For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल-तुमसे ग़ज़ल ने कुछ नहीं बोला?

2122       2122        2122        2

चुप रहीं आँखें सजल ने कुछ नहीं  बोला
इसलिए  मनवा विकल ने कुछ नहीं बोला

भाव जितने हैं सभी को लिख दिया हमदम
क्या कहूँ! तुमसे ग़ज़ल ने कुछ नहीं बोला?

जिस  किनारे  बैठ  के  पहरों  तुम्हें  सोचूँ
उस जलाशय के कमल ने कुछ नहीं बोला?

एक  पत्थर  झील में  फेंका कि जुम्बिश हो
झील के  खामोश जल ने कुछ नहीं  बोला

साथ 'ब्रज' के रात भर पल पल रहे जलते
जुगनुओं  के नेक  दल ने कुछ नहीं  बोला?
(मौलिक एवं अप्रकाशित)
बृजेश कुमार 'ब्रज'

Views: 465

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on November 24, 2020 at 9:59pm

उचित ही कहा आपने आदरणीय समर जी...मतला कमजोर तो है।दरअसल पहले जो मतला था उसपे ध्यान न होने के कारण काफ़िया दोषपूर्ण था।तभी ये एडिट किया लेकिन कमजोर तो है।कुछ और कोशिश करता हूँ।आपकी उपस्थिति और मूल्यवान सलाह के लिए शुक्रिया।

Comment by Samar kabeer on November 24, 2020 at 5:15pm

जनाब बृजेश कुमार 'ब्रज' जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें ।

मतला कमज़ोर है ।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on November 22, 2020 at 12:36pm

आदरणीय तेजवीर सिंह जी ग़ज़ल पे आपकी उत्साहवर्धन टिप्पड़ी से हार्दिक प्रसन्नता का अनुभव हुआ।बहुत बहुत आभार...

Comment by TEJ VEER SINGH on November 20, 2020 at 6:30pm

हार्दिक बधाई आदरणीय  बृजेश कुमार 'ब्रज' जी। बेहतरीन गज़ल।

एक  पत्थर  झील में  फेंका कि जुम्बिश हो
झील के  खामोश जल ने कुछ नहीं  बोला

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on November 19, 2020 at 11:28pm

आदरणीय चेतन जी आपने सही कहा बह्र लिखना मैं भूल गया।ऐसा पहले कभी नहीं हुआ।जहाँ प्रश्न चिन्ह है वो शे'र प्रश्न ही हैं।

हाँ लेकिन मतले से ही काफ़िया दुरुस्त नहीं है..ये गलती हुई है जिसे सुधारना होगा।

Comment by Chetan Prakash on November 19, 2020 at 11:17pm

आदाब, भाई ब्रजेश कुमार ब्रज ! बेहतर होता कि आप ग़जल की बह्र और अरकान भी रचना के ऊपर अंकित करते। ! ऐसा होने से शिल्प की पड़ताल बेहतर हो सकती थी। वैसे, मुझे तय करना कठिन हो रहा है कि रचना को नाम क्या दूँ, कदाचित नज़्म कहना बेहतर होगा। एक और बात और, हर शेर के बाद प्रश्नवाचक चिन्ह से आपका क्या आशय है बंधु ,कम से कम, ये नाचीज नही समझ पाया ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-अलग है
"जनाब बृजेश कुमार ब्रज जी,  //फसाना पूर्णरूप से काल्पनिक हो सकता है लेकिन कहानी कई बार सत्य भी…"
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-अलग है
"आदरणीय अमीरुद्दीन अमीर जी ग़ज़ल की विस्तृत समीक्षा के लिए हार्दिक आभार आपका...फसाना और कहानी में थोड़ा…"
yesterday
babitagupta posted a blog post

अनकंडीशनल दोस्ती

दोस्ती यानि जिंदगी....जिंदगी की नींव, खुशी, ख्वाब हैं और  ख्वाब की ताबीर भी...!दोस्ती वो ताकत होती…See More
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-अलग है
"पुनश्च: //पढ़ो गौर से जल्दबाजी न कीजे... कीजै के साथ 'पढ़ो' नहीं 'पढ़ें'…"
Saturday
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-अलग है
"जनाब बृजेश कुमार ब्रज जी आदाब, ख़ूबसूरत ख़याल के साथ ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है बधाई स्वीकार…"
Saturday
बृजेश कुमार 'ब्रज' posted a blog post

ग़ज़ल-अलग है

122     122     122     122फ़साना जुदा था कहानी अलग  हैसुनो ख़्वाब से ज़िंदगानी अलग  हैये गरमी की…See More
Saturday
Sheikh Shahzad Usmani left a comment for Dr.priya sufi
"आदाब। हार्दिक स्वागत आदरणीया जी।.आशा है कि अब आप मुख्य पृष्ठ पर दर्शाये गये समूहों की सूची व लिंक…"
Friday
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी posted blog posts
Friday
Dr.priya sufi is now a member of Open Books Online
Thursday
Anita Maurya commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post एक दिन आ‍ँसू पीने पर भी टैक्स लगेगा (ग़ज़ल)
"क्या बात , बेहद शानदार..."
Thursday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-आँसू
"बहुत बहुत आभार आदरणीय धामी जी...सादर"
Thursday
AMAN SINHA posted a blog post

बस मेरा अधिकार है

ना राधा सी उदासी हूँ मैं, ना मीरा सी  प्यासी हूँ मैं रुक्मणी हूँ अपने श्याम की, मैं हीं उसकी…See More
Aug 1

© 2022   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service