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Pooja Singh's Blog – September 2010 Archive (6)

दहेज दानव

दहेज का दानव बहुत बड़ा है

मुँह विकराल किये खड़ा है ,

कितना भी रोको नही रुकता यह,

रक्तबीज जैसा अपना आकार किया,

पिताओं की पगड़ी इसने उछाली है,

बेटियों के अरमानो को तार तार किया,

कई बेटियों को इस दानव ने जला दिया,

ताने सुन सुन कर जीना हुआ मुहाल,

जो बेटी दहेज न लेकर आई ससुराल,

उस बेटी का क्या था कसूर,

मारकर घर से उसे निकाल दिया,

कैसी परंपरा जो है सब मजबूर,

देश के युवा अब करो कुछ तुम्ही उपाय,

दहेज दानव जल्द से जल्द मारा… Continue

Added by Pooja Singh on September 26, 2010 at 8:30am — 4 Comments

उम्रे तमाम

उम्रे तमाम गुजारी तो क्या किया

इस जीवन से तूने क्या लिया |

इस जीवन को तूने क्या दिया

उम्रे तमाम गुजारी तो क्या किया |

ता उम्र तू रहा इस कदर बेखबर

रही न तुझे अपनी जमीर की खबर |

करता रहा तू मनमानी अपनी

रही न तुझे वक्त की खबर

उम्रे तमाम गुजारी तो क्या किया |

करता रहा तू मेरा - मेरा

नही है , यहा कुछ तेरा - मेरा |

उम्रे तमाम गुजारी तो क्या किया

मनुष्य जन्म तुझे है , किसलिए मिला

इस जन्म को किया क्या सार्थक तूने |

उम्रे तमाम गुजारी… Continue

Added by Pooja Singh on September 21, 2010 at 9:35am — 2 Comments

कलयुगी मानव

देखो,
यह कलयुगी मानव,
कैसा है ?
यह कलयुगी मानव !
जिसका जीवन यंत्रो जैसा,
आखो में लालच है,
लालच इसकी न चेहरे पर भाव !
झूठ इसकी है बुनियाद !
बईमानी इसकी है आदत !
धोखा इसका है स्वभाव !
हर पल में इसका अभिनय बनता,
बातो में इसके छलावा पन !
हर पल में नया चरित्र है बनता !
देख कर अवसर वार यह करता !
रहता हरदम चोक्न्ना देखो,
यह कलियुगी मानव !
कैसा है ?
यह कलयुगी मानव !!

Added by Pooja Singh on September 18, 2010 at 1:00pm — 1 Comment

मानवाधिकार

मानवाधिकार का क्या मतलब है ! मानवाधिकार दो शब्दों से मिलकर बना है, मानव + अधिकार अर्थात मानव से सम्बन्धित अधिकार ! मानवाधिकार के अन्तर्गत वे सब अधिकार मानव को प्राप्त है , जिसका वह स्वतंत्र रूप से अधिकारी है ! आज के इस बदलते परिवेश में जहा मानव मूल्यों का हास हो रहा है ! वहा मानवाधिकारों का हनन होता जा रहा है ! चाहे वह सरकार के प्रशासन में जेल में कैदियों के साथ व्यवहार हो , समाज में फैली अनैतिकता , या फिर घरेलू हिंसा हो हर जगह पर मनुष्य के अधिकारों का हनन हो रहा है ! आज भारत के आजादी के ६ दशक… Continue

Added by Pooja Singh on September 17, 2010 at 1:58pm — 2 Comments

जिन्दगी

फूलो की बहार है जिन्दगी,

काटो भरी सफर है जिन्दगी,

है जिन्दगी पर एक मकाम है यह जिन्दगी !

ये जिन्दगी एक अनकही पहेली है ,

जो समझ के भी समझ में न आये ,

ये जिन्दगी है, अनकही जिन्दगी !!

यह जिन्दगी है ,

सुबह से शाम है,

यह जिन्दगी हर एक नई सुबह है ,

यह जिन्दगी !



जिन्दगी जीने का नाम है ,

जीने की चाहत है ,

जिन्दगी हर दिन एक नया पैगाम है,

यह जिन्दगी !

इस जिन्दगी के सफर में,

जो पीछे छुट गया वह नही मिलता है ,

जो मिलता है,… Continue

Added by Pooja Singh on September 16, 2010 at 11:00am — 3 Comments

हिन्दी दिवस

आज हिन्दी दिवस है . लेकिन क्या हम सही मायने में हिन्दी को वो सम्मान दे पा रहे है जो चाहिये, आज हिन्दी केवल कहने मात्र की राष्ट्र भाषा रह गई है | आज के युग में जहाँ हर तरफ पश्चिमी सभ्यता का चलन है इसलिये हमे हिन्दी का अस्तित्व बचाने के लिए बहुत प्रयास करना होगा तभी हिन्दी की गरिमा बच सकेगी और हिन्दी सही मायने में भारत की राष्ट्र भाषा बन सकेगी |
जय हिंद |

Added by Pooja Singh on September 14, 2010 at 5:30pm — 2 Comments

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