Tags:
हार्दिक आभार भाई शेख़ उस्मानी जीI
हम सब लघुकथाकारों के भ्रमित होने से बचने के लिए सही समय पर , मार्गदर्शन हेतु बेहद जरुरी तथ्य खंगालकर , स्पष्ट दस्तावेज हमे उपहार में दिए है। सादर अभिनन्दन सर जी।
यह आपका स्नेह है आ० कांता रॉय जीI
अगर इस आलेख से किसी को लाभ हो तो यह मेरे लिए बेहद ख़ुशी की बात होगीI
देर से ही सही, लेकिन आपके हुक्म की तामील हो ही गई आ० ओमप्रकाश क्षत्रिय जीI
आदरणीय योगराज सर, लघुकथा विधा में इस बिंदु पर मुझसे कई बार त्रुटियाँ हुई है. कालखंड दोष की बारीकी को समझना एक लघुकथाकार अभ्यासी के लिए सबसे जरुरी है, ये बात आज पानी की तरह साफ़ हो गई. क्योकि इस दोष से ग्रसित रचना लघुकथा हो ही नहीं सकती. आपने बिन्दुवार सटीक, संक्षिप्त किन्तु सारगर्भित तथ्य साझा कर हम नव अभ्यासियों का जो मार्गदर्शन किया है उसके लिए हार्दिक आभारी हूँ. इस आलेख ने कई कई प्रश्नों, जिज्ञासाओं और पूर्वाग्रहों का समाधान प्रस्तुत किया है. सादर नमन
अगर कालखंड दोष ही आ गया तो लघुकथा रहती ही नहीं भाई मिथिलेश वामनकर जी, आकार के इलावा यह एक महत्वपूर्ण बिंदु है जो लघुकथा और कहानी में फर्क पैदा करता हैI
एक अपरिहार्य आलेख की प्रस्तुति हुई है, आदरणीय योगराजभाईसाहब.
लघुकथा देखने में जितनी नन्हीं-मुन्नी, निहायत कमसिन-सी विधा मालूम होती है, प्रभाव में कई बार तितैये के दंश का आभास करा देती है. कारण है, उसकी बेइन्तहा सान्द्रता. यह सान्द्रता काई एक विन्दु पर निर्भर करती है जिसे आपने इस आलेख सोद्धरण प्रस्तुत किया है. यह आपकी इस विधा के प्रति तथा इस मंच के विशिष्ट वातावरण के प्रति अत्युच्च दायित्व निर्वहन का परिचायक है.
जिस काल-खण्ड दोष के बारे में आपने जानकारी साझा की है, वह किसी लघुकथा के कथ्य को कितना विरल कर सकती है इसे तभी समझा जा सकता है, जब हम लघुकथा विधा के सान्द्रता को समझें.
इस आलेख हेतु हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय.
एक बात :
आलेख में एक विद्वान सज्जन का नाम आया है जो दो तरह से उच्चारित (शाब्दिक) हुआ है - आदरणीय सुभाष का ! इनका उपनाम ’नीरव’ है या ’नीरज’ ?
सादर
उन सज्जन का नाम सुभाष नीरव है, "नीरज" गलती से लिखा गयाI
दरअसल इस कालखंड को लेकर बहुत सी भ्रांतियाँ फैलाई जा रही हैं, जिनसे नवोदित रचनाकार भ्रमित हो रहे थेI तभी मुझे यह आलेख लिखने की सूझीI आपकी शाबाशी से सातवें आसमान पर हूँI
आवश्यक सूचना:-
1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे
2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |
3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |
4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)
5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |
© 2026 Created by Admin.
Powered by
महत्वपूर्ण लिंक्स :- ग़ज़ल की कक्षा ग़ज़ल की बातें ग़ज़ल से सम्बंधित शब्द और उनके अर्थ रदीफ़ काफ़िया बहर परिचय और मात्रा गणना बहर के भेद व तकतीअ
ओपन बुक्स ऑनलाइन डाट कॉम साहित्यकारों व पाठकों का एक साझा मंच है, इस मंच पर प्रकाशित सभी लेख, रचनाएँ और विचार उनकी निजी सम्पत्ति हैं जिससे सहमत होना ओबीओ प्रबन्धन के लिये आवश्यक नहीं है | लेखक या प्रबन्धन की अनुमति के बिना ओबीओ पर प्रकाशित सामग्रियों का किसी भी रूप में प्रयोग करना वर्जित है |