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हास्य गद्य पाठ करते हुए..

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Comment by Saurabh Pandey on March 13, 2013 at 6:53pm

//सबसे बडी बात ये कि हर रचना के के पीछे की कहानी पर भी खुल कर चर्चा हुई, जिससे रचना और मजेदार हो गयी थी. //

एकदम सही कहा. फ़रमूद भाई ने रचना के ऊपर चर्चा कर रचनाधर्मिता के उस पहलू को एक बार फिर से उजागर किया जिससे आज के रचनाकार लगभग अनजान हैं कि ऐसे तथ्यों पर भी इतनी अच्छी बातें होती हैं.  हर रचना के होने का एक विशेष कारण होता है तथा हर रचना एक विशेष मनोदशा की परिणाम होती है. 

कल की गोष्ठी इस बात में एकदम अलगथी कि रचनाकार अपने भाव में रचना पाठ कर रहे थे.

Comment by Shubhranshu Pandey on March 13, 2013 at 1:30pm

एक यादगार पल, जब सभी बेरोक टोक साहित्य के बहाव में बह रहे थे. न समय की पाबन्दी,  न ही रचना की, सबसे बडी बात ये कि हर रचना के के पीछे की कहानी पर भी खुल कर चर्चा हुई, जिससे रचना और मजेदार हो गयी थी. 

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