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मेरे पिता मेरा गर्व  - लघुकथा -

मेरे पिता मेरा गर्व  - लघुकथा - 

सुरेखा जी समाज शास्त्र की अध्यापिका होने के कारण   सातवीं कक्षा के बच्चों को "सामाजिक स्तर" क्या होता है। इस विषय पर पढ़ा रहीं थीं। कुछ छात्र सही तौर पर समझ नहीं पा रहे थे। अतः सुरेखा जी ने सभी छात्रों को  शीतकालीन अवकाश में अपने अपने पिता के विषय में एक निबंध लिख कर लाने का गृह कार्य दिया। 

साथ ही यह हिदायत भी दी कि यह निबंध काल्पनिक नहीं होना चाहिये। इसका आधार सत्यता और वास्तविकता को दर्शाता हुआ होना चाहिये। 

आज सुरेखा जी सभी बच्चों द्वारा लिख कर दिये निबंध पढ़ रहीं थीं। अधिकांश बच्चे संपन्न और शिक्षित परिवारों से थे। उनके निबंधों से भी यह प्रतीत हो रहा था। साथ ही यह भी स्पष्ट हो रहा था कि उन्होंने अपने परिवार के किसी सदस्य से मदद लेकर यह निबंध लिखा है। क्योंकि सुरेखा जी सभी छात्रों के बौद्धिक स्तर और क्षमता से पूर्ण रूप से वाक़िफ़ थीं। 

सभी बच्चों की कापियों को जाँचने के बाद सुरेखा जी ने कपिल को अपने पास बुलाया।

सुरेखा जी ने पूरी कक्षा को संबोधित करते हुए बताया कि कपिल ने सबसे अच्छा व प्रेरक  निबंध लिखा है। मेरी इच्छा है कि कपिल अपने पिता के बारे में सब को बतायें।

"मेरे पिता एक मामूली डाकिया हैं। वे बहुत गरीब परिवार से हैं। इसलिये मेरे सहपाठी मेरा मजाक उड़ाते हैं।वे बहुत पढ़े लिखे हैं लेकिन उन्होंने एक डाकिया बनना पसंद किया। वे सेना में जाना चाहते थे। लेकिन मेरी दादी की इच्छा नहीं थी। 

उनके एक मित्र सेना में थे। उनकी माँ गाँव में अकेली रहती थीं।मेरे पिता उनकी भी अपनी माँ की तरह ही देख भाल करते थे।उनके बेटे के मनीआर्डर भी पिताजी ही लाकर देते थे। पिछले साल उन दादी अम्मा की मृत्यु होने पर जब उनके बेटे को बुलाया गया तो यह भेद खुला कि उनके बेटे की मृत्यु तो एक युद्ध में पांच साल पहले ही हो चुकी थी। मेरे पिताजी अपनी अल्प आय में से अपने मित्र की बूढ़ी माँ को सदमे से बचाने के कारण कुछ रुपये मनीआर्डर के रूप में देते रहते थे। 

इसी सराहनीय कार्य हेतु उनको  विभागीय अनुशंसा पर राज्य सरकार द्वारा सम्मानित किया गया।" 

अधिकांश बच्चों के सिर झुके हुए थे लेकिन कपिल का सिर गर्व से उठा हुआ था।

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by TEJ VEER SINGH on January 14, 2022 at 11:51am

हार्दिक आभार आदरणीय अमीरुददीन "अमीर" साहब जी।

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on January 13, 2022 at 5:02pm

बहुत ख़ूब ! जनाब तेजवीर सिंह जी, लघुकथा की बधाई स्वीकार करें। 

Comment by TEJ VEER SINGH on January 12, 2022 at 11:55am

हार्दिक आभार आदरणीय मनोज अहसास जी।

Comment by मनोज अहसास on January 12, 2022 at 12:36am

बहुत सुंदर लघुकथा की हार्दिक बधाई आदरणीय

Comment by TEJ VEER SINGH on January 11, 2022 at 5:34pm

हार्दिक आभार आदरणीय लक्ष्मण धामी  जी।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 11, 2022 at 11:39am

आ. भाई तेजवीर जी, सादर अभिवादन। सुंदर प्रेरणादायी लघुकथा हुई है। हार्दिक बधाई।

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