाएँ प्रस्तुत करनी हों तो पद्य-साहित्य की अलग अलग विधाओं अथवा अलग अलग छंदों में रचनाएँ प्रस्तुत हों.
रचना केवल स्वयं के प्रोफाइल से ही पोस्ट करें, अन्य सदस्य की रचना किसी और सदस्य द्वारा पोस्ट नहीं की जाएगी.
रचनाकारों से निवेदन है कि अपनी रचना अच्छी तरह से देवनागरी के फॉण्ट में टाइप कर लेफ्ट एलाइन, काले रंग एवं नॉन बोल्ड टेक्स्ट में ही पोस्ट करें.
रचना पोस्ट करते समय कोई भूमिका न लिखें, सीधे अपनी रचना पोस्ट करें, अंत में अपना नाम, पता, फोन नंबर, दिनांक अथवा किसी भी प्रकार के सिम्बल आदि भी न लगाएं.
प्रविष्टि के अंत में मंच के नियमानुसार केवल "मौलिक व अप्रकाशित" लिखें.
नियमों के विरुद्ध, विषय से भटकी हुई तथा अस्तरीय प्रस्तुति को बिना कोई कारण बताये तथा बिना कोई पूर्व सूचना दिए हटाया जा सकता है. यह अधिकार प्रबंधन-समिति के सदस्यों के पास सुरक्षित रहेगा, जिस पर कोई बहस नहीं की जाएगी.
सदस्यगण बार-बार संशोधन हेतु अनुरोध न करें, बल्कि उनकी रचनाओं पर प्राप्त सुझावों को भली-भाँति अध्ययन कर संकलन आने के बाद संशोधन हेतु अनुरोध करें. सदस्यगण ध्यान रखें कि रचनाओं में किन्हीं दोषों या गलतियों पर सुझावों के अनुसार संशोधन कराने को किसी सुविधा की तरह लें, न कि किसी अधिकार की तरह.

आयोजनों के वातावरण को टिप्पणियों के माध्यम से समरस बनाये रखना उचित है. लेकिन बातचीत में असंयमित तथ्य न आ पायें इसके प्रति टिप्पणीकारों से सकारात्मकता तथा संवेदनशीलता अपेक्षित है.

इस तथ्य पर ध्यान रहे कि स्माइली आदि का असंयमित अथवा अव्यावहारिक प्रयोग तथा बिना अर्थ के पोस्ट आयोजन के स्तर को हल्का करते हैं.

रचनाओं पर टिप्पणियाँ यथासंभव देवनागरी फाण्ट में ही करें. अनावश्यक रूप से स्माइली अथवा रोमन फाण्ट का उपयोग न करें. रोमन फाण्ट में टिप्पणियाँ करना, एक ऐसा रास्ता है जो अन्य कोई उपाय न रहने पर ही अपनाया जाय.

फिलहाल Reply Box बंद रहेगा जो - 13 नवम्बर 2021, दिन शनिवार लगते ही खोल दिया जायेगा।

यदि आप किसी कारणवश अभी तक ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार से नहीं जुड़ सके है तो www.openbooksonline.com पर जाकर प्रथम बार sign up कर लें.

महा-उत्सव के सम्बन्ध मे किसी तरह की जानकारी हेतु नीचे दिये लिंक पर पूछताछ की जा सकती है ...
"OBO लाइव महा उत्सव" के सम्बन्ध मे पूछताछ

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" के पिछ्ले अंकों को पढ़ने हेतु यहाँ क्लिक करें

मंच संचालक
ई. गणेश जी बाग़ी 
(संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक)
ओपन बुक्स ऑनलाइन डॉट कॉम परिवार

Views: 1294

Replies are closed for this discussion.

Replies to This Discussion

कुर्सी प्यारी लगती है
22 22 22 22 22 2


सत्ता की कुर्सी सबको ही प्यारी लगती है
ये दुनिया की सबसे सुंदर नारी लगती है

पद पैसा सम्मान सभी कुछ देती है कुर्सी

माँ लक्ष्मी दुर्गा जैसी अवतारी लगती है

लोग बहुत लड़ते मरते है इसको पाने हित

नेता को कुर्सी की ताकत भारी लगती है

मिल जाये कुर्सी तो इतराते है नेताजी

हार मिले तो जनता की मक्कारी लगती है

विजयी हो तो ‘मेठानी’ का मुखड़ा चमकेगा

हार हुई तो फिर तबियत बेचारी लगती है।
- दयाराम मेठानी
मौलिक एवं अप्रकाशित

आदरणीय दयारामजी
नेताओं पर सटीक व्यंग्य जिसमें सच्चाई भी है और शब्दों में प्रवाह भी| हृदय से बधाई |

प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव जी।

आ. भाई दयाराम जी, सादर अभिवादन । अच्छी प्रस्तुति हुई है । हार्दिक बधाई।

आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, प्रोत्साहन टिप्पणी के लिए हार्दिक आभार।

आदाब दयाराम जी। बहुत बढ़िया रचना। लेकिन कुर्सी अब बैंच बन गई है। एक.व्यक्ति बैठा दिखाई देता है, लेकिन उस पर दो-चार और.बैठे होते हैं, जो दिखाई दे रहे को कठपुतली नृत्य कराते रहते हैं। जनता हतप्रभ रह बैंच को पूजती रह जाती है।

आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी, टिप्पणी करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।

आदरणीय गणेश बागी जी, OBO लाइव महा उत्सव में लोगों की अब रूचि नहीं रही लगती। न पोस्ट करते है और न कमेन्ट ही करते है तो फिर इसकी अब उपयोगिता क्या रह गई है? आप इस बारे में अवश्य विचार करें। कुछ गलत कहा हो तो क्षमा करें। सादर।
— दयाराम मेठानी

आ. भाई दयाराम जी, आपने सटीक प्रश्न किया है। हमारा तो निरंतर प्रयास रहता है कि मंच पर उपस्थित रहें पर कभी कभी कुछ एसी विवशताएँ होती हैं कि मौजूद रहना नहीं हो पाता। ओबीओ के सभी वरिष्ठ सदस्यों को इस पर विचार कर यदाकदा उपस्थित रहकर हम जैसे लोगों का हौसला बढ़ाते रहना चाहिए जिससे सीखने सिखाने की परम्परा जारी रहे और यह मंच दीर्घकाल तक चलता रहे । सादर...

आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, मैं पिछले चार पांच कार्यक्रमो से देख रहा हूं कि कभी दो, कभी तीन या चार पोस्ट होती है जिन पर टिप्पणी करने वालों का भी अभाव होता है। इसीलिए मुझे आज कहना पड़ा कि या तो इसे बंद कर दिया जाये या इसे लोकप्रिय बनाने का कार्यक्रम बनाया जाये। सीखने सिखाने का प्रयास तो तब होगा जब पोस्ट भी हो और टिप्पणी करने वाले भी। जैसे तरही ग़ज़ल कार्यक्रम में लोग भाग लेते है और भाग लेने वालों से अधिक टिप्पणी करने वाले होते है। कुछ उस प्रकार इसमें भी हो तो अच्छा है। टिप्पणी करने वाले और सुझाव देने वाले होंगे तो पोस्ट करने वालों को प्रोत्साहन मिलेगा। सादर।

आदाब। रुचि ख़त्म नहीं हुई है। ओबीओ के मासिक आयोजनों कोअपडेटेड कर नया स्वरूप देने की ज़रूरत महसूस हो रही है। मसलन वीडियो आयोजन या फेसबुक पर समानान्तर आयोजन या रचनाओं पर आधारित विशेषज्ञों का विवेचनात्मक आयोजन भी हो व उन पर आधारित संकलन पुस्तक का वार्षिक प्रकाशन भी हो आदि।

आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी, पोस्ट नहीं हो रही है और ना ही टिप्पणी करने वाले आते है तो फिर रूचि कम होना या खतम होना ही कहा जायेगा। आपनी टिप्पणी कर अपने विचार रखे और सुझाव दिये उसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद।

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted blog posts
14 minutes ago
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-167

परम आत्मीय स्वजन,ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरे के 167 वें अंक में आपका हार्दिक स्वागत है ।इस बार का…See More
14 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-109 (सियासत)
"यूॅं छू ले आसमाॅं (लघुकथा): "तुम हर रोज़ रिश्तेदार और रिश्ते-नातों का रोना रोते हो? कितनी बार…"
Apr 30
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-109 (सियासत)
"स्वागतम"
Apr 29
Vikram Motegi is now a member of Open Books Online
Apr 28
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . .पुष्प - अलि

दोहा पंचक. . . . पुष्प -अलिगंध चुराने आ गए, कलियों के चितचोर । कली -कली से प्रेम की, अलिकुल बाँधे…See More
Apr 28
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-166
"आदरणीय दयाराम मेठानी जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद और हौसला अफ़ज़ाई का तह-ए-दिल से शुक्रिया।"
Apr 27
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-166
"आ. भाई दयाराम जी, सादर आभार।"
Apr 27
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-166
"आ. भाई संजय जी हार्दिक आभार।"
Apr 27
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-166
"आ. भाई मिथिलेश जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।"
Apr 27
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-166
"आ. रिचा जी, हार्दिक धन्यवाद"
Apr 27
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-166
"आ. भाई दिनेश जी, सादर आभार।"
Apr 27

© 2024   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service