For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...

ओपन बुक्स ऑनलाइन के सभी सदस्यों को प्रणाम, बहुत दिनों से मेरे मन मे एक विचार आ रहा था कि एक ऐसा फोरम भी होना चाहिये जिसमे हम लोग अपने सदस्यों की ख़ुशी और गम को नजदीक से महसूस कर सके, इसी बात को ध्यान मे रखकर यह फोरम प्रारंभ किया जा रहा है, जिसमे सदस्य गण एक दूसरे के सुख और दुःख की बातो को यहाँ लिख सकते है और एक दूसरे के सुख दुःख मे शामिल हो सकते है |

धन्यवाद सहित
आप सब का अपना
ADMIN
OBO

Views: 84171

Reply to This

Replies to This Discussion

हृदय से बधाई आदणीय धर्मेन्द्रभाई. आपके सफल साहित्यिक भविष्य के लिए असीम शुभकामनाएँ. अंजुमन प्रकाशन के इस योजना को हार्दिक बधाइयाँ.

शुभ-शुभ

धन्यवाद सौरभ जी, स्नेह बना रहे

आदरणीय धर्मेन्द्र जी:

 

आपको हार्दिक बधाई, और भविष्य में और सफ़लता के लिए शुभकामनाएँ।

 

सादर,

विजय निकोर

 

सही कहा आपने ये एक परिवार है 

आपके घर आई बिटिया, परिवार में छाई खुशिया
मेरी आपको ढेरों बधाईयाँ, खुश रहे अनंत भैया |

पुनश्च - 17 तारीख से कम्प्यूटर ख़राब चल रहा है, देरी के लिए खेद है |

आज एक संयोग की ओर ध्यान गया....

ओ. बी. ओ. पर मेरे समूह "ग़ज़ल की बातें" में आज सदस्यों की संख्या २०० हो गई ... कुछ दिन पहले इस खुले समूह को सीमित कर दिया गया है ...


अचानक 'पेज व्यू रीडिंग' देखने की बात मन में आई तो पता चला मेरे कुल २३ पोस्ट की कुल 'पेज व्यू' 12597 हो गई है .... प्रत्येक लेख औसतन ५४८ पेज व्यू ...

देख कर सुखद अनुभूति हुई ...

इस पर बधाई कहना बनता है. ग़ज़ल सिर चढ़ कर बोल रही है.

शुभ-शुभ

जितना मजा हम लोग ले रहे हैं किसी दिन सौरभ जी तरंग में आ गये तो हम लोग को मथुरा का पेड़ा खिला देंगे और उस खिलाने में इतनी मुहब्बत भरी होगी कि हम नहीं खाना चाहेंगे तब भी खाना पड़ेगा :)))))))))))))))))))))))

कभी-कभी आदरणीय धर्मेन्द्रजी, फ़ैज़ के शेर बन जाते हैं. या फ़िराक़ की फ़ारसी अल्फ़ाज़ भरी ग़ज़ल.  .. ... :-(((

मैंने तो लिखा था कि [बधाई ही नहीं सौरभ जी, साथ में मिठाई भी माँगनी पड़ेगी वीनस जी से]। मिठाई इंटरनेट खा गया सो तो ठीक है। मगर ‘जी’ भी खा जायेगा ये पता नहीं था। जो न करवा दे ये डाटा लॉस। :)))))))))))

हा हा हा
मगर उस कमेन्ट का भी अपना लुत्फ़ था ... अपना मतलब था ... :)))))))))

बधाई बराबर सौरभ नहीं होता.. बधाई तो बस बधाई होती है.. सिर को फुग्गा बना देती है. हा हा हा हा..

:-)))))))))))))))))))

जय हो..

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . प्यार

दोहा सप्तक. . . . प्यारप्यार, प्यार से माँगता, केवल निश्छल प्यार ।आपस का विश्वास ही, इसका है आधार…See More
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई चेतन जी, उत्साहवर्धन व स्नेह के लिए आभार।"
Sunday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
Sunday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ.लक्ष्मणसिह धानी, 'मुसाफिर' साहब  खूबसूरत विषयान्तर ग़ज़ल हुई  ! हार्दिक …"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर मुक्तक हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
Sunday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"ग़ज़ल   बह्र ए मीर लगता था दिन रात सुनेगा सब के दिल की बात सुनेगा अपने जैसा लगता था…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'

बदला ही राजनीति के अब है स्वभाव में आये कमी कहाँ  से  कहो  फिर दुराव में।१। * अवसर समानता का कहे…See More
Saturday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
" दोहा मुक्तक :  हिम्मत यदि करके कहूँ, उनसे दिल की बात  कि आज चौदह फरवरी, करो प्यार…"
Saturday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"दोहा एकादश. . . . . दिल दिल से दिल की कीजिये, दिल वाली वो बात । बीत न जाए व्यर्थ के, संवादों में…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"गजल*****करता है कौन दिल से भला दिल की बात अबबनती कहाँ है दिल की दवा दिल की बात अब।१।*इक दौर वो…"
Saturday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service