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Featured Blog Posts – April 2016 Archive (3)

भगौड़े (लघुकथा) राहिला

मरणोपरांत मृतक युवक के कर्मो का हिसाब किताब करने की कार्यवाही शुरू हो चुकी थी। दूसरी दुनिया का दरोगा लेखा-जोखा देखने वाले से पूछताछ कर रहा था ।

"इस लड़के की उम्र विधाता ने कम लिखी थी क्या? "

"नहीं दरोगा साहब! उम्र तो खूब लिखी थी। लेकिन इसने खुदकुशी कर ली ।"

"क्यूं? "

"इसका इम्तेहान चल रहा था, पर ये बीच में ही भाग निकला। "

"क्यूं क्या इसने जीने की कला नहीं सीखी? "

"नहीं, ये सतयुग के प्राणी नहीं, कलयुग की खुदपरस्त पीढ़ी है।ना सब्र,ना मर्यादा, ना अनुशासन और ना…

Continue

Added by Rahila on April 25, 2016 at 7:30pm — 49 Comments


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वो जो तेरे काम का होता नहीं- ग़ज़ल

2122 2122 212

वो जो तेरे काम का होता नहीं

उससे तेरा वास्ता होता नहीं



राह कोई गर मिली होती मुझे

अपने अंदर गुम हुआ होता नहीं



अपने लोगों में रहा होता जो मै

तो सरे महफ़िल लुटा होता नहीं



लग रहा है हादसों को देखकर

यूँ ही कोई हादसा होता नहीं



खुद पे काबू रखना मुझको आ गया

रात भर अब ‘जागना’ होता नहीं



चन्द शर्तों से बँधा है आदमी

अब कोई दिल से जुड़ा होता नहीं



वो सफ़र है ज़िन्दगी जिसमें ‘शकूर’

वापसी का… Continue

Added by शिज्जु "शकूर" on April 19, 2016 at 9:36am — 5 Comments

ग़ज़ल -- "मैं ग़ज़ल की पलकें सँवार लूँ" बशीर साहब की ज़मीन में एक कोशिश। ( दिनेश कुमार )

11212--11212--11212--11212



लो गुनाह और सवाब की, मैं ये रहगुज़ार बुहार लूँ

या तो खुद को कर लूँ तबाह मैं , या हयात अपनी सँवार लूँ



तू हर एक शै में समाया है...के वो ज़र्रा हो या हो आफ़ताब

मेरी बन्दगी है यही ख़ुदा, के मैं खुद में तुझ को निहार लूँ



मुझे माँगने में हिचक नहीं, न वो नाम का ही रहीम है

जो लिखा न मेरे नसीब में.. उसे मैं ख़ुदा से उधार लूँ



मेरी साँस साँस तड़फ रही, तेरी इक नज़र को मिरे ख़ुदा

मुझे अपने पास बुला या फिर,मैं तुझे… Continue

Added by दिनेश कुमार on April 17, 2016 at 8:52am — 6 Comments

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