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श्याम किशोर सिंह 'करीब'
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Sep 29
SALIM RAZA REWA commented on श्याम किशोर सिंह 'करीब''s blog post बाढ़ / किशोर करीब
"भाई किशोर जी बधाई हो,"
Sep 8
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on श्याम किशोर सिंह 'करीब''s blog post बाढ़ / किशोर करीब
"आद0 किशोर जी बाढ़ विषय को आपने सामने रखकर अच्छी रचना की है,बधाई स्वीकारें। सादर"
Sep 6
Samar kabeer commented on श्याम किशोर सिंह 'करीब''s blog post बाढ़ / किशोर करीब
"जनाब किशोर'क़रीब'साहिब आदाब,बाढ़ के प्रकोप पर बढ़िया मार्मिक रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Sep 5
श्याम किशोर सिंह 'करीब' posted a blog post

बाढ़ / किशोर करीब

बाढ़ ने फिर बाँध तोड़ेलुट गया घरबार फिर से जो संभाले थे बरस भरटिक न पाए एक भी क्षणदेखते ही देखते सबढह गया कुछ बचा ना अब  त्रासदी हर साल की है क्या कहानी हाल की है? क्यों नहीं हम जागते हैं? व्यर्थ ही बस भागते हैं। क्यों नहीं निस्तार करते नदियों का विस्तार करते? पथ कोई हो जिसमें चल के प्राणदा खुद को संभाले। हम बनाते घर सभी हैंसोचते क्या पर कभी हैं?नदी में जब बाढ़ आएफिर वो पानी कहाँ जाए? कहीं तो जाएगा जल वोअश्रुपूरित आँख करने। बतख - मुर्गी गाय - बकरेबच्चे भी हैं माँ को जकड़े।मरेंगे जो हैं…See More
Sep 5
श्याम किशोर सिंह 'करीब' commented on श्याम किशोर सिंह 'करीब''s blog post क्वैक कवि / किशोर करीब
"आदरणीय गिरिराज भंडारी जी, सादर नमस्कार। प्रोत्साहित करने के लिए हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ। क्षमा कीजिएगा मुझे कविता की तकनीकी जानकारी थोड़ी भी नहीं है, बस लिख देता हूँ।"
Aug 24

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on श्याम किशोर सिंह 'करीब''s blog post क्वैक कवि / किशोर करीब
"आदरनीय श्याम भाई , इस प्रस्तुति के लिये आपको हार्दिक बधाइयाँ । रचना विधा को क्या नाम दें मुझे भी समझ नही आया , क्या इसे अतुकांत कविता कह सकते हैं ?"
Aug 24
श्याम किशोर सिंह 'करीब' commented on श्याम किशोर सिंह 'करीब''s blog post पर्यावरण / किशोर करीब
"जनाब तस्दीक अहमद खान साहब एवं श्री सुरेंद्र नाथ सिंह साहब, सादर नमस्कार तथा प्रोत्साहित करने हेतु हार्दिक आभार।"
Aug 24
श्याम किशोर सिंह 'करीब' commented on श्याम किशोर सिंह 'करीब''s blog post क्वैक कवि / किशोर करीब
"आदरणीय सुरेंद्र जी सादर नमस्कार,दरअसल मुझे कविता रचना के संबंध में तकनीकी ज्ञान थोड़ा भी नहीं है। बस जो दिमाग में बातें आती हैं उनको कैसे भी पद्यरूप में ढालने का प्रयास करता हूँ। प्रोत्साहन के लिए हार्दिक आभार।"
Aug 24
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on श्याम किशोर सिंह 'करीब''s blog post पर्यावरण / किशोर करीब
"जनाब श्याम किशोर जी सादर अभिवादन,, बहुत सुंदर रचना,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । RSS"
Aug 24
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on श्याम किशोर सिंह 'करीब''s blog post क्वैक कवि / किशोर करीब
"आद0 श्याम किशोर जी सादर अभिवादन, आपकी रचना पर नमन सँग बधाई, एक बात पूछना चाहूँगा, कोई शिल्प विधान भी लिया है क्या?"
Aug 24
श्याम किशोर सिंह 'करीब' posted a blog post

क्वैक कवि / किशोर करीब

डिग्री धारी एक कवि ने पूछा इक बेडिग्रे सेकैसे लिखते हो कविताएँ दिखते तो बेफिक्रे से।अलंकार रस छंद वर्तनी कैसे मैनेज करते होकरते हो कुछ काट - चिपक या फिर अपना ही धरते हो।पिंगल और पाणिनि को पढ़ मैं तो सोचा करता हूँ,मात्रिक वार्णिक वर्णवृत्त मुक्तक में लोचा करता हूँ।यति गति तुक मात्रा गण आदि सभी अंगों को ढो लातेजरा बताओ ज्ञान कहाँ से इतने सब कुछ का पाते?-- तब बेचारे हकबकाए क्वैक कवि ने उत्तर दिया --भाई मैंने आज ही जाना इतने छंदों के हैं नामअपना दर्शन सीखते जाना बाकी बातों से क्या काम।खेत शहर जंगल…See More
Aug 23
श्याम किशोर सिंह 'करीब' commented on श्याम किशोर सिंह 'करीब''s blog post जिजीविषा / किशोर करीब
"आदरणीय श्री Ravi Shukla जी, हार्दिक धन्यवाद एवं सादर नमस्कार। असल बात ये है कि विधाओं की समझ अभी तक मुझे नहीं हुई है, बस जो बातें मन में आतीं हैं उनको पद्य में लिखने की कोशिश करता हूँ। प्रयासरत हूँ कि थोड़ा समय निकाल कर छंद, विधा आदि के बारे में कुछ…"
Aug 22
Tasdiq Ahmed Khan commented on श्याम किशोर सिंह 'करीब''s blog post पर्यावरण / किशोर करीब
"जनाब श्याम किशोर साहिब ,सुन्दर रचना हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं"
Aug 22
Ravi Shukla commented on श्याम किशोर सिंह 'करीब''s blog post जिजीविषा / किशोर करीब
"अादरणीय किशोर जी आपकी रचना प्रस्‍तुति के लिये बधाई आपने इसे किस विधा में लिखा है यदि गजल है तो उसके अरकान पहले लिख देते आप तो इस पर और भी चर्चा हो जाती अभी इसका कोई स्‍पष्‍ट स्‍वरूप नहीं समझ आ रहा ।"
Aug 22
श्याम किशोर सिंह 'करीब' commented on श्याम किशोर सिंह 'करीब''s blog post पर्यावरण / किशोर करीब
"सादर नमस्कार एवं हार्दिक आभार Mohammed Arif साहब और Mohit mishra (mukt) साहब।"
Aug 22

Profile Information

Gender
Male
City State
Samastipur, Bihar
Native Place
Samastipur
Profession
Teacher
About me
चलो कोई गुल खिलाएँ, स्नेह पथ पर पुल बनाएँ। जोड़कर बिछड़े दिलों को.. ढूँढ कुछ संभावनाएँ। राह जो जन हैं भटकते.. पालकर अभिमान मन में, उन्हें कोई पथ बताएँ.. सृष्टि को सुंदर बनाएँ।

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श्याम किशोर सिंह 'करीब''s Blog

बाढ़ / किशोर करीब

बाढ़ ने फिर बाँध तोड़े

लुट गया घरबार फिर से

 

जो संभाले थे बरस भर

टिक न पाए एक भी क्षण

देखते ही देखते सब

ढह गया कुछ बचा ना अब 

 

त्रासदी हर साल की है

क्या कहानी हाल की है?



क्यों नहीं हम जागते हैं?

व्यर्थ ही बस भागते हैं।

क्यों नहीं निस्तार करते

नदियों का विस्तार करते?



पथ कोई हो जिसमें चल के

प्राणदा खुद को संभाले।

 

हम बनाते घर सभी हैं

सोचते क्या पर कभी हैं?

नदी में…

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Posted on September 4, 2017 at 3:46pm — 3 Comments

क्वैक कवि / किशोर करीब

डिग्री धारी एक कवि ने पूछा इक बेडिग्रे से

कैसे लिखते हो कविताएँ दिखते तो बेफिक्रे से।

अलंकार रस छंद वर्तनी कैसे मैनेज करते हो

करते हो कुछ काट - चिपक या फिर अपना ही धरते हो।

पिंगल और पाणिनि को पढ़ मैं तो सोचा करता हूँ,

मात्रिक वार्णिक वर्णवृत्त मुक्तक में लोचा करता हूँ।

यति गति तुक मात्रा गण आदि सभी अंगों को ढो लाते

जरा बताओ ज्ञान कहाँ से इतने सब कुछ का पाते?

-- तब बेचारे हकबकाए क्वैक कवि ने उत्तर दिया --

भाई मैंने आज ही जाना इतने…

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Posted on August 22, 2017 at 8:25pm — 4 Comments

पर्यावरण / किशोर करीब

कौन जाने क्या हुआ है धरा क्यों है भीत।

हो रहा संक्रमित कैसे मौसमों का रीत।

गुम हुए हैं घरों के खग

छिपकली हैं शेष,

क्या पता कौए गए हैं

दूर कितने देश।

कब उगेंगे वृक्ष नूतन होगी कल - कल नाद

कैसे होगी पत्थरों पर हरीतिमा की शीत।

धूप की गर्मी बढ़ी है

सूखती है दूब,

आस का पंछी तड़पता

धैर्य जाता डूब।

क्षीण होती जा रही है अब दिनोदिन छाँव

कब सुनाई देगी वो ही मौसमी संगीत।

आ धमकती सुबह से ही

गर्म किरणें…

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Posted on August 21, 2017 at 9:54pm — 8 Comments

जिजीविषा / किशोर करीब

ये क्या है जो मुझे चलाती?

कभी मंद कभी तेज भगाती

क्या पाया क्या पाना चाहा,

हरदम मुझको याद दिलाती

विधना ने क्रंदन दुःख लिखा,

यह प्रेरित करती हर्षाती

कभी शिथिल होकर बैठा जो,

उत्प्रेरित कर मुझे जगाती

जलते जीवन में भी हँसकर,

बढ़ते जाना मुझे सिखाती…

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Posted on August 17, 2017 at 10:00pm — 6 Comments

 
 
 

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