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"कड़वी याद" -- [लघु कथा-11]

"कड़वी याद"--(लघु कथा)

ख़ूबसूरत पूजा ने बुरा सा मुँह बनाकर डैडी को कोहनी मार के सामने बैठे श्रीमान की तरफ संकेत किया। डैडी ने इसी तरह अपनी पत्नी को इशारा किया, तो होंठ भींचते हुए उन्होंने इशारे से उन दोनों को शान्त रहने को कहा। कुछ सकपकाते-घबराते से श्रीमान अपनी पत्नी से धीमे स्वर में बोले- "चलो शालू, आगे वाली बोगी पूरी खाली हो गई है, वहां अच्छी सीट मिल जायेगी ।"
"क्यों भला, यहीं तो ठीक है ?"
"मैंने कहा न, उठो"- पत्नी का हाथ खींचते हुये शर्म से आँखें झुकाये श्रीमान वहां से जाने ही लगे थे कि पूजा के डैडी बोल ही पड़े-"कहां चले श्रीमान, कुछ याद आ गया क्या ?"

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by Sheikh Shahzad Usmani on April 7, 2017 at 10:33pm
मेरी इस ब्लोग-पोस्ट पर समय देकर बेहतरीन सुझाव सहित हौसला अफ़ज़ाई हेतु सादर हार्दिक धन्यवाद आदरणीय प्रतिभा पाण्डेय जी व आदरणीय तेजवीर सिंह जी।
Comment by pratibha pande on October 8, 2015 at 8:45am

बहुत अच्छी कथा है ,बधाई आपको आदरणीय ,,वैसे इन श्रीमान  जी के साथ एक जवान बेटी को भी दिखा देते जो अपने पिता को गहरी निगाहों से देख रही है 

Comment by TEJ VEER SINGH on October 6, 2015 at 5:02pm

हार्दिक बधाई आदरणीय शेख उस्मानीजी! बहुत अच्छी लघुकथा!

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