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Rajeev Kumar Pandey's Blog (8)

आशिकों को इस कदर दिलदार होना चाहिए

 

 

दिल  लगाना   हमने  सुना   है , एक गुनाह  है  यहाँ  

 सारी  दुनिया  को  फिर तो  गुनाहगार  होना  चाहिए ..

 

 

सुना  है , मजा    है बहुत , महबूब  के  इन्तजार  में  …

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Added by Rajeev Kumar Pandey on October 1, 2011 at 12:33am — 5 Comments

सरदार भगत सिंह के आत्मा की आवाज

सरदार भगत सिंह के आत्मा की आवाज



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एक दिन कलम ने आके चुपके से मुझसे ये राज खोला ,



कि रात को भगत सिंह ने सपने में  आकर उससे  बोला,







कहाँ  गया वो  मेरा इन्कलाब कहाँ गया वो  बसंती… Continue

Added by Rajeev Kumar Pandey on May 27, 2011 at 3:30am — No Comments

अजायब घर में रखा हुआ इन्सान

जब गुजर कर सफ़र से थक जाता हूँ मै

तब तब उस गाँव के पुराने घर जाता हूँ  मै ,



गाँव के आम के  बगीचे में जितना हम तोड़ कर फेंक दिया करते थे

उससे  बहुत कम  इस शहर  में पैसे के बराबर   तौल कर के लाता हूँ में  ..



जब भी मिलता हूँ इस  शहर में… Continue

Added by Rajeev Kumar Pandey on May 23, 2011 at 9:51am — No Comments

कल का आज कैसा होगा ?

 

कल का आज कैसा होगा ,

किसी के  सपनो के ताजमहल नही ,

खंडहर जैसा होगा ,

दीवारें खड़ी बेजान सी ,

जाने पहचाने अनजान सी,

उठने से पहले ,

दबने वाले तूफान सी ,

खड़ी होगी अपने जर्जर नीव पर ,

अपने सत्य को मिथ्या बताते ,

जिन्हें देख कर उठेगा प्रश्न ,

कल का आज कैसा होगा,

इस खँडहर नही,

किसी के…

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Added by Rajeev Kumar Pandey on April 13, 2011 at 12:30pm — 2 Comments

बदल गया है आदमी





आज लगता है शायद बदल गया है आदमी ,

अपनी लगाई आग में ही जल गया है आदमी,



कल जिस चीज  की ओर नजर  भी नही फेरता था,

आज  उसी के लिए  ही क्यूँ मचल गया है आदमी  ,



कल तक था जो पत्थरों  की तरह  अडिग ,…

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Added by Rajeev Kumar Pandey on April 13, 2011 at 12:00pm — 2 Comments

देख गमों को मेरे वे मुस्कुराते बहुत हैं,





उनके गमले में खुशबू हैं बिखरे हुए ,

मेरे दामन हैं  काँटों से निखरे हुए ,

वो  मखमल की सेजों पे भी रोते हैं,

चेहरे धूल में हमारे रहते हैं निखरे हुए,



देख गमों को मेरे वे मुस्कुराते बहुत हैं,…

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Added by Rajeev Kumar Pandey on April 12, 2011 at 11:30pm — 1 Comment

मै नारी हूँ

मै नारी हूँ

अक्सर मै इसी सोच में खो जाती हूँ

क्या मुझे वो अधिकार मिला है ?

मै जिसकी अधिकारी हूँ ?

मै नारी हूँ



मनु कि  अर्धांगिनी मै

विष्णु- शिव कि संगिनी मै

मै अक्सर सोचा करती हूँ…

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Added by Rajeev Kumar Pandey on April 12, 2011 at 9:30pm — 6 Comments

मै मरघट में जब जाता हूँ .

 

मै   मरघट  में  जब  जाता  हूँ  ,

 मै  मर-घट  में  मर  जाता  हूँ  ,

 जब  मर  और  घट  न  घट  पाए..

  तो  खुद  ही  मै  घट  जाता  हूँ .//

 

मै  मरघट   को  समझाता  हूँ ,

 कि  …

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Added by Rajeev Kumar Pandey on April 7, 2011 at 10:39am — 1 Comment

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