For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

 शिकवों के दौर थे काफी,

 साथ ना तेरे आने को,

 पर एक वज़ह जिंदा थी बाकी,

 तेरा साथ निभाने को।

 

 अल्फाज़ों का शोर बहुत था,

 तुझे दगा बताने को।

 एक मेरी ख़ामोशी थी,

 सब ख़ामोश कराने को।

 

 हर गुंजाइश फीकी थी,

 प्रीत परवाज़ चढ़ाने को।

 एक मेरी उम्मीद थी बाकी,

 बाकी बचा बचाने को।

 

 तू पूरब, मैं पश्चिम हूं,

 ना मिलने का छोर है कोई,

 पर तेरा पता है काफी,

 मेरी राह बताने को।

 

 उगते सूरज की लाली तू,

 अंदाज़े आग दिखाने को,

 मैं पश्चिम की लाली हूं,

 सब समेट छिप जाने को।

 "मौलिक व अप्रकाशित"

Views: 469

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Dr. Geeta Chaudhary on April 18, 2023 at 8:56pm

प्रणाम  सर, मार्गदर्शन के लिए आभार।

Comment by Samar kabeer on April 18, 2023 at 8:05pm

मुहतरमा गीता जी आदाब, कविता का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।

सबसे पहले कविता का शीर्षक दुरुस्त कर लें 

'एक वज़ह' इसमें 'वज़ह' ग़लत शब्द है सहीह शब्द है "वज्ह" ।

इसके इलावा उर्दू के कुछ शब्दों में आपने नुक़्ते लगाए हैं कुछ में नहीं जिनमें नुक़्ते नहीं लगे वो ये हैं:-

काफी--'काफ़ी'

जिंदा--'ज़िंदा'

  • बाकी--बाक़ी'
  • दगा--'दग़ा'
  • दूसरे बन्द में लफ़्ज़ शब्द का बहुवचन 'लफ़्ज़ों' या 'अल्फ़ाज़' होता है,अल्फ़ाज़ों नहीं,देखिएगा ।
Comment by Dr. Geeta Chaudhary on April 17, 2023 at 7:05pm

सादर प्रणाम! प्रोत्साहन हेतु आपका हार्दिक आभार।

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on April 17, 2023 at 6:05pm

इस सुन्दर-सी भावपूर्ण रचना हेतु हार्दिक बधाई आदरणीया गीता चौधरी जी | 

Comment by Dr. Geeta Chaudhary on April 16, 2023 at 6:05am

हार्दिक आभार सर आपका..

Comment by अटल मुरादाबादी on April 15, 2023 at 8:31pm
बहुत भावपूर्ण सृजन
Comment by Dr. Geeta Chaudhary on March 31, 2023 at 2:15pm

आभार सर आपका...

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on March 31, 2023 at 12:05pm

अच्छी प्रवाहमयी कविता के लिए बधाई आदरणीया...

Comment by Dr. Geeta Chaudhary on March 22, 2023 at 10:33pm

बहुत आभार सर!

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 22, 2023 at 9:53pm

आ. गीता जी, सादर अभिवादन। सुंदर भावपूर्ण रचना हुई है। हार्दिक बधाई।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय अशोक भाई, आपके प्रस्तुत प्रयास से मन मुग्ध है. मैं प्रति शे’र अपनी बात रखता…"
5 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"रचना पर आपकी पाठकीय प्रतिक्रिया सुखद है, आदरणीय चेतन प्रकाश जी.  आपका हार्दिक धन्यवाद "
5 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय अशोक भाईजी "
5 hours ago
Ashok Kumar Raktale posted blog posts
6 hours ago
Chetan Prakash commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"नव वर्ष  की संक्रांति की घड़ी में वर्तमान की संवेदनहीनता और  सोच की जड़ता पर प्रहार करता…"
6 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
8 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी । "
8 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय अशोक रक्ताले जी सृजन पर आपकी समीक्षात्मक प्रतिक्रिया का दिल से आभार । इंगित बिन्दु पर सहमत…"
8 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कुर्सी जिसे भी सौंप दो बदलेगा कुछ नहीं-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजलपर उपस्थिति और सप्रेमं मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार। इसे बेहतर…"
17 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post न पावन हुए जब मनों के लिए -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति व उत्ताहवर्धन के लिए हार्दिक आभार।"
17 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। क्रोध पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई। साथ ही भाई अशोक जी की बात…"
17 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देवता चिल्लाने लगे हैं (कविता)
"   आदरणीय धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी सादर, धर्म के नाम पर अपना उल्लू सीधा करती राजनीति में…"
23 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service