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भोजपुरी साहित्य Discussions (249)

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भोजपुरी में पहिलका कार्टून मूवी : "पंडित अउर तीन ठग"

सभे सदस्यगण के प्रणाम, का करीं दिमाग में कुछ ना कुछ घुमात रहेला, कभी कुछ करे के ता कभी कुछ करे के, भोजपुरी खातिर जेतना भी करीला ओकरा से सं…

Started by R. K. PANDEY "RAJ"

2 May 20, 2011
Reply by Raju

छोड़ के पिजरवा पराय गईलू चिरई|

छोड़ के पिजरवा पराय गईलू चिरई | सबहीं के सनेहिया भूलाय गईलू चिरई | निक नाही लागे अब त घरवा अंगनवा, तोहई के खोजे घूमि चारो और मनवा | कवनी खो…

Started by आशीष यादव

6 May 20, 2011
Reply by Raju

ई ह भोजपुरिया पुड़ी. . . . . . . . . . . . . . . . .

ई ह भोजपुरिया पुड़ी, एकर अकार 12 इंच के डायमीटर के होला. खाए में बहुत ही मोलायम होला आ एह पुड़ी के मोकबला कवनो पुड़ी ना कर सकस. गरम गरम खाय…

Started by R. K. PANDEY "RAJ"

7 May 20, 2011
Reply by Raju

मुख्य प्रबंधक

हल्की फुल्की हँसी की बात (भाग-६ ) / गनेश जी "बागी"

गुरु जी आज कोलकत्ता से घरे आवत रहलन ह,त छपरा स्टेशन पर मुसाफिर खाना मे बईठ एकमा जाये वाली गाडी के ईन्तजार करत रहलन, बगल मे एक आदमी अउर बईठल…

Started by Er. Ganesh Jee "Bagi"

3 May 20, 2011
Reply by Raju

"चाहेनी तोहके केतना हम कह नइखी सकत"

चाहेनी तोहके केतना हम कह नइखी सकत दूर तोहसे एक पल हम रह नइखी सकत ज़िनगी में त होला बहुते गम मगर गम-ए-जुदाई हम सह नइखी सकत चाहेनी तोहके केतन…

Started by Raju

8 May 20, 2011
Reply by Raju

बतकही ( गपसप ) अंक १

बतकही ( गपसप ) मोड़ पर लछुमन भाई के चाय दुकान पर चार पाच गो लईका, अब लईका कहल ठीक ना कहाई, काहे से कि वो में से दू तीन गो के शादियों हो गइ…

Started by Rash Bihari Ravi

2 May 17, 2011
Reply by Shashi Ranjan Mishra

भोजपुरी के संग: दोहे के रंग -- संजीव 'सलिल'

भोजपुरी के संग: दोहे के रंग संजीव 'सलिल' भइल किनारे जिन्दगी, अब के से का आस? ढलते सूरज बर 'सलिल', कोउ न आवत पास.. * अबला जीवन पड़ गइल, के…

Started by sanjiv verma 'salil'

3 May 16, 2011
Reply by Saurabh Pandey

मिस्टर बिन्देसर अउर महुआ टीवी के परोगराम (भोजपुरी में रूपांतरित पहिला एनीमेशन फिलिम)

अंग्रेजी आ हिंदी में MR. BEAN के अनिमेशन कार्टून के लोग खूब पसंद करेला. एही सोच के हम एह एनीमेशन फिलिम के भोजपुरी भाषा में रूपांतरित कईले ब…

Started by R. K. PANDEY "RAJ"

1 May 14, 2011
Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi"

भोजपुरी दोहे: -- संजीव 'सलिल'

भोजपुरी दोहे: संजीव 'सलिल' * नेह-छोह राखब सदा, आपन मन के जोश. सत्ता धन बल पाइ त, 'सलिल; न छाँड़ब होश.. * कइसे बिसरब नियति के, मन में लगल कच…

Started by sanjiv verma 'salil'

3 May 14, 2011
Reply by Sanjay Rajendraprasad Yadav

तनिका ठहर जा ए पथिक

Started by R. K. PANDEY "RAJ"

3 May 13, 2011
Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi"

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दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
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"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
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चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
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"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
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Chetan Prakash commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
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Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
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Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
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Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
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Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
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Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
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Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
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