For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

विनोद खनगवाल
  • Male
  • गोहाना, हरियाणा
  • India
Share

विनोद खनगवाल's Friends

  • RENU BHARTI
  • jyotsna Kapil
  • डिम्पल गौड़
  • Hari Prakash Dubey
  • somesh kumar
  • योगराज प्रभाकर
 

विनोद खनगवाल's Page

Profile Information

Gender
Male
City State
हरियाणा
Native Place
Goh
Profession
business

विनोद खनगवाल's Blog

नाम (लघुकथा)

 नेहा सुबह से उदास थी। शादी के पाँच साल होने को आए थे, पर उसकी गोद अब तक सूनी थी। उसकी और उसके पति की मेडीकल जाँच हो चुकी थी। सब ठीक था। फिर भी बात बन नहीं रही थी। बस सास इसी बात को लेकर अपने बेटे पर लगातार दबाव डाल रही थी कि वह उसे तलाक क्यों नहीं दे देता।

माँ की बातों में आकर आज सुबह ही अभिषेक तलाक के कागजात बनवाने वकील के पास चला गया था। भविष्य की चिंता को लेकर नेहा की आँखों में आँसू छलक आए थे। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करे। उसे लग रहा था कि हो सकता है अभिषेक का गुस्सा ठंडा…

Continue

Posted on October 23, 2016 at 10:37am — 7 Comments

पहल (लघुकथा)

निशा अपने सात साल के बेटे के साथ दिवाली की खरीदारी करके घर वापिस आ रही थी। रस्ते में कुछ बच्चे पटाखे जला रहे थे। सारे वातावरण में बारूद की गंध और धुँआ फैला हुआ था। अचानक उसके बेटे को तेज खाँसी शुरू हो गई और इतनी बढ़ गई कि वह बेहोश हो गया। लोगों ने मदद करके उनको जल्दी से हस्पताल पहुँचाया। थोड़ी देर बाद वह सामान्‍य हो गया।

"डॉक्टर साहब, मेरे बेटे को क्या हुआ था? चिंता की बात तो नहीं है ना?"- निशा ने घबराते हुए पूछा।

"हाँ, यह अब ठीक है, लेकिन चिंता की बात तो है। इसे साँस…

Continue

Posted on October 18, 2016 at 10:43am — 3 Comments

नशा (लघुकथा)

"सुमन, गुरु जी के आशीर्वाद से तुम्हारा घर तो स्वर्ग बन गया है। अब गालियों की नहीं बल्कि सतसंग के भजनों की आवाजें आती रहती हैं।"
"हाँ बहन! सही कह रही हो" - सुमन ने सहमति जताते हुए कहा।- 'अब हकीकत भी कैसे बताए कि पहले पति की कमाई ठेके पर जाती थी और अब आश्रम में.....।'

मौलिक और अप्रकाशित

Posted on July 20, 2015 at 4:07pm — 8 Comments

फैसला (लघुकथा)

"हैलो रवि, घरवालों ने मेरी शादी तय कर दी है। प्लीज मुझे यहाँ से निकल ले चलो। मैं मंगलसूत्र पहनूंगी तो तुम्हारे हाथों से वरना अपनी जान दे दूंगी।"

"सुजाता, पागल मत बनो। यही तो बढिया मौका है अपने पास....."

"क्या मतलब?"

"अरे, हम अपनी जिंदगी की शुरुआत करेंगे लेकिन तुम्हारी शादी के बाद। तुम दोनों तरफ का माल समेट लेना। शादी के अगले दिन जब तुम मिलनी पर आओगी। मैं तुम्हें अपने साथ ले जाऊँगा। फिर दोनों मिलकर ऐश करेंगे ऐश।"

प्यार में पागल हुई सुजाता ने पूरी प्लानिंग के साथ काम…

Continue

Posted on July 18, 2015 at 2:32pm — 4 Comments

Comment Wall (2 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 10:03pm on October 20, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 8:19pm on April 30, 2015, shashi bansal goyal said…
हार्दिक आभार आदरणीय विनोद खंडेलवाल जी जो आपने मेरी रचना पर अमूल्य समय दिया । सादर ।
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Rupam kumar -'मीत' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"आदणीय नाथ सोनांचली साहिब प्रणाम, बहुत अच्छी कोशिश दिखाई देती है आपकी ग़ज़ल में और कुछ शे'र नए…"
14 minutes ago
Rupam kumar -'मीत' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"आदरणीय आज़ी साहब बहुत ही उम्दा ग़ज़ल कही आपने। बहुत बधाई आपको इस ग़ज़ल के लिए। बे-क़रारी में कभी भी जाँ…"
19 minutes ago
Rupam kumar -'मीत' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"आदरणीय नीलेश जी नमस्कार  बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है, वाह!! आज फिर मुझको शब-ए-हिज्र दुआएं…"
23 minutes ago
Chetan Prakash posted blog posts
1 hour ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"गिरहः बारहा हम से ही सौगात दिखाई न गई क्या हुआ उनसे अगर बात बनाई न गई"
1 hour ago
नाथ सोनांचली replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"सौ जतन कर लिये हमने ये बुराई न गईआप और मैं की ज़माने से लड़ाई न गई तिफ़्ल महरूम रहेंगे सदा सच्चाई…"
1 hour ago
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"इस हौसला अफ़ज़ाई के लिये दिल से शुक्रिया आदरणीय निलेश जी"
1 hour ago
निलेश बरई (नवाज़िश) shared a profile on Facebook
1 hour ago
Aazi Tamaam joined Admin's group
Thumbnail

भोजपुरी साहित्य

Open Books Online परिवार के सब सदस्य लोगन से निहोरा बा कि भोजपुरी साहित्य और भोजपुरी से जुड़ल बात…See More
1 hour ago
Aazi Tamaam replied to Saurabh Pandey's discussion गजल (भोजपुरी) // -सौरभ in the group भोजपुरी साहित्य
"सादर प्रणाम आदरणीय जनाब सोरभ पांडेय जी बेहद खूबसूरत ग़ज़ल है ऊपर से भोजपुरी भाषा का तड़का मज़ा आ…"
1 hour ago
निलेश बरई (नवाज़िश) updated their profile
1 hour ago
निलेश बरई (नवाज़िश) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"आदरणीय आज़ी साहब बहुत ही उम्दा ग़ज़ल कही आपने। बहुत बधाई आपको इस ग़ज़ल के लिए।"
1 hour ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service