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श्याम किशोर सिंह 'करीब'
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श्याम किशोर सिंह 'करीब' posted a blog post

क्वैक कवि / किशोर करीब

डिग्री धारी एक कवि ने पूछा इक बेडिग्रे सेकैसे लिखते हो कविताएँ दिखते तो बेफिक्रे से।अलंकार रस छंद वर्तनी कैसे मैनेज करते होकरते हो कुछ काट - चिपक या फिर अपना ही धरते हो।पिंगल और पाणिनि को पढ़ मैं तो सोचा करता हूँ,मात्रिक वार्णिक वर्णवृत्त मुक्तक में लोचा करता हूँ।यति गति तुक मात्रा गण आदि सभी अंगों को ढो लातेजरा बताओ ज्ञान कहाँ से इतने सब कुछ का पाते?-- तब बेचारे हकबकाए क्वैक कवि ने उत्तर दिया --भाई मैंने आज ही जाना इतने छंदों के हैं नामअपना दर्शन सीखते जाना बाकी बातों से क्या काम।खेत शहर जंगल…See More
3 hours ago
श्याम किशोर सिंह 'करीब' commented on श्याम किशोर सिंह 'करीब''s blog post जिजीविषा / किशोर करीब
"आदरणीय श्री Ravi Shukla जी, हार्दिक धन्यवाद एवं सादर नमस्कार। असल बात ये है कि विधाओं की समझ अभी तक मुझे नहीं हुई है, बस जो बातें मन में आतीं हैं उनको पद्य में लिखने की कोशिश करता हूँ। प्रयासरत हूँ कि थोड़ा समय निकाल कर छंद, विधा आदि के बारे में कुछ…"
21 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on श्याम किशोर सिंह 'करीब''s blog post पर्यावरण / किशोर करीब
"जनाब श्याम किशोर साहिब ,सुन्दर रचना हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं"
23 hours ago
Ravi Shukla commented on श्याम किशोर सिंह 'करीब''s blog post जिजीविषा / किशोर करीब
"अादरणीय किशोर जी आपकी रचना प्रस्‍तुति के लिये बधाई आपने इसे किस विधा में लिखा है यदि गजल है तो उसके अरकान पहले लिख देते आप तो इस पर और भी चर्चा हो जाती अभी इसका कोई स्‍पष्‍ट स्‍वरूप नहीं समझ आ रहा ।"
yesterday
श्याम किशोर सिंह 'करीब' commented on श्याम किशोर सिंह 'करीब''s blog post पर्यावरण / किशोर करीब
"सादर नमस्कार एवं हार्दिक आभार Mohammed Arif साहब और Mohit mishra (mukt) साहब।"
yesterday
Mohit mishra (mukt) commented on श्याम किशोर सिंह 'करीब''s blog post पर्यावरण / किशोर करीब
"पर्यावरण की स्थिती से अवगत कराती शानदार कविता"
yesterday
Mohammed Arif commented on श्याम किशोर सिंह 'करीब''s blog post पर्यावरण / किशोर करीब
"आदरणीय श्याम किशोर जी आदाब, पर्यावरणीय चिंता को रेखांकित करती बेहतरीन कविता । अच्छा संदेश । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
श्याम किशोर सिंह 'करीब' commented on श्याम किशोर सिंह 'करीब''s blog post पर्यावरण / किशोर करीब
"बहुत आभार! सादर नमस्कार Samar kabeer साहब।"
yesterday
Samar kabeer commented on श्याम किशोर सिंह 'करीब''s blog post पर्यावरण / किशोर करीब
"जनाब श्याम किशोर जी आदाब,बहुत सुंदर रचना,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
श्याम किशोर सिंह 'करीब' posted a blog post

पर्यावरण / किशोर करीब

कौन जाने क्या हुआ है धरा क्यों है भीत।हो रहा संक्रमित कैसे मौसमों का रीत।गुम हुए हैं घरों के खगछिपकली हैं शेष,क्या पता कौए गए हैंदूर कितने देश।कब उगेंगे वृक्ष नूतन होगी कल - कल नादकैसे होगी पत्थरों पर हरीतिमा की शीत।धूप की गर्मी बढ़ी हैसूखती है दूब,आस का पंछी तड़पताधैर्य जाता डूब।क्षीण होती जा रही है अब दिनोदिन छाँवकब सुनाई देगी वो ही मौसमी संगीत।आ धमकती सुबह से हीगर्म किरणें रोज,कुसुम पल्लव मुखर कब होंकहाँ पाएँ ओज।लौट आओ घन घनेरे हम लगाते पेड़,आश है अब हम बचाएँ प्रकृति जाए जीत।(मौलिक एवं…See More
yesterday
श्याम किशोर सिंह 'करीब' commented on श्याम किशोर सिंह 'करीब''s blog post जिजीविषा / किशोर करीब
"Samar kabeer  साहब, हार्दिक आभार! सादर नमस्कार।"
yesterday
Samar kabeer commented on श्याम किशोर सिंह 'करीब''s blog post जिजीविषा / किशोर करीब
"जनाब श्याम किशोर सिंह'क़रीब'जी आदाब,इस सुंदर प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
श्याम किशोर सिंह 'करीब' commented on श्याम किशोर सिंह 'करीब''s blog post जिजीविषा / किशोर करीब
"प्रोत्साहन के लिए हार्दिक आभार श्रीमान सुरेंद्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप जी।"
Sunday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on श्याम किशोर सिंह 'करीब''s blog post जिजीविषा / किशोर करीब
"आद0 श्याम किशोर सिंह जी जिजीविषा को परिभाषित करती उम्दा सृजन पर बधाई"
Sunday
श्याम किशोर सिंह 'करीब' posted a blog post

जिजीविषा / किशोर करीब

ये क्या है जो मुझे चलाती?कभी मंद कभी तेज भगाती।क्या पाया क्या पाना चाहा,हरदम मुझको याद दिलाती।विधना ने क्रंदन दुःख लिखा,यह प्रेरित करती हर्षाती।कभी शिथिल होकर बैठा जो,उत्प्रेरित कर मुझे जगाती।जलते जीवन में भी हँसकर,बढ़ते जाना मुझे सिखाती।बीत समय जाएगा इक दिन,यह धनात्मक सोच दिखाती।कहकर क्या मैं इसे पुकारूँ?जिजीविषा यूँ तो कहलाती।(मौलिक व अप्रकाशित)See More
Friday
श्याम किशोर सिंह 'करीब' commented on श्याम किशोर सिंह 'करीब''s blog post बस यूँ ही दशरथ माँझी... / किशोर करीब
"नमस्कार आदरणीय Mohammad Arif साहब और श्री Lakshman Dhami साहब, प्रोत्साहन के लिए हृदय से आभारी हूँ।"
Aug 17

Profile Information

Gender
Male
City State
Samastipur, Bihar
Native Place
Samastipur
Profession
Teacher
About me
चलो कोई गुल खिलाएँ, स्नेह पथ पर पुल बनाएँ। जोड़कर बिछड़े दिलों को.. ढूँढ कुछ संभावनाएँ। राह जो जन हैं भटकते.. पालकर अभिमान मन में, उन्हें कोई पथ बताएँ.. सृष्टि को सुंदर बनाएँ।

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श्याम किशोर सिंह 'करीब''s Blog

क्वैक कवि / किशोर करीब

डिग्री धारी एक कवि ने पूछा इक बेडिग्रे से

कैसे लिखते हो कविताएँ दिखते तो बेफिक्रे से।

अलंकार रस छंद वर्तनी कैसे मैनेज करते हो

करते हो कुछ काट - चिपक या फिर अपना ही धरते हो।

पिंगल और पाणिनि को पढ़ मैं तो सोचा करता हूँ,

मात्रिक वार्णिक वर्णवृत्त मुक्तक में लोचा करता हूँ।

यति गति तुक मात्रा गण आदि सभी अंगों को ढो लाते

जरा बताओ ज्ञान कहाँ से इतने सब कुछ का पाते?

-- तब बेचारे हकबकाए क्वैक कवि ने उत्तर दिया --

भाई मैंने आज ही जाना इतने…

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Posted on August 22, 2017 at 8:25pm

पर्यावरण / किशोर करीब

कौन जाने क्या हुआ है धरा क्यों है भीत।

हो रहा संक्रमित कैसे मौसमों का रीत।

गुम हुए हैं घरों के खग

छिपकली हैं शेष,

क्या पता कौए गए हैं

दूर कितने देश।

कब उगेंगे वृक्ष नूतन होगी कल - कल नाद

कैसे होगी पत्थरों पर हरीतिमा की शीत।

धूप की गर्मी बढ़ी है

सूखती है दूब,

आस का पंछी तड़पता

धैर्य जाता डूब।

क्षीण होती जा रही है अब दिनोदिन छाँव

कब सुनाई देगी वो ही मौसमी संगीत।

आ धमकती सुबह से ही

गर्म किरणें…

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Posted on August 21, 2017 at 9:54pm — 6 Comments

जिजीविषा / किशोर करीब

ये क्या है जो मुझे चलाती?

कभी मंद कभी तेज भगाती

क्या पाया क्या पाना चाहा,

हरदम मुझको याद दिलाती

विधना ने क्रंदन दुःख लिखा,

यह प्रेरित करती हर्षाती

कभी शिथिल होकर बैठा जो,

उत्प्रेरित कर मुझे जगाती

जलते जीवन में भी हँसकर,

बढ़ते जाना मुझे सिखाती…

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Posted on August 17, 2017 at 10:00pm — 6 Comments

बस यूँ ही दशरथ माँझी... / किशोर करीब

बस यूँ ही दशरथ माँझी...

माझी नहीं बस नाव को जो खींच ले मँझधार से
‘माँझी’ तो है जो रास्ता ले चीर नग के पार से।
प्रेम था वो दिव्यतम जिसमें भरी थी जीवनी
वो फगुनिया थी मरी पर दे गई संजीवनी।
एक कोशिश ला मिलाती गंग को मैदान से
एक कोशिश रास्ता लेती विकट चट्टान से।
ले हथौड़ी और छेनी पिल पड़ा वो वीर था
हो गया भूशाई जो दुर्दम्य पर्वत पीर था।
ताज और विक्टोरिया से है हमारा वास्ता,
पर नमन के योग्य है गहलौर का वो रास्ता!!

(मौलिक व अप्रकाशित)

Posted on August 15, 2017 at 10:28pm — 5 Comments

 
 
 

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