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Dr. Geeta Chaudhary's Blog (8)

कविता: "एक वज़ह"

 शिकवों के दौर थे काफी,

 साथ ना तेरे आने को,

 पर एक वज़ह जिंदा थी बाकी,

 तेरा साथ निभाने को।

 

 अल्फाज़ों का शोर बहुत था,

 तुझे दगा बताने को।…

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Added by Dr. Geeta Chaudhary on March 11, 2023 at 10:28pm — 10 Comments

क्षणिकाएं

1. बड़ी बात ना कर, बड़ी ज़ात ना कर, ना बड़ा गुरूर,
ख़ुदा की नजरे-इनायत हुई, तो आजमाएगा ज़रूर।
.
2 . कभी वक्त का हिसाब, कभी बातों का,
ज्यादा ना माँगा करो, हम गणित के कच्चे हैं।
.
3. मेरे हौसलें भी बेअद्बी,
उसकी बेअद्बी भी हौसलें।
ये दुनियादारी का गणित है,
ज़मीर से नहीं हिसाब से चलता है।
.
4. तर्कों के तीर काट नहीं पाते,
तेरी…
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Added by Dr. Geeta Chaudhary on May 3, 2020 at 2:00am — 4 Comments

ऐ पागल पथिक !

ऐ पागल पथिक ! ठहरो जरा ,

रुको जरा , सांस लो तनिक ,

सम्भलो जरा I

सब कुछ पाने की चाह में ,

कुछ टूट गया उस आशियाने में,

कुछ छूट गया उस हसीं फ़सानें में ,

ठहरों, रुको, उसे सवारों, उसे खोजो जरा I

रुको जरा ........

घर पर नन्हों की आस में ,

और बुजुर्गों की लम्बी प्यास में ,

छूटे किसी साज और रियाज़ में ,

वक्त की चीनी घोलो जरा, कोई सुर ताल छेड़ो जरा I

रुको जरा ........

लूडो की गोटियाँ खोजो ,

शतरंज की बिसात बिछाओ जरा ,

कैरम की धूल…

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Added by Dr. Geeta Chaudhary on March 27, 2020 at 3:32pm — 2 Comments

कविता: "तुम्हारे हित देशहित से बड़े क्यूँ है?"

तुम्हारे हित देशहित से बड़े क्यूँ है?

ये दुश्चरित्र है तुम्हारा,

सताता मुझे क्यूँ है?

तुम इन्सान ही बुरे हो,

इल्जाम धर्म और जात पर क्यूँ है?

तुम्हे इसमें सुकून है बहुत,

ये मेरे सुकूं को खाता क्यूँ है?

ये धर्म के ठेकेदार हैं,

फिर मानवता के भक्षक क्यूँ हैं?

ये दोषी है समाज…

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Added by Dr. Geeta Chaudhary on January 12, 2020 at 8:09pm — 4 Comments

गीत: तब तुम कोई गीत लिखना प्रिये!

जब पीड़ा आसुओं को मात दे,

और संभाले ना संभले मन।

जब यादें मेरी दिल पर दस्तक दें,

और बेचैन हो ये अंतर्मन।

तब तुम कोई गीत लिखना प्रिये,

मैं आऊँगी भाव बनकर ज़रूर।

जब मेरी कमी तुमको खले,

और खोजे अक्श मेरा तुम्हारा मन।

जब बोझिल हो रातें काटे ना कटे,

और नींद से आँख-मिचौली खेले नयन।

तब तुम कोई सपना सजाना प्रिये,

मैं आऊँगी तुमसे मिलने ज़रूर।

जब पतझड़ में झड़ते हो पत्ते पुरातन,

और लहरों को देख विचलित हो मन।…

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Added by Dr. Geeta Chaudhary on December 26, 2019 at 2:00pm — 6 Comments

कविता: कुछ ख़ास है उन बातों की बात

वो लड़कपन के सपनों की बात,
काग़ज की नाव और कागज़ी जहाजों की बात।
वो जवानी की ज़िद्दी उमंगों की बात,
हर ख़्वाब को हकीकत बनाने की बात।
कुछ ख़ास है उन बातों की बात।
वो हसीं ख्वाबों, ख्यालों की रात,
वो चुराई हसीं मुलाकातों की बात।
वो कही अनकही बातों की बात,
वो बिखरते सिमटते जज्बातों की बात।
कुछ ख़ास है उन बातों की बात।
वो चाही, अनचाही विदाई की बात,
और जुदाई में छलके आंसुओ की…
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Added by Dr. Geeta Chaudhary on November 10, 2019 at 6:30pm — 8 Comments

कविता: स्मृति शेष

स्मृति शेष, बनी विशेष। 

कभी शूल सी चुभती हैं, 

कभी बन प्रसून महकती हैं। 

कभी अश्रु बन छलकती हैं, 

कभी शब्दों में ढलती हैं। 

स्मृति शेष, बनी विशेष। 

अशेष, अन्नत प्रवाह पीड़ा का, 

बिसराये ना बिसरती हैं। 

सब छूट गया सब टूट गया, 

शेष स्मृति का अटूट बंधेज। 



स्मृति शेष, बनी विशेष। 

कुछ…

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Added by Dr. Geeta Chaudhary on November 2, 2019 at 7:30am — 4 Comments

क्षणिकाएं: विछोह

1. ये यादों का अकूत कारवां है,

   नित बेहिसाब चला पर वही खड़ाI

2. तेरी हाथों की लकीरों का दोष,

   या मेरी दुआओ का,

   अकाट्य प्रवाह पहेली सा I

3. कभी शब्द भी मौन हुए,

   कभी मौन मुस्काए है I

   कभी अभिव्यक्तियों को पंख लगे,

   कभी सन्नाटों के साये है I

4. बातो का सिलसिला टूटा नहीं तेरे जाने से,

    बस फर्क इतना है तेरा किरदार भी निभाती हूँ मै I 

5. यूँ तो जी भर जिया हमने जिन्दगी को साथ…

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Added by Dr. Geeta Chaudhary on October 20, 2019 at 8:14pm — 9 Comments

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