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jyotsna Kapil
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डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on jyotsna Kapil's blog post सर्द साँझ ( लघुकथा )
"कथा अच्छी है किन्तु  आदर्शवादी है .यथार्थ में ऐसा  होना कम संभव है . कथा के इए साधुवाद ."
Dec 17, 2015
Shyam Narain Verma commented on jyotsna Kapil's blog post सर्द साँझ ( लघुकथा )
"इस सुन्दर प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई"
Dec 17, 2015
Rahila commented on jyotsna Kapil's blog post सर्द साँझ ( लघुकथा )
"ममता का कोई मुकाबला ही नहीं । बेहद सुन्दर भावों में लिपटी शानदार रचना आदरणीया दी! सादर"
Dec 17, 2015
Nita Kasar commented on jyotsna Kapil's blog post सर्द साँझ ( लघुकथा )
"ममता से ओतप्रोत माँ का मन पिघल जाताहै मोम की तरह ममता वह उस समय एकतरफ़ा निर्णय का एलान करती है संवेदनाओं से लबरेज़ कथा के लिये बधाई स्वीकार करियेगा आद०जयोत्सना कपिल जी ।"
Dec 16, 2015
vijay nikore commented on jyotsna Kapil's blog post मुफ़्त शिविर
"अच्छी लघु कथा के लिए हार्दिक बधाई, आदरणीया ज्योत्सना जी।"
Dec 16, 2015
jyotsna Kapil posted a blog post

सर्द साँझ ( लघुकथा )

बेचैनी उसकी आँखों से साफ नज़र आ रही थी।उधर अमन कश्मकश भरी निगाह से कभी डॉक्टर, कभी बच्चे, तो कभी अपनी पत्नी कली को देखे जा रहे थे।सर्दी अपने शबाब पर थी।साँझ के धुंधलके में वे दोनों खरीदारी करके लौट रहे थे तो घर के आगे भीड़ देखकर रुक गए।झाड़ियों के पास नर्म, मुलायम कम्बल से लिपटा एक नवजात शिशु पड़ा हुआ था।लोग अनर्गल प्रलाप में लगे थे पर उसे किसी ने हाथ भी न लगाया था।" चलो,न जाने किसका पाप है " अमन ने उसकी बाँह सख्ती से पकड़ते हुए कहा।कली ने कुछ कहना चाहा पर पति के चेहरे पर कठोरता के भाव देखकर चुपचाप…See More
Dec 16, 2015
jyotsna Kapil commented on jyotsna Kapil's blog post मुफ़्त शिविर
"आदरणीय शुभ्रांशु पांडे जी आपकी सुंदर प्रतिक्रिया ने मेरी बहुत हौसलाअफजाई की इसके लिए हृदय से आभारी हूँ आपकी।"
Dec 8, 2015
jyotsna Kapil commented on jyotsna Kapil's blog post मुफ़्त शिविर
"दिल से शुक्रिया आपका आदरणीय लक्ष्मण धामी जी।"
Dec 8, 2015
jyotsna Kapil commented on jyotsna Kapil's blog post मुफ़्त शिविर
"आदरणीय गिरिराज भंडारी जी आप जैसे गुणीजन की प्रतिक्रिया बहुत हौसला बढ़ा देती है मेरा।हृदयतल से आभार आपका।"
Dec 8, 2015
jyotsna Kapil commented on jyotsna Kapil's blog post मुफ़्त शिविर
"मेरी हौसलाअफजाई के लिए तहेदिल से शुक्रिया आदरणीय नीता दी।आपकी सुंदर टिप्पणी ने मेरा लेखन सफल कर दिया।"
Dec 8, 2015
jyotsna Kapil commented on jyotsna Kapil's blog post मुफ़्त शिविर
"आदरणीय राहिला जी आपने अपने स्नेहिल शब्दों से मेरा बहुत हौसला बढ़ा दिया।दिल से शुक्रिया मित्र।"
Dec 8, 2015
Shubhranshu Pandey commented on jyotsna Kapil's blog post मुफ़्त शिविर
"आदरणीया ज्योत्सना जी, चिकित्सा क्षेत्र में हो रही चालबाजियों  को दर्शाती एक सुन्दर कथा. इस तरह के अनेक शिविरों का आयोजन अपने छिपे हुये उद्देश्यों के लिये ही लगायी जाती है.  सादर."
Dec 6, 2015
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on jyotsna Kapil's blog post मुफ़्त शिविर
"इस सुन्दर लघुकथा के लिए हार्दिक बधाई l"
Dec 6, 2015

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on jyotsna Kapil's blog post मुफ़्त शिविर
"आदरणीया , मुफ्त शिवरों की कड़वी सच्चाई  सच मे ऐसी ही कुछ है । आपकी लघुकथा अच्छी लगी । हार्दिक बधाई"
Dec 5, 2015
Nita Kasar commented on jyotsna Kapil's blog post मुफ़्त शिविर
"पैसे के लिये मुफ़्त शिविर का कैसे फ़ायदा उठाते है ये नासमझ लोग ।समाजिक संस्थायें सरकार भी शिविर आयोजित करवाती है पर इस तरह लोग छलावे में आ जाते है कथा के ज़रिये सही प्रश्न उठाया है बधाई आपको आद०जयोत्सना जी ।"
Dec 5, 2015
Rahila commented on jyotsna Kapil's blog post मुफ़्त शिविर
"मुफ़्त का चक्कर बुरा ही होता है क्योंकि आज के जमाने में सब को फायदा चाहिये । सेवा भाव से कोई काम करने के जमाने लद गये । बहुत अच्छी रचना आदरणीया ज्योत्सना दी! बहुत बधाई आपको । सादर ।"
Dec 5, 2015

Profile Information

Gender
Female
City State
bareilly
Native Place
Agra
Profession
teacher n writer
About me
M.A,(prev.Eng.lit.),reading literature n writing poems,short stories,story,novel.listening melodious music,singing.

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सर्द साँझ ( लघुकथा )

बेचैनी उसकी आँखों से साफ नज़र आ रही थी।उधर अमन कश्मकश भरी निगाह से कभी डॉक्टर, कभी बच्चे, तो कभी अपनी पत्नी कली को देखे जा रहे थे।

सर्दी अपने शबाब पर थी।साँझ के धुंधलके में वे दोनों खरीदारी करके लौट रहे थे तो घर के आगे भीड़ देखकर रुक गए।झाड़ियों के पास नर्म, मुलायम कम्बल से लिपटा एक नवजात शिशु पड़ा हुआ था।लोग अनर्गल प्रलाप में लगे थे पर उसे किसी ने हाथ भी न लगाया था।

" चलो,न जाने किसका पाप है " अमन ने उसकी बाँह सख्ती से पकड़ते हुए कहा।कली ने कुछ कहना चाहा पर पति के चेहरे पर कठोरता के भाव… Continue

Posted on December 16, 2015 at 12:32pm — 4 Comments

मुफ़्त शिविर

बिटिया के छोटे-छोटे बच्चे,दो वक़्त की रोटी जुटाने की मशक्कत,और बेटी की जान पर मंडराता खतरा देखकर परमेसर सिहर उठा।उसने अपनी एक किडनी देकर उसके जीवन को बचाने का संकल्प कर लिया।

" तुम तो पहले ही अपनी एक किडनी निकलवा चुके हो,तो अब क्या मजाक करने आये थे यहाँ ?" डॉक्टर ने रुष्ट होकर कहा।

" जे का बोल रै हैं डागदर साब,हम भला काहे अपनी किटनी निकलवाएंगे।

ऊ तो हमार बिटिया की जान पर बन आई है।छोटे-2 लरिका हैं ऊ के सो हमन नै सोची की एक उका दे दै।"

" पर तुम्हारी तो अब एक ही किडनी है,और ये… Continue

Posted on December 4, 2015 at 2:18pm — 19 Comments

फासले

द्वार खोला तो महीनों बाद अमित को सामने पाकर वह चौंक उठी।

" आप ?"

" हाँ मैं, सोनिया को छोड़ आया हूँ। अब तुम्हारी कीमत का अहसास हो गया है मुझे ,सॉरी मेघा, अब घर लौट आया हूँ, प्लीज़ माफ़ कर दो मुझे "

" बेशक कर दूँगी ,पर एक बात का ईमानदारी से जवाब दीजिये ,अगर मैं आपको छोड़कर किसी और के पास चली गई होती,तो क्या मुझे सहर्ष स्वीकार कर लेते ? "

उसने असमंजस में मेघा की ओर देखा फिर दृष्टि झुकाते हुए बोला

" नहीं "

वेदना व हिकारत के मिले जुले भाव से पति के झुके हुए चेहरे को उसने… Continue

Posted on December 1, 2015 at 12:43pm — 12 Comments

विडम्बना ( लघुकथा )

बाल श्रम उन्मूलन सप्ताह की कवरेज करके सहकर्मी राकेश के संग लौट रहा सुमित उमंग और जोश से लबरेज़ था।

" सरकार के इस कदम की जितनी प्रशंसा की जाए कम है । कम से कम भोले भाले मासूमों का बचपन तो न छीन पाएगा कोई अब। "

एक झोपड़ पट्टी के पास से गुज़रते हुए जमा भीड़ और एक फटेहाल स्त्री का उच्च स्वर में रुदन सुनकर वह रुक गया

" आग लग जावे इस सरकार को,

अच्छा भला मेरा मुन्ना काम करके चार पैसा कमा लेवे था।पन सज़ा के डर से काउ ने बाए काम पर न रखो।का करता बेचारा ?पेट की आग बुझावे की खातिर चोरी कर… Continue

Posted on November 3, 2015 at 7:25pm — 8 Comments

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