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Priyanka Pandey's Blog (4)

बस तुम ही थे

पलकों के महके उपवन में

गीतों के सारे सरगम में

हर उलझन में हर सुलझन में

कोई और नहीं तुम ही थे



कुछ बंद किताबों के पन्ने

फिर फिर से जैसे खुल जाए

आखर आखर बन सरगम ज्यो

प्राणों में आकर घुल जाए

नयनो की मोहक चितवन में

कोई और नहीं तुम ही थे



महकी महकी सी साँसों में

तेरी मोहक खुशबू बस जाए

हरपल पलछिन रात और दिन

यादे तेरी सज सज जाएँ

सपनो के खिलते गुलशन में

कोई और नहीं तुम ही थे



श्वाँस श्वाँस मधुरिम स्पंदन… Continue

Added by Priyanka Pandey on September 17, 2014 at 7:29am — 11 Comments

बहुत गहरा गए हैं अंधेरे हर सू

बहुत गहरा गए हैं अंधेरे हर सू

रोशनी की किरन अब कहां खोजें

 

गुम हो गई है कहां दुनिया में

आओ मिल के हम वफा खोजें

 

खतावार जब कि थे हम दोनों ही

क्यूं न इक जैसी ही सजा खोजें

 

जीत जाएं न कहीं दूरियां हमसे

आओ मिल के अपनी खता खोजें

 

नफरतों के वास्ते न जगह बाकी हो

पूरे जहान में एसा कोई पता खोजें

-----प्रियंका

 

"मौलिक व अप्रकाशित" 

Added by Priyanka Pandey on August 12, 2014 at 11:00pm — 4 Comments

सूरज

सूरज............
रोज निकल पडता है चहलकदमी करते
ठिठकता है कुछ देर मेरे शहर में भी
फिर चल देता है
कांधे पर कुछ यादों की गठरी लादे
देखता है मुड कर किसी शाख के पीछे से
कुछ और भी गुमसुम हो जाते हैं
दरख्तों के घने लंबे साए
पर यादें...............
जाने कहां कहां से फिर लौट कर आ जाती हैं
जिन्हें रोज ही सूखे पत्तों के साथ
समेट कर फेंक देती हूं
---------प्रियंका

"मौलिक व अप्रकाशित"

Added by Priyanka Pandey on August 8, 2014 at 2:00pm — 5 Comments

जब बूंदें रिमझिम गिरती हैं

जब बूंदें रिमझिम गिरती हैं

कुछ स्वरलहरियां सी बुनती हैं

हरियाली के इस मौसम में भी

बस फीका सा रह जाता है मन

भीगा भीगा सा ये मौसम.....

भीगी सी वादी और समां

प्यासी धरती हो दृवित चले

पर प्यासा सा रह जाता है मन

रिमझिम बारिश में घंटों रहना

राहों में बस यूं ही संग संग चलना

तेरी उन सारी बातों को

फिर फिर से दोहराता है मन.

मन तुमसे मिलने को तरसे

बूंदों संग आंखें कितना बरसें

इन दोनों की इस बारिश मे

बस रीता सा रह जाता है…

Continue

Added by Priyanka Pandey on August 8, 2014 at 2:00pm — 7 Comments

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