दोहा पंचक. . . . . दिल
रात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन ।
फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन ।।
उल्फत की दहलीज पर, दिल बैठा हैरान ।
सोच रहा वह इश्क में, क्या पाया नादान ।।
आँसू आहें हिचकियाँ, उल्फत के ईनाम ।
नींदों से ली दुश्मनी, और हुए बदनाम ।।
ख्वाबों सा हर पल लगे, उन बांहों में यार ।
जिस्मानी जन्नत मिली, दिल को मिला करार ।।
कैसी ख्वाहिश कर रहा , पागल दिल नादान ।
आसमान सम चाँद पर, खो बैठा ईमान ।।
सुशील…
ContinueAdded by Sushil Sarna on February 4, 2026 at 8:30pm — No Comments
दोहा सप्तक. . . . नैन
नैन द्वन्द्व में नैन ही, गए नैन से हार ।
नैनों को मीठी लगे, नैनों से तकरार ।।
नैनों की तकरार है, बड़ा अजब आनन्द ।
हृदय पृष्ठ पर प्रेम के, अंकित होते छन्द ।।
नैनों के संवाद की, होती मोहक नाद ।
नैन सुने बस नैन के, अनबोले संवाद ।।
नैनों की होती सदा, मौन सुरों में बात ।
नैनों की मनुहार में, बीते सारी रात ।।
बड़ा मनोरम नैन का, होता है संसार ।
नैनों के इसरार को, नैन करें स्वीकार ।।
नैन उदधि में प्रेम का, जब…
ContinueAdded by Sushil Sarna on February 3, 2026 at 8:02pm — No Comments
दोहा पंचक. . . . रिश्ते
मिलते हैं ऐसे गले , जैसे हों मजबूर ।
निभा रहे संबंध सब , जैसे हो दस्तूर ।।
लगने को ऐसा लगे, जैसे सब हों साथ ।
वक्त पड़े तो छोड़ दे, खून, खून का हाथ ।।
पहले जैसे अब कहाँ, जीवन में संबंध ।
आती है अपनत्व में , स्वार्थ भाव की गंध ।।
वाणी कर्कश हो गई, भूले करना मान ।
संबंधों को लीलती , धन की झूठी शान ।।
रिश्तों में माधुर्य का, वक्त गया है बीत ।
अब तो बस पहचान की ,निभा रहे हैं रीत ।।
सुशील…
ContinueAdded by Sushil Sarna on February 1, 2026 at 4:00pm — 2 Comments
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