For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल- रूह के पार ले जाती रही

212 212 212 212

1

एक आवाज़ कानों में आती रही

रूह के पार मुझको ले जाती रही

2

ख़्वाब आँखों को हर पल दिखाती रही

ज़िन्दगी उम्र भर बरगलाती रही

3

रूह लफ़्ज़ों में ढल कागज़ों पर उतर

बज़्म में आह-ओ-नाले सुनाती रही

4

उसने छोड़ा मुझे ऐसे अंदाज़ से

साँस थमती रही जान जाती रही

5

ढाई आख़र की चाहत में वो रात दिन

दिल से दिल चुपके-चुपके मिलाती रही

6

सुर सजा कर लबों पर मुहब्बत भरे

रागिनी रोज़ 'निर्मल' वो गाती रही

मौलिक व अप्रकाशित

स्वरचित

रचना निर्मल

Views: 238

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Rachna Bhatia on January 27, 2021 at 6:35pm

आदरणीय अबोध बालक जी, हौसला बढ़ाने के लिए आभार। 

Comment by Rachna Bhatia on January 27, 2021 at 6:34pm

भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' नमस्कार। भाई बहुत बहुत धन्यवाद। 

Comment by Rachna Bhatia on January 27, 2021 at 6:32pm

आदरणीय गुरप्रीत सिंह 'जम्मू' जी आभारी हूँ। आपने सही कहा ,सर् का मार्गदर्शन मिलना हमारी खुशकिस्मती ही है। 

Comment by Rachna Bhatia on January 27, 2021 at 6:05pm

आदरणीय समर कबीर सर् नमस्कार। बहुत खूबसूरत आपने मतला बना दिया। सच बताऊं सर् मैंने जो सानी बदलने के लिए सोचा वह मुझे पसंद भी नहीं था। आपने मेरे पहले सानी को लेकर ही मतला बहुत अच्छा बना दिया । आपकी तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ।सादर। 

Comment by DR ARUN KUMAR SHASTRI on January 25, 2021 at 10:21pm

गजल में आपकी सादगी का गुमां मुझको हुआ है //
लम्हा लम्हा हरफ ब हरफ बानगी से जुडा हुआ है // 
दीद का अचरज उफनता इसके पहले // 
शिष्टता ने रोक मुझको लिया है  // 

एक अबोध बालक // अरुण अतृप्त 

Comment by Samar kabeer on January 25, 2021 at 7:10pm

बहुत शुक्रिय: प्रिय ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 25, 2021 at 7:07pm

रूह के पार मुझको बुलाती रही'

क्या कहने.. आ. भाई समर जी।

Comment by Samar kabeer on January 25, 2021 at 6:48pm

भाई गुरप्रीत सिंह जी आदाब, बहुत अर्से बाद ओबीओ पर आपको देख कर ख़ुशी हुई ।

Comment by Gurpreet Singh jammu on January 25, 2021 at 6:31pm

/रूह*हर दर्द अपना भुलाती रही//

यूँ कहें तो:-

'रूह के पार मुझको बुलाती रही

वाह वाह आदरणीय समर सर जी ।  क्या ख़ूब इस्लाह की आपने ।। obo से जुड़े सीखने वालों की खुशकिस्मती है की आप इस मंच पर उनकी रहनुमाई कर रहे हैं 

Comment by Gurpreet Singh jammu on January 25, 2021 at 6:25pm

आदरणीया रचना भाटिया जी नमस्कार। बहुत ही बढ़िया ग़ज़ल का प्रयास आपकी तरफ से । पहले दोंनों अशआर बहुत पसंद आए । और कमियों के बारे में तो उस्ताद समर सर जी आपको बता ही चुके हैं 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Krish mishra 'jaan' gorakhpuri's blog post 'जब मैं सोलह का था'~ग़ज़ल
"जनाब 'जान' गोरखपुरी साहिब आदाब, किसी भी बात से सहमत होना या असहमत होना आपकी मान्यताओं और…"
24 minutes ago
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post कुछ अतुकान्त
"श्रीमान कृश मिश्रा जी , हार्दिक आभार आपका"
7 hours ago
Krish mishra 'jaan' gorakhpuri commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post वोट देकर मालिकाना हक गँवाया- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"बहुत खूबसूरत ग़ज़ल हुई है आदरणीय भैया हार्दिक बधाई। सदी वाला शेर बहुत पसंद आया।"
8 hours ago
Krish mishra 'jaan' gorakhpuri commented on Usha Awasthi's blog post कुछ अतुकान्त
"बहुत सुंदर अतुकांत हेतु बधाई आ. ऊषा जी"
8 hours ago
Krish mishra 'jaan' gorakhpuri commented on Krish mishra 'jaan' gorakhpuri's blog post ग़ज़ल~ 'इश्क मुहब्बत चाहत उल्फत'
"आ. अमीरुद्दीन सर अपने अपना  बहुमुल्य समय इस रचना पर पुनः दिया आभारी हूँ। रश्क /ईर्ष्या /जलन/…"
8 hours ago
Krish mishra 'jaan' gorakhpuri commented on Krish mishra 'jaan' gorakhpuri's blog post ग़ज़ल~ 'इश्क मुहब्बत चाहत उल्फत'
"आ. समर सर सादर अभिवादन। //'दिन 'जान' ये भी कट जायेंगे' इस मिसरे को यूँ कर…"
9 hours ago
Krish mishra 'jaan' gorakhpuri commented on Krish mishra 'jaan' gorakhpuri's blog post ग़ज़ल~ 'इश्क मुहब्बत चाहत उल्फत'
""आ. रचना जी हार्दिक शुक्रिया आभार हौसलाफजाई के लिए।"
9 hours ago
Krish mishra 'jaan' gorakhpuri commented on Krish mishra 'jaan' gorakhpuri's blog post ग़ज़ल: खिड़की पे माहताब बैठा है।
"शुक्रिया आ. नाथ सोनांचली जी। बिल्कुल।"
9 hours ago
Krish mishra 'jaan' gorakhpuri commented on Krish mishra 'jaan' gorakhpuri's blog post ग़ज़ल: खिड़की पे माहताब बैठा है।
"आ. रचना जी आपका बेहद आभार सुखन नवाजी के लिए।"
9 hours ago
Krish mishra 'jaan' gorakhpuri commented on Krish mishra 'jaan' gorakhpuri's blog post ग़ज़ल: खिड़की पे माहताब बैठा है।
"आ. समर सर हौसलाफजाई के लिए बेहद शुक्रिया। जी सर वहां "" हों """ ही होना…"
9 hours ago
Admin posted discussions
9 hours ago
Krish mishra 'jaan' gorakhpuri commented on Krish mishra 'jaan' gorakhpuri's blog post ग़ज़ल: 'नेह के आँसू'
"आ. रचना जी मैं आदरणीय समर सर का बहुत आदर करता हूँ मुझे भलीभाँति पता है किस दुश्वारियों में संघर्ष…"
9 hours ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service