For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Mukulkumar Limbad
  • Male
  • Danta Banaskantha Gujarat
  • India
Share
 

Mukulkumar Limbad's Page

Latest Activity

Mukulkumar Limbad replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-113 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभा पान्डे जी, प्रोत्साहित और सुझाव  देने के लिए हृदय से धन्यवाद"
Sep 20
Mukulkumar Limbad replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-113 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अजय गुप्ताजी,रचना की प्रशंसा के लिए हृदय से धन्यवाद आभार आपका।"
Sep 20
Mukulkumar Limbad replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-113 in the group चित्र से काव्य तक
"हरिगीतिका मैं बैठ कर घर में थकी भाभी चलो खेले नया, कुछ काम तो बाकी नहीं बैठी रही हो क्यूँ जया, है तो नहीं कोई कहाँ छोडो फिकर आओ यहाँ, मौसी चलो भाभी चलो कोई नहीं बाकी रहा|| वो खेलते हैं खेल कैसे ये नहीं मैं जानती, ये आदमी का खेल है मैं तो नहीं यह…"
Sep 20
Dimple Sharma commented on Mukulkumar Limbad's blog post मृग-बादल (तोटक छंद)
"आदरणीय मुकुल कुमार जी नमस्ते, खुबसूरत रचना पर बधाई स्वीकार करें आदरणीय।"
Sep 2
Dimple Sharma commented on Mukulkumar Limbad's blog post चलो सहियर
"आदरणीय मुकुल कुमार जी नमस्ते छंद की जानकारी तो नहीं परन्तु आपकी रचना पढ़कर बहुत आनन्द आया , बधाई स्वीकार करें।"
Sep 2
Mukulkumar Limbad commented on Mukulkumar Limbad's blog post चलो सहियर
"आदरणीय समर कबीरजी, सादर प्रणाम| छंद रचना को सराहने के लिए, नवोदित को होंसला देने के लिए आपका बहुत बहुत आभारी हूँ|"
Aug 29
Samar kabeer commented on Mukulkumar Limbad's blog post चलो सहियर
"जनाब मुकुल कुमार जी आदाब, अच्छी छंद रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Aug 28
Mukulkumar Limbad posted a blog post

चलो सहियर

छंद - मंदाक्रान्ता (मातारा भानस नसल ताराज ताराज गागा = 17 वर्ण)यति =4,10,17मेेले में ओ सहियर चलो आज जाए गुमेंगे, आया है ये दिन लहरका मोज मस्ती करेंगे, मेले की है रमझट बड़ी आ टहेले वहाँ पे, खोजे मेरा प्रियतम मुझे ओ सखीरी चलो रे|भागी भागी गुपचुप सखी मैं, बात कोई न जाने, पानी का लें घट झपट से, लौटना जल्द माने, मैंने लाई यह तुज लिए हा नयी ओढनी रे, देखो कैसी तुम पर झझती ओढ ले ओढनी रे|देखें मेला सहियर चलो ना रहे पाउ यहाँ पे, लज्जा आये सहियर मुझे संग आना तु वहाँ पे, दे दीया था वचन मिलने आज आना…See More
Aug 27
Mukulkumar Limbad posted a blog post

मृग-बादल (तोटक छंद)

छंद - तोटक (सलगा सलगा सलगा सलगा = 12 वर्ण)नभ बादल बादल आज यहाँ, चमकार करे सुन वीज यहाँ, नभ काजल काजल मेश हुआ, दिलका दव ठार तु यही दुआ|मृग-बादल आज महेर दया, दिलसे बरसो अब छोड़ हया, गजराज जरा गरजे नभमें, वनराज फिरे फिरसे वनमें|टपके जलबुंद हजार कहीं, झमकार सुनो जलधार यही, जल-चुंबन अंबर से बरसे, पल ये पल को धरती तरसे|मधु सोडम जो प्रसरी भुवने, तन वो मन हाश भरे सुखमें, सुन पायल की झमकार जरा, वन मोहक शीतल घोर हरा|झरना बहता नग से झरता, किलशोर युही मृग जो सुनता, मृग-बादल आज महेर दया, दिल से बरसो…See More
Aug 26
Mukulkumar Limbad commented on Mukulkumar Limbad's blog post मृग-बादल (तोटक छंद)
"आदरणीय आशीष यादवजी, सादर प्रणाम आपकी बात सही है| चोथी पंक्ति में कमी है| जिसमे मैं सुधार करना चाहुँगा| घन्यवाद "दिलका दव ठार तु यही दुआ""
Aug 25
आशीष यादव commented on Mukulkumar Limbad's blog post मृग-बादल (तोटक छंद)
"बहुत बढ़िया छंद की रचना हुई है। बधाई स्वीकार कीजिए। शायद चौथी पंक्ति में कुछ कमी है।"
Aug 25
Mukulkumar Limbad commented on Mukulkumar Limbad's blog post मृग-बादल (तोटक छंद)
"आदरणीय समर कबीरजी सादर प्रणाम, प्रस्तुत छंद रचना प्रयास को सराहने के लिए आपका हृदय से आभार.सादर "
Aug 25
Samar kabeer commented on Mukulkumar Limbad's blog post मृग-बादल (तोटक छंद)
"जनाब मुकुल कुमार जी आदाब, अच्छी छंद रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Aug 25
Mukulkumar Limbad posted a blog post

मृग-बादल (तोटक छंद)

छंद - तोटक (सलगा सलगा सलगा सलगा = 12 वर्ण)नभ बादल बादल आज यहाँ, चमकार करे सुन वीज यहाँ, नभ काजल काजल मेश हुआ, दिलका दव ठार तु यही दुआ|मृग-बादल आज महेर दया, दिलसे बरसो अब छोड़ हया, गजराज जरा गरजे नभमें, वनराज फिरे फिरसे वनमें|टपके जलबुंद हजार कहीं, झमकार सुनो जलधार यही, जल-चुंबन अंबर से बरसे, पल ये पल को धरती तरसे|मधु सोडम जो प्रसरी भुवने, तन वो मन हाश भरे सुखमें, सुन पायल की झमकार जरा, वन मोहक शीतल घोर हरा|झरना बहता नग से झरता, किलशोर युही मृग जो सुनता, मृग-बादल आज महेर दया, दिल से बरसो…See More
Aug 25
Mukulkumar Limbad added a discussion to the group English Literature
Thumbnail

An Unknown Doggy

As I'm going to the office on my way, Walking with my friend who says - An unknown doggy follows us, may be, I am not sure, I don't care! who cares?After about ten seconds, I pay attention, Follower follows us without any tension, Follower is of course not  familiar to me, & my friend. What happens then let's see,Have to find out the reason of following, It may be amazing as well as interesting, Looking at the doggy,  ignoring us firstly, As do not aware of the thing completely.By making…See More
Aug 24
Mukulkumar Limbad replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-112 in the group चित्र से काव्य तक
"आपका बहुत धन्यवाद अजय गुप्ता जी,   रचना में सुधार करने के लिए कृपया मार्गदर्शन प्रदान करेंगे तो आपका आभारी रहुँगा."
Aug 23

Profile Information

Gender
Male
City State
Gujarat
Native Place
Khedasan
Profession
Executive Magistrate & Dy. Tahsildar

Comment Wall (1 comment)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 10:42pm on August 21, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

|

|

|

|

|

|

|

|

आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचनाएँ यहाँ पोस्ट (क्लिक करें) कर सकते है.

और अधिक जानकारी के लिए कृपया नियम अवश्य देखें.

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतुयहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

 

ओबीओ पर प्रतिमाह आयोजित होने वाले लाइव महोत्सवछंदोत्सवतरही मुशायरा व  लघुकथा गोष्ठी में आप सहभागिता निभाएंगे तो हमें ख़ुशी होगी. इस सन्देश को पढने के लिए आपका धन्यवाद.

Mukulkumar Limbad's Blog

चलो सहियर

छंद - मंदाक्रान्ता

(मातारा भानस नसल ताराज ताराज गागा = 17 वर्ण)यति =4,10,17

मेेले में ओ सहियर चलो आज जाए गुमेंगे,

आया है ये दिन लहरका मोज मस्ती करेंगे,

मेले की है रमझट बड़ी आ टहेले वहाँ पे,

खोजे मेरा प्रियतम मुझे ओ सखीरी चलो रे|

भागी भागी गुपचुप सखी मैं, बात कोई न जाने,

पानी का लें घट झपट से, लौटना जल्द माने,

मैंने लाई यह तुज लिए हा नयी ओढनी रे,

देखो कैसी तुम पर झझती ओढ ले ओढनी रे|

देखें मेला सहियर चलो ना रहे…

Continue

Posted on August 27, 2020 at 8:30pm — 3 Comments

मृग-बादल (तोटक छंद)

छंद - तोटक

(सलगा सलगा सलगा सलगा = 12 वर्ण)

नभ बादल बादल आज यहाँ,

चमकार करे सुन वीज यहाँ,

नभ काजल काजल मेश हुआ,

दिलका दव ठार तु यही दुआ|

मृग-बादल आज महेर दया,

दिलसे बरसो अब छोड़ हया,

गजराज जरा गरजे नभमें,

वनराज फिरे फिरसे वनमें|

टपके जलबुंद हजार कहीं,

झमकार सुनो जलधार यही,

जल-चुंबन अंबर से बरसे,

पल ये पल को धरती तरसे|

मधु सोडम जो प्रसरी भुवने,

तन वो मन हाश भरे सुखमें,…

Continue

Posted on August 24, 2020 at 11:30pm — 5 Comments

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post मुझे भी पढ़ना है - लघुकथा –
"हार्दिक आभार आदरणीय समर कबीर साहब जी।आदाब।"
13 hours ago
Chetan Prakash posted a blog post

ग़ज़ल

212 212 212 2राज़ आशिक़ के पलने लगे हैं फूल लुक-छिप के छलने लगे हैउनके आने से जलने लगे हैं…See More
15 hours ago
सचिन कुमार posted a blog post

ग़ज़ल

2122 2122 2122बहते दरिया की रवानी लिख रहे हैंसब यहाँ अपनी कहानी लिख रहे हैंआंसुओं से बह रहा मेरे…See More
15 hours ago
Ram Ashery commented on Ram Ashery's blog post जिंदगी का सफर
"मेरे उत्साह वर्धन के लिए आपको सहृदय आभार स्वीकार हो । "
yesterday
सचिन कुमार updated their profile
yesterday
Samar kabeer commented on Chetan Prakash's blog post ग़ज़ल
"जनाब चेतन प्रकाश जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें । 'रंग बसंत ग़ज़ल आ घुले…"
yesterday
Samar kabeer commented on Ram Ashery's blog post जिंदगी का सफर
"जनाब राम आश्रय जी आदाब,सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मुफलिसी में ही जिसका गुजारा हुआ - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें…"
yesterday
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post दस्तक :
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
Samar kabeer commented on TEJ VEER SINGH's blog post मुझे भी पढ़ना है - लघुकथा –
"जनाब तेजवीर सिंह जी आदाब, अच्छी लघुकथा लिखी आपने, बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
Profile IconSatish pundir and सचिन कुमार joined Open Books Online
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-तुमसे ग़ज़ल ने कुछ नहीं बोला?
"उचित ही कहा आपने आदरणीय समर जी...मतला कमजोर तो है।दरअसल पहले जो मतला था उसपे ध्यान न होने के कारण…"
Tuesday

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service