दोहा पंचक. . . रोटी
सूझ-बूझ ईमान सब, कहने की है बात ।
क्षुधित उदर के सामने , फीके सब जज्बात ।।
मुफलिस को हरदम लगे, लम्बी भूखी रात ।
रोटी हो जो सामने, लगता मधुर प्रभात ।।
जब तक तन में साँस है, चले क्षुधा से जंग ।
बिन रोटी फीके लगें, जीवन के सब रंग ।।
मान-प्रतिष्ठा से बड़ी, उदर क्षुधा की बात ।
रोटी के मोहताज हैं, जीवन के हालात ।।
स्वप्न देखता रात -दिन, रोटी के ही दीन ।
इसी जुगत में दीन यह , हरदम रहता लीन…
Added by Sushil Sarna on December 25, 2024 at 2:37pm — 2 Comments
दोहा पंचक. . .
बाण न आये लौट कर, लौटें कभी न प्राण ।
काल गर्भ में है छुपा, साँसों का निर्वाण ।।
नफरत पीड़ा दायिनी, बैर भाव का मूल ।
जीना चाहो चैन से, नष्ट करो यह शूल ।।
आभासी संसार में, दौलत बड़ी महान ।
हर कीमत पर बेचता , बन्दा अब ईमान ।।
अन्तर्घट के तीर पर, सुख - दुख करते वास ।
सूक्ष्म सत्य है देह में, वाह्य जगत आभास ।।
जीवन मे होता नहीं, जीव कभी संतुष्ट ।
सब कुछ पा कर भी सदा, रहे ईश से रुष्ट ।।
सुशील सरना /…
ContinueAdded by Sushil Sarna on December 23, 2024 at 2:42pm — 2 Comments
दोहा पंचक. . . व्यवहार
हमदर्दी तो आजकल, भूल गया इंसान ।
शून्य भाव के खोल में, सिमटा है नादान ।।
मुँह बोली संवेदना, मुँह बोला व्यवहार ।
मुँह बोले संसार में, मुँह बोला है प्यार ।।
भूले से तकरार में, करो न ऐसी बात ।
जीवन भर देती रहे, वही बात आघात ।।
अन्तस में कुछ और है, बाहर है कुछ और ।
उलझन में यह जिंदगी, कहाँ सत्य का ठौर ।।
दो मुख का यह आदमी, क्या इसका विश्वास ।
इसके अंतर में सदा, छल करता है वास ।।
सुशील सरना /…
ContinueAdded by Sushil Sarna on December 21, 2024 at 3:36pm — No Comments
दोहा पंचक. . . . दिन चार
निर्भय होकर कीजिए, करना है जो काम ।
ध्यान रहे उद्वेग में, भूल न जाऐं राम ।।
कितना अच्छा हो अगर, मिटे हृदय से बैर ।
माँगें अपने इष्ट से, सकल जगत् की खैर ।।
सच्चे का संसार में, होता नहीं अनिष्ट ।
रहता उसके साथ में, उसका अपना इष्ट ।।
पर धन विष की बेल है, रहना इससे दूर ।
इसकी चाहत के सदा, घाव बनें नासूर ।
चादर के अनुरूप ही, अपने पाँव पसार ।
वरना फिर संघर्ष में, बीतेंगे दिन चार ।।
सुशील सरना…
ContinueAdded by Sushil Sarna on December 20, 2024 at 3:49pm — 2 Comments
दोहा पंचक. . . शीत शृंगार
नैनों की मनुहार को, नैन करें स्वीकार ।
प्रणय निवेदन शीत में, कौन करे इंकार ।।
मीत करे जब प्रीति की, आँखों से वो बात ।
जिसमें बीते डूबकर, आलिंगन में रात ।।
अभिसारों में व्याप्त है, मदन भाव का ज्वार ।
इस्पर्शों के दौर में, बिखरा हरसिंगार ।।
बढ़े शीत में प्रीति की, अलबेली सी प्यास ।
साँसें करती मौन में, फिर साँसों से रास ।।
अंग-अंग में शीत से, सुलगे प्रेम अलाव ।
प्रेम क्षुधा के वेग में, बढ़ते गए कसाव…
Added by Sushil Sarna on December 18, 2024 at 8:19pm — 2 Comments
दोहा पंचक. . . . यथार्थ
मन मंथन करता रहा, पाया नहीं जवाब ।
दाता तूने सृष्टि की, कैसी लिखी किताब।।
आदि - अन्त की जगत पर, सुख - दुख करते रास ।
मिटने तक मिटती नहीं, भौतिक सुख की प्यास ।।
जीवन जल का बुलबुला, पल भर में मिट जाय ।
इससे बचने का नहीं, मिलता कभी उपाय ।।
साँसों के अस्तित्व का, सुलझा नहीं सवाल ।
दस्तक दे आता नहीं, क्रूर नियति का काल ।।
साम दाम दण्ड भेद सब, कितने करो प्रपंच ।
निश्चित तुमको छोड़ना, होगा जग का मंच…
Added by Sushil Sarna on December 10, 2024 at 1:39pm — 4 Comments
कुंडलिया. . . .
बच्चे अन्तर्जाल पर , भटक रहे हैं आज ।
दुर्व्यसन में भूलते, जीवन की परवाज ।
जीवन की परवाज , लक्ष्य यह भूले अपना ।
बिना कर्म यह अर्थ , प्राप्ति का देखें सपना ।
जीवन से अंजान, उम्र से हैं यह कच्चे ।
आज नशे में चूर , भटकते देखे बच्चे ।
सुशील सरना / 8-12-24
मौलिक एवं अप्रकाशित
Added by Sushil Sarna on December 8, 2024 at 8:00pm — 2 Comments
दोहा पंचक. . . कागज
कागज के तो फूल सब, होते हैं निर्गंध ।
तितली को भाते नहीं, गंधहीन यह बंध ।।
कितनी बेबस लग रही, कागज की यह नाव ।
कैसे हो तूफान में,साहिल पर ठहराव ।।
कागज की कश्ती चली, लेकर कुछ अरमान ।
रेजा - रेजा कर गया , स्वप्न सभी तूफान ।।
कैसी भी हो डूबती, कागज वाली नाव ।
हृदय विदारक दृश्य से, नैनों से हो स्राव ।
कागज पर लिख डालिए, चाहे जितने भाव ।
कागज कभी न भीगता, कितने ही हों घाव ।।
सुशील सरना /…
ContinueAdded by Sushil Sarna on December 3, 2024 at 8:57pm — 4 Comments
कुंडलिया. . . .
मीरा को गिरधर मिले, मिले रमा को श्याम ।
संग सूर को ले चले, माधव अपने धाम ।
माधव अपने धाम , भक्ति की अद्भुत माया ।
हर मुश्किल में साथ, श्याम की चलती छाया ।
भजें हरी का नाम , साथ में बजे मँजीरा ।
भक्ति भाव में डूब, रास फिर करती मीरा ।
सुशील सरना / 1-12-24
मौलिक एवं अप्रकाशित
Added by Sushil Sarna on December 1, 2024 at 9:10pm — 4 Comments
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