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आहट पर दोहा त्रयी :

आहट पर दोहा त्रयी :

हर आहट में आस है, हर आहट विश्वास।
हर आहट की ओट में, जीवित अतृप्त प्यास।।

आहट में है ज़िंदगी, आहट में अवसान।
आहट के परिधान में, जीवित है प्रतिधान ।।

आहट उलझन प्रीत की, आहट उसके प्राण ।
आहट की हर चाप में, गूँजे प्रीत पुराण।।

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Sushil Sarna on November 6, 2020 at 9:10pm
आदरणीय    बृजेश कुमार 'ब्रज'  जी, सृजन आपकी मनोहारी प्रशंसा का आभारी है।
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on November 3, 2020 at 8:23pm

बहुत ही सुन्दर दोहे हुए आदरणीय...बधाई

Comment by Sushil Sarna on October 30, 2020 at 8:18pm
आदरणीय समर कबीर साहिब, आदाब, सृजन आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभारी है सर ।
Comment by Samar kabeer on October 30, 2020 at 2:48pm

जनाब सुशील सरना जी आदाब, अच्छे दोहे लिखे आपने, बधाई स्वीकार करें ।

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