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All Discussions Tagged 'ग़ज़ल' (9)

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ग़ज़ल संक्षिप्‍त आधार जानकारी-10

मुफरद बह्रों से बनने वाली मुजाहिफ बह्रें इस बार हम बात करते हैं मुफरद बह्रों से बनने वाली मुजाहिफ बह्रों की। इन्‍हें देखकर तो अनुमान हो ही…

Started by Tilak Raj Kapoor

39 Sep 27, 2024
Reply by मनोज अहसास

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ग़ज़ल-संक्षिप्‍त आधार जानकारी-7

ग़ज़ल की विधा में रदीफ़ काफि़या तक बात तो फिर भी आसानी से समझ में आ जाती है, लेकिन ग़ज़ल के तीन आधार तत्‍वों में तीसरा तत्‍व है बह्र जिसे म…

Started by Tilak Raj Kapoor

6 Jul 21, 2024
Reply by मिथिलेश वामनकर

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ग़ज़ल-संक्षिप्‍त आधार जानकारी-4

काफि़या को लेकर आगे चलते हैं। पिछली बार अभ्‍यास के लिये ही गोविंद गुलशन जी की ग़ज़लों का लिंक देते हुए मैनें अनुरोध किया था कि उन ग़ज़लों क…

Started by Tilak Raj Kapoor

33 Apr 27, 2019
Reply by Rachna Bhatia

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ग़ज़ल-संक्षिप्‍त आधार जानकारी-1

यह आलेख उनके लिये विशेष रूप से सहायक होगा जिनका ग़ज़ल से परिचय सिर्फ पढ़ने सुनने तक ही रहा है, इसकी विधा से नहीं। इस आधार आलेख में जो शब्‍द…

Started by Tilak Raj Kapoor

56 Jan 22, 2019
Reply by Asif zaidi

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ग़ज़ल-संक्षिप्‍त आधार जानकारी-2

ग़ज़ल की आधार परिभाषायें जानने के बाद स्‍वाभाविक उत्‍सुकता रहती है इन परिभाषित तत्‍वों के प्रायोगिक उदाहरण जानने की। ग़ज़ल में बह्र का बहुत…

Started by Tilak Raj Kapoor

12 Nov 17, 2018
Reply by विनोद 'निर्भय'

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ग़ज़ल-संक्षिप्‍त आधार जानकारी-5

पिछले आलेख में हमने प्रयास किया काफि़या को और स्‍पष्‍टता से समझने का और इसी प्रयास में कुछ दोष भी चर्चा में लिये। अगर अब तक की बात समझ आ गय…

Started by Tilak Raj Kapoor

36 Apr 22, 2017
Reply by Nilesh Shevgaonkar

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ग़ज़ल-संक्षिप्‍त आधार जानकारी-6

काफि़या को लेकर अब कुछ विराम लेते हैं। जितना प्रस्‍तुत किया गया है उसपर हुई चर्चा को मिलाकर इतनी जानकारी तो उपलब्‍ध हो ही गयी है कि इस विषय…

Started by Tilak Raj Kapoor

15 Jan 27, 2016
Reply by kanta roy

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ग़ज़ल-संक्षिप्‍त आधार जानकारी-3

एक बात जो आरंभ में ही स्‍पष्‍ट कर देना जरूरी है कि यह आलेख काफि़या का हिन्‍दी में निर्धारण और पालन करने की चर्चा तक सीमित है। उर्दू, अरबी,…

Started by Tilak Raj Kapoor

53 Feb 22, 2012
Reply by Rajeev Bharol

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ग़ज़ल-संक्षिप्‍त आधार जानकारी-8

बह्र विवरण-अगला चरण:पिछली पोस्‍ट में जो जानकारी दी गयी थी उससे एक स्‍वाभाविक प्रश्‍न उठता है कि सभी मुफ़रद बह्र एक ही रुक्‍न की आवृत्ति स…

Started by Tilak Raj Kapoor

7 May 14, 2011
Reply by Tilak Raj Kapoor

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दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
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