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SudhenduOjha's Blog (25)

पुष्प श्रद्धा के ना चढ़ें तो अर्चना ही व्यर्थ है।

पुष्प श्रद्धा के ना चढ़ें तो अर्चना ही व्यर्थ है।

भाव जिसमें शुचित ना हो, सर्जना ही व्यर्थ है।।

तुम न कोलाहल सुनो,

ना ही करतल ध्वनि बिको।

सत्य के आधार पर

सुंदरम बन कर टिको।।

दृष्टिहीनों के समक्ष, अति नर्तना ही व्यर्थ है।

पुष्प श्रद्धा के ना चढ़ें तो अर्चना ही व्यर्थ है।।

भाव जिसमें शुचित ना हो, सर्जना ही व्यर्थ है।।

मेनका की कामना

और उसीकी उपासना।

व्यर्थ शालिग्रामों में है

फिर सत्य को…

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Added by SudhenduOjha on September 10, 2018 at 11:00am — No Comments

रात का सुन-सान पल मैं, निर्वसन हूँ प्यार कर।

रात का सुन-सान पल मैं, निर्वसन हूँ प्यार कर।
सिंधु तट की रेत मैं, प्रिय है मेरा उच्छृंखल लहर।।
यामिनी कह चंद्रिका से, 
मधु पात्र को वो ढाल दे।
आज श्लथ भू पर गिरूं, 
कुछ इस तरह का गात्र दे।।
चांदनी की शीतल छुवन
हो प्रेम पगता वक्ष पर
रात का सुन-सान पल मैं,…
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Added by SudhenduOjha on September 4, 2018 at 5:00pm — 1 Comment

चाहता मैं नहीं था गीत गाना कोई भी।

यूँ ही..........

चाहता मैं नहीं था गीत गाना कोई भी।

तुमने मेरे अधर पर क्यों शब्द लाकर रख दिये।।

**************************************

चाहता मैं नहीं था

गीत गाना कोई भी।

तुमने मेरे अधर पर क्यों

शब्द लाकर रख दिये।।

मैं मुदित था पक्षियों को

नभ में विचरता देख कर।

तुमने आकर आंख में क्यूँ

नीड़ उनके रख दिये।।

चंद्रमा हो साथ मेरे

यह कभी सोचा नहीं था।

सूर्य पथ में साथ होगा…

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Added by SudhenduOjha on September 2, 2018 at 7:30am — No Comments

सुनो, नारी कभी नग्न नहीं होती है और सुनो, नारी कभी नहीं रोती है

सुनो, नारी कभी नग्न नहीं होती है

और सुनो, नारी कभी नहीं रोती है

नारी कभी नग्न नहीं होती

नग्न होती हैं ;

हमारी मातायें,

हमारी बहनें,

हमारी पत्नी,

हमारी बेटियां,

हमारी पुत्र-वधुयें,

हमारी विवशताएं

नारी कभी नहीं रोती है-

रोती हैं ;

हमारी मातायें,

हमारी बहनें,

हमारी पत्नी,

हमारी बेटियां,

हमारी पुत्र-वधुयें,

हमारी विवशताएं

फिर…

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Added by SudhenduOjha on August 24, 2018 at 6:30pm — 9 Comments

वो बेबसी का कहर देखते हैं

वो बेबसी का
कहर देखते हैं
हम भी अपना
शहर देखते हैं

उतर गया है
पानी सैलाब का
मिट्टी से सना
घर देखते हैं

शर्म, हया, अना
कहाँ बची है
झुक के सभी
दीवारो-दर देखते हैं

घोल दी गई कुछ
इस तरह मिठास
ज़ुबाँ में ज़हर का
असर देखते हैं

इस उम्र न आओगे
लौट कर यहाँ
हम न जाने किसकी
डगर देखते हैं

मौलिक एवम अप्रकाशित
सुधेन्दु ओझा

Added by SudhenduOjha on August 24, 2018 at 12:20pm — 1 Comment

कैसे-कैसे सवालों का जवाब है जिंदगी कांटों के साथ-साथ गुलाब है जिंदगी

कैसे-कैसे सवालों का जवाब है जिंदगी

कांटों के साथ-साथ गुलाब है जिंदगी

तुम समझ सके न जिसे हम समझ सके

ऐसे मसाएलों का अजाब (दुख/संत्रास) है जिंदगी

शज़र (वृक्ष) की ओट में चांद ठहर गया है

चांदनी कह रही है, माहताब है जिंदगी

मेरे औ चांद के जो दरम्यान था

शज़र का हल्का सा नक़ाब है जिंदगी

तेरी मुस्कुराहटों, रुसवाईयों से अलग

भूख और गुरबतों का असबाब है जिंदगी

तू रहे कहीं, मुझ से जुदा रह नहीं…

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Added by SudhenduOjha on August 13, 2018 at 10:30am — 3 Comments

चन्दन सा महका कर मन को बरसे काले मेह

चन्दन सा महका कर मन को बरसे काले मेह

 

चन्दन सा महका कर मन को

बरसे काले मेह

बूँद-बूँद में व्यथा समेटे

दहके कोई देह

 

हर आहट के धोखे ने

मुझको तहस-नहस कर डाला

सूनी वेदी पर खड़ी रही मैं

लिए हाथ में वर की माला

आएगा कि नहीं? हृदय में

उठते सौ संदेह

 

चन्दन सा महका कर मन को

बरसे काले मेह

बूँद-बूँद में व्यथा समेटे

दहके कोई देह

 

प्यास प्रेम की वो पहचाने

जो…

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Added by SudhenduOjha on July 7, 2018 at 3:08pm — No Comments

मुझे भी तुमसे मुहब्बत की आस है प्यारे।

मुझे भी तुमसे मुहब्बत की आस है प्यारे।

कदम-कदम पे सलीबों की प्यास है प्यारे॥

ख़यालो-ख्वाब, तसव्वुर भी जुर्म होते हैं।

चले भी आओ हर नज़ारा उदास है प्यारे॥

मुझे भी पढ़ के किताबों में दफ्न कर देना।

वाकिफ हैं तुम्हारी आदत खास है…

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Added by SudhenduOjha on July 2, 2018 at 1:00pm — No Comments

क्या है कविता?

क्या है कविता?

 

भाव-प्रवण शब्दों का

मोहक जाल

डम-डम, डिम-डिम

ध्वनियों का कमाल

प्रकृति में गुंजायमान,

अनहत नाद?

स्यात, प्रणय का…

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Added by SudhenduOjha on June 25, 2018 at 5:14pm — No Comments

कर नेकी दरिया में डाल

है धुआँ-धक्कड़ और बवाल

चेहरे-चेहरे लिक्खे सवाल

कर नेकी दरिया में डाल

 

बाबा खेल-खिलांवे भइय्या

नाचे भक्तिन ताल-तलईय्या

चोर सियार सब होशियार

मूड़ी काटे भए चमार

ये सूअर हैं, हरामखोर हैं

इनकी लें हम उतार खाल

(उपरोक्त पंक्तियाँ ढोंगी बाबाओं के संदर्भ में हैं)

 

है धुआँ-धक्कड़ और बवाल

चेहरे-चेहरे लिक्खे सवाल

कर नेकी दरिया में डाल

 

जात अहीर, अहीरन के साथे

देश-मुल्क अब किसके…

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Added by SudhenduOjha on June 22, 2018 at 7:30pm — No Comments

जाहिल हैं कुछ लोग, तुम्हें काफ़िर लिखते हैं।

जाहिल हैं कुछ लोग,

तुम्हें काफ़िर लिखते हैं।

अहले दीन की सुनो, तुम्हें ज़ाकिर लिखते हैं॥

 

वो जो इल्म के जानिब,

शमशीर ले कर निकला।

बाक़ी हैं कुछ लोग, उसे माहिर लिखते हैं॥

 

तड़पती प्यास लेकर आए

थे तुम जो सहरा से।

प्यार…

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Added by SudhenduOjha on June 19, 2018 at 6:42pm — No Comments

जिसकी चाहत है उसे हूर औ जन्नत देदे।

जिसकी चाहत है

उसे हूर औ जन्नत देदे।

मेरे मौला मुझे बस अपनी अक़ीदत देदे॥

उतार फेंकें पैरहने -

शहंशाही दिल से।

हो सके तो हमें, तू ऐसी तबीयत देदे॥

 

रुक, मेरे किस्से में

तू क्योंकर नहीं शामिल।

तेरे किस्से में रहूँ मैं, ऐसी नीयत देदे॥

 

रात मेरी वस्ल की हो,

और साथ तेरा हो।

मेरे मौला इस रात को क़यामत देदे॥

 

वो मजबूरन जो सजदे पे

ईमान लेके आता है।

ऐसे मुसलमानों को भी अपनी नसीहत…

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Added by SudhenduOjha on June 18, 2018 at 6:30am — No Comments

है अगर कोई मुसीबत,

है अगर कोई मुसीबत,

हम तुम्हारे साथ हैं।

है अगर कोई फजीहत, हम तुम्हारे साथ हैं॥

 

गूँजती हैं तूतियाँ,

नक़्क़ारखानों में मगर।

शहनाईओं की हो ज़रूरत, हम तुम्हारे साथ हैं॥

पाँव में छाले लिए वह

दूर से आया बहुत।

उठ उसे देदो नसीहत, हम तुम्हारे साथ हैं॥

 

आँधी औ तूफान से वह

रुक न पाएगा कभी।

संघर्ष ने की थी वसीयत, हम तुम्हारे साथ हैं॥

 

लौट कर आई…

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Added by SudhenduOjha on June 9, 2018 at 9:00pm — No Comments

मुझको यदि पढ़ना चाहोगे, कई बहाने मिल जाएँगे

यूँ ही.............. 

 

मुझको यदि पढ़ना चाहोगे

कई बहाने मिल जाएँगे

मुझसे यदि बचना चाहोगे

कई बहाने मिल जाएँगे

 

हम दुनियावी मसलों को-

छोड़, यहाँ तक आ पहुंचे हैं

तुम, अपनी फिकरों को छोड़ो

कई बहाने मिल जाएँगे

 

खूब दिखाए बाग-तितलियाँ

औ खूब सुनाई गज़लें भी

कैसे डूब गई मैं तुझमें 

कई बहाने मिल जाएँगे

 

कौन कह रहा तनहा हैं हम

हम से दूर हुए कब तुम थे?

मजबूरी टूटे बस…

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Added by SudhenduOjha on July 20, 2017 at 11:43am — No Comments

अवसादों की खींच-तान हो, तुमको मैंने देखा है

यूँ ही.............. 

 

अवसादों की खींच-तान हो,

तुमको मैंने देखा है

बादल तिरता आस्मान हो

तुमको मैंने देखा है

 

हर कारज के होने में

पाने में या खोने में

तुम ही सब अनुष्ठान हो

तुमको मैंने देखा है

 

आपा-धापी, गला-काट

बात-बात पर लाग-डांट

दुनिया से परेशान हो

तुमको मैंने देखा है

 

जगती के इस रेले में

औ विवाद के ठेले में

जलता सा जब मसान हो

तुमको मैंने देखा…

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Added by SudhenduOjha on July 20, 2017 at 11:27am — No Comments

दुनिया कहती है, मैं ऐसा हूँ। दुनिया कहती है, मैं वैसा हूँ॥

दुनिया कहती है,

मैं ऐसा हूँ।

दुनिया कहती है,

मैं वैसा हूँ॥

जेठ की दोपहरी

पसीने का एहसास,

ताम्र वर्ण की-

अतृप्त प्यास॥

तेरी काँख के गंध

जैसा हूँ॥



दुनिया कहती है,

मैं ऐसा हूँ।

दुनिया कहती है,

मैं वैसा हूँ॥

सही वक़्त, सही लोग

मिल नहीं पाए।

शब्द बिखरे रहे,

अर्थ मिल नहीं पाए॥

उनींदी रातों की,

सिलवटों जैसा हूँ॥



दुनिया…

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Added by SudhenduOjha on May 20, 2017 at 10:05pm — No Comments

फुर्सत से कभी मेरी,ज़िंदगानी देख लेना (कविता/नज़्म)

फुर्सत से कभी मेरी,

ज़िंदगानी देख लेना।

हो सके तो दरिया,

तूफानी देख लेना॥



है मेरी माँ ये,

समझाऊँ तुम्हें कैसे।

भूखा जो रहूँ, मैं

इसकी पेशानी देख लेना॥



आज़ाद परिंदे हो,

तुम उड़ ही जाओगे।

माँ-बाप की कभी खटिया,

पुरानी देख लेना॥



मैं अकेला कब था

मुझ में क़ायनात थी।

किस तरह से हमने, की

बे-ईमानी देख लेना॥



है सहूलियत तो,

मुंह खोलने से पहले।

पिताजी के अपनी,

परेशानी देख लेना॥



पीपल… Continue

Added by SudhenduOjha on March 16, 2017 at 2:35pm — No Comments

चेहरे को देख कर, मुझे समझाता रहा वो प्यार

  1. चेहरे को देख कर, मुझे
    समझाता रहा वो प्यार
    भीतर में झांक कर, मेरा
    सहरा नहीं देखा

    दुनिया के ठहाकों में
    कुछ इस तरह खोया
    झील में दर्द मेरा
    ठहरा नहीं देखा

    मौन से, निश्शब्द
    चेहरों से डरे हुक्काम
    सत्य पर इस क़दर
    पहरा नहीं देखा

    राम-लक्ष्मणों के तीर
    क्या भ्रष्ट हो गए
    हर साल बिना रावण
    दशहरा नहीं देखा

मौलिक एवं अप्रकाशित

सुधेन्दु ओझा

Added by SudhenduOjha on July 3, 2016 at 9:30pm — No Comments

गिरा हुआ हूँ मुझको उठाओ कभी-कभी

गिरा हुआ हूँ मुझको उठाओ कभी-कभी

गिरा हुआ हूँ मुझको

उठाओ कभी-कभी

आँखों में यूंही लौट के,

आओ कभी-कभी



हसरत थी कि झूम के,

होंठों को चूम लूं

हौसले को मेरे,

बढ़ाओ कभी-कभी

जो भी मिला वही मुझे, 

कुछ दाग़ दे गया

दागों की दास्ताँ भी,

सुनाओ कभी-कभी



राहों में रोक कर मुझे,

दहला रहे सवाल

इनके जवाब लेके भी,

आओ कभी-कभी



तुझे साथ लेके चलने पे,

ज़माने को…

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Added by SudhenduOjha on July 3, 2016 at 9:30pm — 6 Comments

मेरी हर अच्छी बात तुम हो.

मेरी हर अच्छी बात तुम हो.

तुम कहाँ हो,

क्यों गुम-सुम हो.

सुनो,

मेरी हर अच्छी बात

तुम हो.

अब, दल-दल साफ हो गया है.

उफ़्फ़ ये बसंत

और खुशबू,

मौसम भी 'आप' होगया है.

हरी दूब पर आँखें,

मन कहीं और उलझा है,

तुम नजदीक हो,

पर छूने नहीं देता,

प्यार एक अजीब-

सा फलसफा है.

जाने कैसे,

लोग तुम्हें, देखते ही-

पहचान लेते हैं.

हमें तो हरपल,

आप,

नए दिखते…

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Added by SudhenduOjha on July 3, 2016 at 9:00pm — No Comments

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