For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आँखों के सावन में ......

आँखों के सावन में ......

ओ ! निर्दयी घन
जाने कितनी
अक्षत स्मृतियों को
अपनी बूँदों में समेटे
तुम फिर चले आये
मेरे हृदय के उपवन में
शूल बनकर

क्यों
मेरे घावों की देहरी को
अपनी बूँदों की आहटों से
मरहम लगाने का प्रयास करते हो

बहुत रिस्ते हैं
ये
जब -जब बरसात होती है
बहुत याद आते हैं
मेरे भीगे बदन से
बातें करते
उसके वो मौन स्पर्श

वो छत की मुंडेर से
उसकी आँखों का
बरसात में भीगते हुए
मेरा पीछा करना

उफ्फ
कितना अंगार भरा था वो लम्हा
जब उसने बरसात में
मेरी जुल्फों से गिरी बूँद को
अपनी हथेली में समेटा था
मेरी ठोड़ी पर रुकी बूँद को
अपनी उंगली की पोर पर लपेटा था
बेशर्म ने
बड़ी निर्लज्जता से
मेरे लबों को छेड़ा था

वो पेड़
वो लैंप पोस्ट
वो भीगते हुए लम्हों में
चाय की चुसकियाँ
आज भी
उन भीगते हुए तन्हा लम्हों में
बादलों के बिस्तर पर
हसीन स्मृतियाँ
अंगड़ाईयाँ लेती हैं

ओ! निष्ठुर बादल
जा लौट जा
वहीं उस खारे सागर के पास
और डुबो दे इन यादों को
कहीं गहरे सागर में
फिर भी अगर तू आता है
तो आ
मगर
उन यादों को अपनी बूँदों में
समेट कर मत ला
वरना
मेरी आँखों के सावन से
तू शर्मिंदा हो जाएगा
तेरी लाखों बूँदों पर
मेरी एक बूँद
भारी हो जाएगी
मेरी आँखों के सावन में
तेरा सावन डूब जाएगा 

तेरा सावन
डू........ ब .... जा...... ए....... गा

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 597

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sushil Sarna on August 11, 2020 at 6:03pm

आदरणीय    लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार। आदरणीय कम्प्यूटर ठीक न होने के कारण प्रत्युतर में विलम्ब हुआ, दिल से क्षमा चाहूँगा।

Comment by Sushil Sarna on August 11, 2020 at 6:02pm

आदरणीय    अमीरुद्दीन 'अमीर' जी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार। आदरणीय कम्प्यूटर ठीक न होने के कारण प्रत्युतर में विलम्ब हुआ, दिल से क्षमा चाहूँगा।

Comment by Sushil Sarna on August 11, 2020 at 6:02pm

आदरणीय   Samar kabeerजी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार। आदरणीय कम्प्यूटर ठीक न होने के कारण प्रत्युतर में विलम्ब हुआ, दिल से क्षमा चाहूँगा।

Comment by Sushil Sarna on August 11, 2020 at 6:01pm

आदरणीय  सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार। आदरणीय कम्प्यूटर ठीक न होने के कारण प्रत्युतर में विलम्ब हुआ, दिल से क्षमा चाहूँगा।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 3, 2020 at 5:32am

आ. भाई सुशील जी सादर अभिवादन। इस भावपूर्ण रचना पर हार्दिक बधाई ।

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on July 1, 2020 at 4:28pm

आदरणीय सुशील सरना जी, आदाब।

अहसास को लफ़्ज़ों में पिरो कर इस लाजवाब रचना के सृजन के लिए बहुत बहुत दाद और मुबारकबाद पेश करता हूँ। सादर।

Comment by Samar kabeer on June 28, 2020 at 4:47pm

जनाब सुशील सरना जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें l

Comment by नाथ सोनांचली on June 28, 2020 at 3:23pm

आद0 सुशील सरना जी सादर अभिवादन। हर बार की तरह एक भावपूर्ण रचना पर बधाई स्वीकार कीजिये। सादर

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"ग़ज़ल   बह्र ए मीर लगता था दिन रात सुनेगा सब के दिल की बात सुनेगा अपने जैसा लगता था…"
7 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'

बदला ही राजनीति के अब है स्वभाव में आये कमी कहाँ  से  कहो  फिर दुराव में।१। * अवसर समानता का कहे…See More
7 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
" दोहा मुक्तक :  हिम्मत यदि करके कहूँ, उनसे दिल की बात  कि आज चौदह फरवरी, करो प्यार…"
8 hours ago
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"दोहा एकादश. . . . . दिल दिल से दिल की कीजिये, दिल वाली वो बात । बीत न जाए व्यर्थ के, संवादों में…"
11 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"गजल*****करता है कौन दिल से भला दिल की बात अबबनती कहाँ है दिल की दवा दिल की बात अब।१।*इक दौर वो…"
19 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"सादर अभिवादन।"
19 hours ago
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"स्वागतम"
yesterday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"  आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद' जी सादर नमस्कार, रास्तो पर तीरगी...ये वही रास्ते हैं जिन…"
yesterday
Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
Tuesday
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183

आदरणीय साहित्य प्रेमियो, जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
Tuesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। संयोग शृंगार पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Tuesday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार

 अभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही मधुगंध ।। प्रेम लोक की कल्पना,…See More
Feb 8

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service